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दुमका : सुहाग की रक्षा के लिए सरकार से गुहार लगा रही वृद्ध महिला, नहीं मिल रही मदद

दुमका : सुहाग की रक्षा के लिए सरकार से गुहार लगा रही वृद्ध महिला, नहीं मिल रही मदद

दुमका(DUMKA): अपनी सुहाग की रक्षा के लिए जार बेजार होकर रोती एक महिला को आपने सुना. मंत्री जी की नसीहत भी सुनी और एक कहावत भी आपने सुना होगा कि चिराग तले अंधेरा. बहुत कुछ इसी कहावत को चरितार्थ कर रहा है दुमका जिला के जरमुंडी प्रखंड की यह खबर. क्या है पूरा मामला देखिए The News Post की खास रिपोर्ट..

दुमका जिला के जरमुंडी प्रखंड के बगिया कुसुमडीह गांव में डबरु ईश्वर नामक व्यक्ति विगत 5 महीने से बेड पर पड़ा है. सुहाग की रक्षा के लिए पत्नी शंखावती देवी दिन रात पति की सेवा में लगी रहती है. यही दोनों की दिनचर्या बन गया है. लेकिन सवाल उठता है कि इस दिनचर्या से लकवाग्रस्त ईश्वर डबरु का इलाज कैसे होगा? पेट भरने के लिए पीडीएस दुकान से 10 किलो खाद्यान मिल जाता है लेकिन वह महीने भर नहीं चल पाता है. पति जब ठीक था तो खेती के साथ साथ मजदूरी कर परवरिश कर रहा था. परिवार के कमाऊ सदस्य जब बेड पकड़ ले तो एक निःसंतान दंपत्ति का जीवन कितना कष्टप्रद हो सकता है इसका अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है. लकवाग्रस्त ईश्वर का इलाज जड़ी बूटी के साथ साथ झाड़ फूंक से हुआ लेकिन परिणाम सिफर रहा. तभी तो एक पत्नी अपने सुहाग की रक्षा के लिए सरकार से गुहार लगा रही है. 

महिला की गुहार पर जब स्थानीय विधायक सह कृषि मंत्री बादल पत्रलेख से सवाल किया गया तो उन्होंने माना कि मामला संज्ञान में आया है. संज्ञान में आने के बाद मंत्री ने स्थानीय मुखिया को उसके घर भेजा. मुखिया द्वारा उसे मदद भी पहुंचाया गया. क्या मदद मिला वह भी महिला के मुख से ही सुनाएंगे लेकिन उसके पहले मंत्री द्वारा मीडिया कर्मियों को दी गयी नसीहत और वर्तमान सरकार द्वारा पूरे राज्य में अविरल बह रही विकास की गंगा को भी जान लीजिए. 

महिला पति की सेवा करे या फिर कार्यालय का चक्कर लगाए

मंत्री ने अपने बयान में एक बात कही जो गौर करने लायक है. उनका दावा है कि आज किसी भी गांव में चले जाएं हर घर में सरकार की दो से 3 योजनाएं जरूर मिलेगी. सचमुच इस दावे में दम है. महिला को सरकार की जिस दो योजनाओं का लाभ उसे मिल रहा है उसका नाम है प्रधानमंत्री आवास और लाल कार्ड. महिला के बयान में एक बात और है कि प्रधानमंत्री आवास अपने से बनाने के बजाय उसने ठेका पर दे दिया. मंत्री के संज्ञान में जब मामला आया तो उन्होंने स्थानीय मुखिया को मदद के लिए शंखावती के घर भेजा. महिला अपने पति की इलाज की गुहार लगाई. मुखिया से उसे 20 किलो चावल सहित अन्य खाद्यान मदद में मिला. मंत्री के संज्ञान में मामला आने के बाद हो सकता है आने वाले समय में उसके पति का इलाज भी हो जाए. सरकारी लाभ लेने के लिए कागजी प्रक्रिया पूरी करने की दिशा में प्रशासनिक प्रयास जरूर शुरू हो गयी होगी. लेकिन सवाल है कि महिला पति की सेवा करे या फिर कार्यालय का चक्कर लगाए. 

सरकार जनहित में कार्य नहीं कर रही है ऐसा नहीं है. आखिर सरकार तो जनता के लिए बनी है और बेहतर कार्य करना सरकार का दायित्व भी है. लेकिन मंत्री द्वारा दिए गए आंकड़े और जमीनी हकीकत देख कर यही कहा जा सकता है कि झारखंड में कागज पर खेती होती है, जिसपर कलम का हल चलता है. स्याही से सिंचाई होती है और आंकड़ों का उत्पादन होता है. 

रिपोर्ट: पंचम झा

Published at: 15 Mar 2023 01:58 PM (IST)
Tags:jharkhanddumkaAn old woman pleading with the government to protect Suhag

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