धनबाद(DHANBAD): झारखंड के शिक्षा मंत्री जगरनाथ महतो इस दुनिया में नहीं रहे. संघर्ष से उपजे इस नेता के बारे में बहुत सारी बातें हैं, जो लोग नहीं जानते होंगे. साल 2015 का वक्त रहा होगा. गोमो से बरकाकाना जाने वाली पैसेंजर ट्रेन में गले में बादाम की टोकरी लटका कर जब बादाम बेचने लगे तो लोग कुछ समझ नहीं पा रहे थे. बाद में पता चला कि यह तो उनके आंदोलन का एक तरीका था. बादाम बेचने वाले इस कद्दावर नेता की तस्वीर लोगों के जेहन में आज भी ताजी है. ट्रेन पर चढ़कर आवाज लगाते हुए बादाम यह कहते हुए बेचा कि मूंगफली ले लो- मूंगफली ले लो.
लोगों की लग गई थी लाइन
पहले तो बहुत सारे लोग उन्हें पहचान नहीं पाए लेकिन जो उन्हें जानते थे, पहचान लिए. उसके बाद तो विधायक से मूंगफली खरीदने की होड़ लग गई. विधायक के इस काम पर यात्रियों ने अचरज किया. बाद में खुलासा हुआ कि उनके आंदोलन का यह एक तरीका था. फेरी वालों के समर्थन में वह आंदोलन पर उतरे थे. अलग-अलग डिब्बों में जाकर उन्होंने मूंगफली बेचीं. दरअसल ट्रेनों में घूम- घूम कर खाने पीने की चीजें बेचने वाले वेंडरों पर रेलवे ने रोक लगा दी थी. उन्हें देख कर आर पी एफ खदेड़ देती थी. आजीविका चले जाने से निराश फेरीवालों ने विधायक जगरनाथ महतो से संपर्क किया और अपनी परेशानी बताई.
रेलवे ने विधायक पर मुक़दमा भी किया
विधायक ने डीआरएम से फेरी वालों पर लगी रोक हटाने का आग्रह किया. वह खुद डीआरएम से मिले बावजूद अनुमति नहीं दी गई. तब उन्होंने यह अनूठा तरीका निकाला ,इसके खिलाफ उनपर मुकदमा भी हुआ लेकिन वालों के समर्थन में मुकदमा खाने को तैयार रहे. बादाम बेचकर उस समय छपी खबरों के अनुसार ₹645 की आमदनी हुई थी. उन पैसों को उन्होंने फेरी वालों को ही दे दिए. वह झारखंड मुक्ति मोर्चा के कद्दावर नेता थे. झारखंड अलग राज्य आंदोलन में भी उनकी भूमिका थी. गुरुजी के साथ आंदोलन में कंधे से कंधा मिलाकर काम किया.
रिपोर्ट -धनबाद ब्यूरो
