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‘इलेक्टोरल बॉन्ड योजना देश का सबसे बड़ा घोटाला’, प्रशांत भूषण का मोदी सरकार पर आरोप

BY -
Sanjeev Thakur CW
Sanjeev Thakur CW
Copy Editor • TheNewsPost.in
PublishedAt: January 14, 2026, 8:00:37 PM

रांची (TNP Desk) : इलेक्टोरल बॉन्ड्स योजना देश का सबसे बड़ा घोटाला है. चुनावी बॉन्ड से 16,500 करोड़ चंदा जिस कंपनियों ने राजनीतिक दलों को दी, वो केवल रिश्वत की राशि है. इसके बदले कंपनियों को लाखो करोड रुपये के प्रोजेक्ट दिये गए। 16,500 करोड़ के बॉन्ड्स में से भाजपा को 8251 करोड़ रुपए चंदा दिया गया, जो करीब 50 प्रतिशत है. इलेक्टोरल बॉन्ड ने भाजपा के भ्रष्टाचार मुक्त भारत जुमले का पर्दाफ़ाश किया है. उक्त बातें सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता प्रशांत भूषण और कॉमन कॉज से जुड़ी सामाजिक कार्यकर्ता अंजलि भरद्वाज ने रांची प्रेस क्लब में आयोजित प्रेस वार्ता में कही. इस दौरान कई तथ्य पेश किये. 

सुप्रीम कोर्ट ने चुनावी बॉन्ड योजना को असंवैधानिक करार दिया

सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने मोदी सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार ने चंदा देने वाले के गुमनामी और चंदे के विवरण को छुपाने  के लिए जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, कंपनी अधिनियम और आयकर अधिनियम में संशोधन किया था. 15 फरवरी, 2024 को एक ऐतिहासिक फैसले में सर्वाेच्च न्यायालय ने चुनावी बॉन्ड योजना को असंवैधानिक करार दिया और चुनावी बॉन्ड की आगे की बिक्री पर रोक लगा दी. सीजेआई डी.वाई. चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पांच जजों की बेंच ने चुनावी बॉन्ड लाने के लिए विभिन्न कानूनों में किए गए संशोधनों को भी रद्द कर दिया. 

आरबीआई और चुनाव आयोग के सलाह को मोदी सरकार ने किया नजरअंदाज

उन्होंने कहा कि आरटीआई से मिली सूचना से पता चला कि चुनावी बॉन्ड योजना लागू होने से पहले इसके खतरों को आरबीआई और चुनाव आयोग सहित अन्य ने उजागर किया था. उन्होंने कहा था इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा. लेकिन मोदी सरकार ने इसे नजरअंदाज कर दिया. सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद एसबीआई और चुनाव आयोग ने बॉन्ड्स के आंकड़ों को सार्वजानिक किया.

जांच के दायरे में जो कंपनियां थी उसने दिया चंदा

इस दौरान कई जानकारी प्रशांत भूषण देते हुए कहा कि इलेक्टोरल बॉन्ड्स के तहत जबरन वसूली की गई. उन्होंने कहा कि जो कंपनियां ईडी, सीबीआई और आईटी के जांच के दायरे में थी. उसने इलेक्टोरल बॉन्ड्स खरीदकर भाजपा को चंदा दिया. कई कंपनियों ने जब चुनावी बॉन्ड खरीदा तो उसी समय कई बड़े ठेके मिल गए. इस दौरान उन्होंने कई उदाहरण भी पेश किये. उन्होंने कहा कि मेघा इंजीनियरिंग एंड इंफ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड ने कुल 966 करोड़ दान दिया. इसमें से लगभग 60 प्रतिशत भाजपा को मिला। 

घाटे में चल रही कंपनियों ने भी खरीदा बॉन्ड्स 

सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता ने कहा कि इस योजना के तहत कई ऐसी कंपनियां जो घाटे में चल रही थी उसने में भी भारी मात्रा में चुनावी चंदा दिया. उन्होंने कहा कि 33 कंपनियों ने बॉन्ड्स से कुल 576.2 करोड़ का चंदा दिया, जिसमें से 434.2 करोड़ सिर्फ भाजपा को मिला. जबकि इन 33 कंपनियों का कुल घाटा 1 लाख करोड़ से ज्यादा था. चुनावी बॉन्ड के जरिए कई फार्मा कंपनियों को विशेष छूट भी मिला. भाजपा को चंदा देने के कारण अनेक फार्मा कंपनियों के उल्लंघनों को रोकने के प्रति सरकारी संस्थाएं नाकाम रही. उस फार्मा कंपनियों ने घटिया दवाओं को बाजार में बिक्री की. जिससे देश में लाखों लोगों का जीवन खतरे में पड़ गया. 

घोटाले का पर्दाफाश होना जरूरी

प्रशांत भूषण ने कहा कि कई नई कंपनियां भी राजनीतिक दलों को बड़ी रकम दी है. जबकि कंपनी अधिनियम में खिलाफ है. नियम कहता है कि तीन साल से कम समय वाली कंपनी किसी को चंदा नहीं दे सकती है. इसके बावजूद, करीब 20 नए कंपनियों ने तीन साल के अन्दर ही चुनावी बॉन्ड्स खरीदा. उन्होंने कहा कि बॉन्ड्स के जरिए हुए व्यापक घोटाले का पर्दाफाश होना ज़रूरी है. इसके लिए अदालत की निगरानी में एसआईटी के गठन के लिए कॉमन कॉज और सेंटर फॉर पब्लिक इंटरेस्ट लिटिगेशन द्वारा सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की गई है.

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