धनबाद(DHANBAD) : धनबाद सहित झारखंड और बंगाल में हुई प्रवर्तन निदेशालय की छापेमारी की डायरी में किसके- किसके नाम है? कैश फ्लो का क्या विवरण है? लाभार्थियों के रूप में किन के नाम दर्ज है. इसको लेकर कम से कम जितने भी "व्हाइट कॉलर एलिमेंट है ",उनकी धड़कने बढ़ी हुई है. यह बात अलग है कि कोयलांचल में कोयला का अवैध कारोबार करने वाले पूरी तरह से इस छापेमारी के बाद सहमे हुए है. बता दें कि धनबाद में कोयला का पैसा बोलता है, आपके पास समझने की तरकीब होनी चाहिए. अगर धनबाद की बात की जाए, तो धनबाद के थानों और ओपी में सैकड़ो कोयला चोरी-तस्करी से जुड़े मुकदमे दर्ज होंगे. यह अलग बात है कि झारखंड और बंगाल में दर्ज कोयला चोरी और तस्करी के मामलों को ही ईडी ने आधार बनाया और उसके बाद कार्रवाई की. कार्रवाई के बाद धनबाद से लेकर बंगाल तक सन्नाटा पसर गया है.
कोयले के अवैध कारोबारी क्यों भूमिगत हो गए है
कोयले के अवैध कारोबार से जुड़े लोग या तो भूमिगत हो गए हैं अथवा अपना मोबाइल बंद कर लिया है. प्रवर्तन निदेशालय के अधिकारियों की भारी भरकर टीम ने झारखंड से लेकर बंगाल तक 44 जगह पर छापेमारी की है. सूत्र तो यह भी बता रहे हैं कि कुछ डिजिटल चैट भी मिले हैं और कई साक्ष्य भी टीम को उपलब्ध हुए है. प्रवर्तन निदेशालय की अधिकृत जानकारी में बताया गया है कि अवैध कोयला खनन और कोयला तस्करी को लेकर झारखंड और बंगाल में कई एफआईआर दर्ज है.
बरामद दस्तावेज भी कई बातों की ओर इशारा करते है
इससे यह पता चलता है कि झारखंड और बंगाल के बॉर्डरिंग इलाके पर कोयले की आपूर्ति बिना किसी वैध कागजात के होती है. छापेमारी में बरामद दस्तावेज भी इसी की ओर इशारा करते है. कागजात यह भी बताते हैं कि स्थानीय प्रशासन की मदद से एक बहुत बड़ा संगठित गिरोह इस काम में लगा हुआ है. यह भी बताया गया है कि कई डायरी और रजिस्टर भी मिले है. जिसमें अवैध कैश कलेक्शन तथा उनके लाभार्थियों के भी नाम भी है. हो सकता है कि ईडी के अधिकारी डायरी और रजिस्टर में दर्ज लाभार्थियों के खिलाफ भी कार्रवाई करे.
कोयलांचल में कोयले के धंधे में कई सफेदपोश लगे हुए है,सूची लम्बी हो सकती है
कोयलांचल में तो कोयले के धंधे में कई सफेदपोश लगे हुए है. ऐसे लोग खुद अवैध धंधा नहीं करते, पूंजी लगाकर करवाते हैं और मुनाफे की बड़ी राशि खुद के पास रख लेते है. बता दे कि कोयलांचल में एक नंबर का धंधा करने वाले कारोबारी अब घर में बैठ गए हैं और दो नंबरी धंधेबाजो की चांदी है. यही वजह है कि धनबाद के हार्डकोक उद्योगों के धुएं उन्ही जगहों से उठ रहे हैं, जहां अवैध कोयले की खपत होती है. कोयला कंपनियों से कोयला मिलने का तरीका इतना जटिल और महंगा होता है कि कोयला पर आधारित उद्योग चल नहीं पाते है. उल्लेखनीय है कि झारखंड और बंगाल में इतनी बड़ी रेड आज तक कभी नहीं हुई थी. इस रेड में 100 अधिकारियों की टीम लगी हुई थी. जाहिर है कि यह जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ेगी, धनबाद के सैकड़ो की गर्दन पर तलवार लटका सकती है.
रिपोर्ट -धनबाद ब्यूरो
