दुमका(DUMKA): झारखंड का राजकीय पुष्प पलाश है. झारखंड के जंगल मे पलाश पेड़ की अधिकता है. गर्मी के दस्तक देते ही पलाश के पेड़ पर उगने वाले पलाश फूल बरबस लोगों को अपनी ओर आकर्षित करता है. अपने आप में खूबसूरती को समेटे पलाश के फूल समय के साथ पेड़ से झड़कर समाप्त हो जाता था, लेकिन अब दुमका जिला के जरमुंडी प्रखंड के तेतरिया गांव की महिलाओं के लिए यही पलाश के फूल जीविकापार्जन का आधार बन रहा है, जिसके सहारे यहां की महिलाएं आत्मनिर्भरता की राह पर कदम बढ़ा चुकी है. और यह सब संभव हुआ है जेएसएलपीएस द्वारा गठित आजीविका महिला ग्राम संगठन के सामूहिक प्रयास से.
दरअसल होली का त्योहार आने वाला है. होली को रंगों का त्योहार कहा जाता है. बाजार में कई तरह के रंग गुलाल उपलब्ध है. अधिकांश रंग और गुलाल का निर्माण में केमिकल का प्रयोग किया जाता है. जिसका दुष्प्रभाव लोगों के स्कीन पर पड़ता है. नतीजा समय के साथ लोग रंग गुलाल से परहेज करने लगे है.
पलाश के फूल से हर्बल गुलाल का हो रहा निर्माण
लेकिन इस सब के बीच बाजार में कई हर्बल रंग गुलाल मौजूद है, जिसकी मांग समय के साथ बढ़ने लगा है. जिसे देखते हुए तेतरिया की महिलाओं द्वारा पलाश के फूल से हर्बल गुलाल का निर्माण किया जा रहा है. जेएसएलपीएस के टीम लीडर के नेतृत्व में तेतरिया आजीविका महिला ग्राम संगठन की महिलाओं द्वारा इसे तैयार किया जा रहा है. महिलाएं सुबह उठ कर जंगल जाती है और पलाश के फूल तोड़ कर लाती है. घर के कार्य से मुक्त होने के बाद समूह की महिलाएं हर्बल गुलाल जा निर्माण करती है. होली के मद्देनजर इसकी मांग भी काफी है. प्रशासन द्वारा जगह-जगह पलाश मार्ट नामक स्टाल लगाया गया है, जहां समूह की महिलाओं द्वारा निर्मित सामग्री की बिक्री होती है. पलाश मार्ट में इन दिनों हर्बल गुलाल की बिक्री खूब हो रही है. जिसके माध्यम से ये महिलाएं आत्मनिर्भरता की राह पर कदम बढ़ा चुकी है.
रिपोर्ट: पंचम झा, दुमका