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धनबाद: दुर्गा पूजा बाजार पर लगा ग्रहण, 25 करोड़ से अधिक का कैसे हुआ नुकसान, समझिए 

धनबाद: दुर्गा पूजा बाजार पर लगा ग्रहण, 25 करोड़ से अधिक का कैसे हुआ नुकसान, समझिए 

धनबाद(DHANBAD): आज महानवमी है. सुबह में बारिश हुई और अभी भी आसमान में बादल छाए हुए हैं. मौसम विभाग के अनुसार अभी और बूंदे पड़ेगी. इससे काफी लोगों पर गहरा असर पड़ा है. लोग ना रो सकते हैं और ना पीड़ा किसी से कह सकते हैं. यही हाल हुआ है धनबाद में ठेला-खोमचा लगाकर या फिर बड़े दुकानों में बैठ कमाने का उम्मीद पाले लोगों का. सप्तमी तक तो लोग घरों से निकलते ही नहीं हैं. अष्टमी से मेला घूमना शुरू करते हैं और यह कार्यक्रम दशहरा तक चलता है. या फिर जहां आगे भी प्रतिमाएं रहती हैं, दुकानें बनी रहती है. लेकिन इस बार बरसात ने ऐसे छोटे-छोटे दुकानदारों पर वज्र गिरा दिया है. बाहर से आकर यहां पंडालों में झूला लगाने वालो को भी निराशा हाथ लग रही है.

बड़े भी प्रभावित है, लेकिन इज्जत बचा रहे है

बड़े व्यापारी भी इससे प्रभावित हुए हैं. लेकिन, बोलने से कतराते हैं. छोटे दुकानदारों का कच्चा माल तो बर्बाद हुआ ही हैं, इसके साथ ही तैयार माल के भी खरीदार उन्हें नहीं मिले. कपड़ा, सोना-चांदी के कारोबारी तो ठीक-ठाक व्यवसाय कर लिए, लेकिन जनरल स्टोर या इमिटेशन ज्वेलरी वाले पूरी तरह से मार खा गए हैं. छह माह दुकान में रखने के बाद इमिटेशन ज्वेलरी ख़राब हो जाती है. भारी पूंजी लगाकर सामान मंगाए गए थे, लेकिन बरसात ने वज्रपात कर दिया. उससे पूरा व्यवसाय जगत हिल गया है. एक अनुमान के अनुसार, धनबाद जिले में 25 करोड या उससे अधिक के कारोबार को बरसात ने प्रभावित किया है. इसकी पुष्टि बैंक मोड़ चेंबर ऑफ कॉमर्स के महासचिव प्रमोद गोयल और पुराना बाजार चेंबर ऑफ कॉमर्स के अध्यक्ष अजय नारायण लाल ने भी की है. 

कैसे होगा कर्ज का भुगतान

ठेला, खोमचा लगाकर कारोबार करने वालों में बहुत ऐसे होते हैं. जो 365 दिन यह काम नहीं करते. पूजा के मौके पर ही ठेला और खोमचा सजाते हैं. इसके लिए वह कर्ज लेते है. यह कर्ज भी उनको बहुत कठिनाई से मिलता है और इस कर्ज की अदायगी का रास्ता उससे कहीं अधिक कठिन होता है. प्रमोद गोयल बताते हैं कि प्रकृति ने ठेला ,खोमचा लगाकर कारोबार करने वालों पर तो तूषारापात कर दिया है. इसका असर अगले कई महीनों तक रहेगा, क्योंकि सब अपने बजट के अनुसार काम करते हैं. चाहे वह छोटे दुकानदार हो, ठेला खोमचा वाले हो या बड़े दूकानदार. पूजा में सबको उम्मीद रहती है, सबको भरोसा रहता है कि आमदनी होगी ओर अगले कुछ महीनो तक घर का खर्च चलाने में कोई परेशानी नहीं होगी. वैसे भी कोरोना की मार झेलने वाले परिवार ने इस बार बैंक से पैसा निकालने में भी थोड़ा परहेज किया है. इसलिए भी खरीदारी की वह रौनक नहीं दिखी जैसा पहले बाजारों में देखा जाता था.

रिपोर्ट: शामभवी सिंह, धनबाद

 

Published at: 04 Oct 2022 03:32 PM (IST)
Tags:News

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