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लातेहार: सड़क के अभाव में मरीज को कंधे पर ले जा रहे थे अस्पताल, बीच रास्ते में हुई मौत 

BY -
Mehak Mishra CE
Mehak Mishra CE
Copy Editor • TheNewsPost.in
PublishedAt: January 12, 2026, 11:42:15 PM

लातेहार(LATEHAR): झारखंड के लातेहार जिला से एक दुखद तस्वीर निकलकर सामने आई है. यह तस्वीर यह दर्शाता है कि अभी भी झारखंड के ग्रामीण इलाकों में ना तो सड़क पहुंचा है और इन जगहों पर सरकार के विकास से दूर-दूर तक कोई नाता नहीं है. 

खाट पर ले जाया जा रहा था अस्पताल 

बता दे कि सोमवार की सुबह लातेहार जिला के बसेरिया गांव में इलाज के कारण 46 वर्षीय एक आदिवासी महिला की मौत हो गई. बताया जा रहा है कि कई दिनों से महिला बीमार थी,जब सोमवार को महिला की हालत ज्यादा बिगड़ गई तो, परिवार के लोगों ने उस महिला को खटिया में बांध कर कंधे के सहारे अस्पताल ले जाने लगे.  लेकिन इस बीच समय से अस्पताल न पहुंचने पर रास्ते में ही महिला की मौत हो गई. 

ग्रामीण क्षेत्र से आती है ऐसी कई तस्वीर 

दरअसल महिला को खटिया से बंद कर अस्पताल ले जाने का वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है. इस वीडियो में साफ तौर पर नजर आ रहा है कि महिला को किस तरह से खटिया और रस्सी की मदद से बांधकर कंधे पर ढोकर पैदल अस्पताल ले जाया जा रहा है. हालांकि झारखंड की यह पहली तस्वीर नही है इस तरह के कई मामले सामने आए है, लेकिन फिर भी सरकार की आंख नही खुल रही है और आय दिन समय पर इलाज न मिलने पर मरीज की मौत हो जाती हैं. 

कई बार दिए गए सड़क के लिए आवेदन

इस मामले पर गांव वालो का कहना है कि कई बार बड़े अधिकारियों से गांव में सड़क और बिजली की मांग की गई है लेकिन हमारे गांव में अभी तक यह सरकारी लाभ नही पहुंचा. वहीं गांव वालो ने कहा कि जो भी बीमार पड़ता है उसे इसी तरह कंधे पर उठा कर अस्पताल ले जाया जाता है और कई बार तो समय पर इलाज न मिलने पर रास्ते में मरीज की मौत हो जाती हैं. 

सरकारी लाभ से गांव वाले वंचित 

दरअसल बसरिया गांव की जनसंख्या तकरीबन 200 से अधिक है यह गांव आदिवासी बहुल है. जहां एक ओर सरकार खुद को आदिवासी की सरकार कहती है वहीं दूसरी तरफ आदिवासी क्षेत्र में ही सरकार की सुविधा नही पहुंच रही है बता दे कि इस गांव में लोगों को पीने के पानी के लिए भटकना पड़ता हैं. बता दे कि इस गांव से रोड 7 से 8 किलोमीटर दूर है और यह गांव पूरे जंगल से गिरा हुआ है. वहीं बरसात में गांव का नक्शा भी बदल जाता है.

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