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दुमका: झारखंड सरकार पर हमलावर दिखे पूर्व सीएम रघुवर दास, ब्रिटिशर्स से की राज्य सरकार की तुलना

BY -
Prakash Tiwary
Prakash Tiwary
Copy Editor • TheNewsPost.in
PublishedAt: January 14, 2026, 7:36:36 AM

दुमका(DUMKA): झारखंड सरकार के पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास दो दिवसीय दौरे पर दुमका में है. 2 दिनों में कई कार्यक्रमों में उन्होंने शिरकत किया. दुमका पर सदन में प्रेस वार्ता का आयोजन किया गया. प्रेस वार्ता के दौरान पूर्व सीएम रघुवर दास वर्तमान राज्य सरकार पर हमलावर दिखे. अपने प्रेस वार्ता की शुरुआत में ही उन्होंने वर्तमान राज्य सरकार की तुलना ब्रिटिश सरकार से की. उन्होंने कहा कि जिस तरह ब्रिटिश काल में भारत की खनिज संपदा का दोहन होता था. वर्तमान समय उसी तरह झारखंड में न केवल खनिज संपदा की लूट हो रही है, बल्कि महिलाओं की अस्मिता को भी लूटा जा रहा है. झारखंड की जनजातीय संस्कृति में जल, जंगल, जमीन और खनिज संपदा का विशेष महत्व है और इसकी रक्षा के लिए हमारे पूर्वजों ने उल गुलान किया था. आने वाले समय में भी यहां की जनता सरकार को सबक सिखाएगी.

सरकार की नियत पर उठाए सवाल

प्रेस वार्ता के दौरान पूर्व सीएम रघुवर दास ने कल झारखंड विधानसभा से पारित 1932 खतियान आधारित स्थानीय नीति और ओबीसी आरक्षण के मुद्दे को लेकर राज्य सरकार की नियत पर सवाल खड़े किए. उन्होंने कहा कि सरकार की मंशा सही नहीं है. हेमंत सोरेन को 1932 का खतियान तब याद आया जब ईडी ने उनके दरवाजे पर दस्तक दी. जनता को बरगलाने के लिए आनन-फानन में बगैर तैयारी के 1932 के खतियान आधारित स्थानीय नीति को पारित किया गया और 9वीं अनुसूची में शामिल करने के लिए छोड़ दिया. उन्होंने कहा कि यह पूरी तरह से गैर संवैधानिक है. उन्होंने कहा कि 9वी अनुसूची में कोई विषय तभी जाता है जब सर्वसम्मति से संकल्प पारित कर भेजा जाता है लेकिन इन मुद्दों पर संकल्प पारित ही नहीं हुआ. उन्होंने सरकार से सवाल पूछा कि स्थानीय नीति तो आपने पारित कर दिया लेकिन नियोजन नीति का क्या होगा? इस बाबत अभी तक स्पष्ट नहीं हुआ है. उन्होंने कहा कि भाजपा ओबीसी आरक्षण के पक्षधर है लेकिन कुछ संवैधानिक प्रावधान भी है सरकार को उसका भी ध्यान रखनी चाहिए.

हेमंत सोरेन के दोनों हाथ में लड्डू

जो भी हो 1932 के खतियान का जिन्न एक बार फिर बोतल से बाहर निकला है और निश्चित रूप से हेमंत सोरेन ने भाजपा को बैकफुट पर लाकर खड़ा कर दिया है. केंद्र सरकार के पाले में गेंद फेंक कर हेमंत सोरेन ने अपने दोनों हाथों में लड्डू रखा है. अगर यह 9वीं अनुसूची से पारित हो जाता है इसका क्रेडिट झामुमो लेगी और अगर नहीं होता है तो आगामी चुनावी मुद्दे को हेमंत सोरेन ने और मजबूत बना लिया है. अब देखना दिलचस्प होगा कि आम जनता के बीच भाजपा अपनी बातों को कैसे रखती है जिससे आम जनता वास्तविक स्थिति से अवगत हो सकें.

रिपोर्ट: पंचम झा, दुमका    

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