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लिव इन रिलेशनशिप से अछूता नहीं है झारखंड का जनजातीय समाज, खूंटी में एक साथ 50 जोड़ों को दी गयी सामाजिक मान्यता

लिव इन रिलेशनशिप से अछूता नहीं है झारखंड का जनजातीय समाज, खूंटी में एक साथ 50 जोड़ों को दी गयी सामाजिक मान्यता

रांची(RANCHI): शहरी समाज के लिए लिव इन रिलेशनशिप का कॉन्सेप्ट भले ही नया हो, इसे 21वीं सदी की उपज माना जाता हो. लेकिन जनजातीय समाज में इसका प्रचलन सदियों पुराना है.

झारखंड में इस प्रथा को ‘ढुकु’ के नाम से जाना जाता है. इसका अर्थ होता है ढुकना या घुसना, यानी आपकी जिंदगी में किसी का प्रवेश. जब कोई महिला बगैर सामाजिक रश्मों को पूरा किये बगैर किसी पुरुष के घर में घुस जाती है तो उसे ढुकनी के नाम से जाना जाता है. आम रुप से आदिवासी समाज इन महिलाओं को सिंदूर लगाने की अनुमति नहीं देता. 

लिव इन रिलेशनशिप की झारखंड में हजारों कहानियां

झारखंड में आपको हजारों ऐसे जोड़े मिल जायेंगे,जिनकी उम्र गुजर गयी, वह नाती-पोते वाले हो गयें, लेकिन सामाजिक रुप से उनकी कभी शादी नहीं हुई. इसके साथ एक त्रासदी यह भी है कि वह महिला कानूनी रुप से उस पुरुष और उसकी संपत्ति पर अपने अधिकार का दावा नहीं कर सकती. हालांकि जनजातीय समाज में यह कानूनी अड़चन बहुत मायने नहीं रखता, बहुत हद तक सामाजिक स्तर पर इसकी मान्यता प्राप्त रहती है. लेकिन फिर भी कई बार इन महिलाओं को परेशानियों का सामना करना पड़ता है.

सामाजिक संगठनों के द्वारा सामाजिक मान्यता देने की कोशिश

अब कुछ सामाजिक संगठनों के द्वारा इन रिश्तों को कानूनी और सामाजिक मान्यता दिलवाने की मुहिम चलायी जा रही है, वर्षो-बरस से एक दूसरे के साथ रह रहे जोड़ों को उनका कानूनी अधिकार दिलवाने का प्रयास किया जा रहा है.

सामाजिक संस्था निमित्त की पहल

कुछ इसी प्रकार की एक कोशिश खूंटी जिले में सामाजिक संस्था निमित्त की ओर से की गयी है. इस संस्था के द्वारा एक साथ 50 ऐसे जोड़ों को चिह्नित कर एक सामाजिक समारोह का आयोजन किया गया, खास बात यह रही कि इसमें जिले के सभी आला अधिकारी भी मौजूद रहें. डीसी शशि रंजन और उपविकास आयुक्त नीतीश कुमार की भी उपस्थिति रही.

इन जोड़ों को कल्याणकारी योजनाओं से जोड़े जाने की घोषणा

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए डीसी शशि रंजन ने कहा कि हमारी कोशिश वर्षो से लीव इन रिलेशन में रह रहे इन जोड़ों को उनका अधिकार दिलवाने की है, उनके अन्दर उम्मीद भरने की है. इस तरह के कार्यक्रम से लिव इन रिलेशन में रहने वालों जोड़ो को ताकत मिलेगी. उन्होंने कहा कि आज के समारोह के बाद इन जोड़ों को जिला प्रशासन की ओर से सभी कल्याणकारी योजनाओं से जोड़ा जायेगा, साथ ही इनके विवाह का निबंधन भी करवाया जायेगा.

आर्थिक वंचना जनजातीय समाज में ढुकु परंपरा का एक बड़ा कारण

यहां यह भी बता दें कि आर्थिक वंचना भी जनजातीय समाज में ढुकु परंपरा का एक बड़ा कारण है. क्योंकि यहां शादी के अवसर पर पूरे गांव को भोज देने की प्रथा है, जिसमें मांस और मदिरा भी परोसा जाता है. कई जोड़े इसका खर्च उठाने में अपने को असमर्थ पाते हैं, इसके कारण भी लिव इन रिलेशन की शुरुआत होती है. वे एक साथ रहकर अपनी जिंदगी की शुरुआत कर देते हैं, कोशिश रहती है कि कुछ समय के बाद जब आर्थिक स्थिति में सुधार होगा, तब शादी की औपचारिकता पूरी कर ली जायेगी और धीरे-धीरे यह वक्त गुजरता जाता है. कभी-कभी तो वे नाती-पोते वाले भी हो जाते हैं. लेकिन सामाजिक प्रथाओं का पालन नहीं किये जान के कारण कई बार उनके बच्चों को पैतृक संपत्ति में हिस्सेदारी मिलने में कठनाइयों का सामना भी करना पड़ता है.

Published at:23 Feb 2023 06:28 PM (IST)
Tags:Live in RelationshipDhukuJharkhandKhuntiTrible CultureGroup MarraigeSocial Ceremony
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