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बुजुर्गों को महंगे उपहारों की नहीं..बस थोड़ा सा आपके स्नेह और भरपूर सम्मान की होती है चाहत

BY - Rajnish Sinha

Published at: 03 Mar 2026 11:45 AM (IST)

बुजुर्गों को महंगे उपहारों की नहीं..बस थोड़ा सा आपके स्नेह और भरपूर सम्मान की  होती है चाहत

TNP DESK : तेजी से बदलती दुनिया में जब जीवन भागदौड़ से भर गया है तब हमारे घर के बुजुर्ग अक्सर अकेलेपन की मार झेलते नजर आते हैं. उम्र बढ़ने के साथ शरीर भले कमजोर हो जाए लेकिन दिल और मन को आज भी अपनों के स्नेह, सम्मान और साथ की जरूरत रहती है सच तो यह है कि बुजुर्गों की सबसे बड़ी और असरदार दवा कोई गोली या टॉनिक नहीं बल्कि हँसता–खेलता परिवार है. बुजुर्गों के जीवन का सबसे संवेदनशील पक्ष है

सम्मान और निर्णयों में भागीदारी भी चाहिए

जब बच्चे नौकरी या पढ़ाई के कारण दूर चले जाते हैं तो माता-पिता या दादा-दादी अपने ही घर में अकेलापन महसूस करने लगते हैं. ऐसे में यदि परिवार के सदस्य रोज कुछ पल उनके साथ बैठें  बातें करें पुरानी यादें सुनें और साझा करें तो यह उनके मन को नई ऊर्जा देता है. हँसी-मजाक, बच्चों की चहल-पहल और पारिवारिक मेल-जोल बुजुर्गों के मन में उत्साह बनाए रखता है. यह मानसिक तनाव को कम करता है और अवसाद जैसी समस्याओं से बचाता है. बुजुर्गों को केवल देखभाल ही नहीं बल्कि सम्मान और निर्णयों में भागीदारी भी चाहिए.

यह भावना उनके आत्मविश्वास को मजबूत करती है

जब परिवार के सदस्य किसी महत्वपूर्ण फैसले में उनकी राय लेते हैं तो उन्हें महसूस होता है कि वे आज भी परिवार के केंद्र में हैं. यह भावना उनके आत्मविश्वास को मजबूत करती है. आपकी जरूरत है यह एहसास किसी भी दवा से अधिक प्रभावी है.चिकित्सकों का भी मानना है कि खुशहाल माहौल बुजुर्गों के स्वास्थ्य पर सकारात्मक प्रभाव डालता है. नियमित बातचीत से याददाश्त सक्रिय रहती है. हँसी तनाव हार्मोन को कम करती है. परिवार के साथ भोजन करने से खान-पान संतुलित रहता है.

बुजुर्ग अनुभव का भंडार होते हैं

भावनात्मक सुरक्षा से रक्तचाप और शुगर जैसी समस्याएं नियंत्रित रहने में मदद मिलती है. अर्थात परिवार का स्नेह उनके लिए प्राकृतिक औषधि की तरह काम करता है. बुजुर्ग अनुभव का भंडार होते हैं. उनके जीवन के अनुभव नई पीढ़ी के लिए मार्गदर्शन बन सकते हैं.

जरूरत है थोड़े समय,स्नेह और भरपूर सम्मान की

जब बच्चे दादा-दादी या नाना-नानी से कहानियाँ सुनते हैं तो संस्कार और परंपराएं सहज रूप से आगे बढ़ती हैं. इस तरह एक हँसता–खेलता परिवार केवल बुजुर्गों का ही नहीं बल्कि पूरे समाज का भविष्य मजबूत करता है. बुजुर्गों के चेहरे की मुस्कान ही घर की असली रौनक है. उन्हें महंगे उपहारों से ज्यादा जरूरत है थोड़े समय, थोड़े स्नेह और भरपूर सम्मान की. आइए संकल्प लें कि हम अपने घर के बुजुर्गों को अकेला महसूस नहीं होने देंगे. क्योंकि सच यही है बुजुर्गों की सबसे अच्छी दवा साथ-साथ हसता खेलता परिवार...

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