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रांची में Congress और Bjp के बीच सीधी टक्कर, इस बार जीत की बाजी किसके हाथ, जानिए समीकरण

BY -
Sanjeev Thakur CW
Sanjeev Thakur CW
Copy Editor • TheNewsPost.in
PublishedAt: January 15, 2026, 5:09:47 PM

रांची (RANCHI) : झारखंड का रांची लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र चुनावी राजनीति में सबसे महत्वपूर्ण स्थान रखता है. इस क्षेत्र से कांग्रेस (Congress) और भाजपा (BJP) के बीच हमेशा टक्कर देखने को मिली है. बिहार से अलग राज्य बनने के बाद झारखंड में अबतक चार बार चुनाव हुए हैं. जिसमें दो बार कांग्रेस और दो बार भाजपा ने फतह हासिल की. पहली बार चुनाव 2004 में चुनाव, जिसमें कांग्रेस के सुबोधकांत सहाय ने जीता. 2009 में फिर कांग्रेस के सुबोधकांत सहाय ने जीत का परचम फहराया. वहीं 2014 में भाजपा के रामटहल चौधरी और 2019 में संजय सेठ ने बाजी मारा था. 

बीजेपी को संजय सेठ पर फिर से भरोसा

एकीकृत बिहार में रांची लोकसभा सीट पर कांग्रेस का सबसे ज्यादा दबदबा था. मजेदार बात यह है कि सत्ता में काबिज झारखंड मुक्ति मोर्चा इस सीट से एकबार भी नहीं जीत पायी है. इस बार बीजेपी ने फिर से संजय सेठ पर भरोसा जताया है. वहीं इंडिया गंठबंधन में शामिल कांग्रेस ने अभी तक उम्मीदवार की घोषणा नहीं की है. उम्मीद की जा रही है पार्टी जल्द ही प्रत्याशी की घोषणा कर देगी. बता दें कि रांची लोकसभा सीट के अंतर्गत छह विधानसभा सीटें आती हैं, जिसमें इचागढ़, सिल्ली, खिजरी, रांची, हटिया और कांके शामिल है. इसमें कांके अनुसूचित जाति और खिजरी अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित है. 

चार बार के सांसद रामटहल चौधरी को पहली बार 2004 में मिली थी हार

रांची लोकसभा क्षेत्र से लगातार चार बार सांसद रहे रामटहल चौधरी को पहली बार 2004 में कांग्रेस के सुबोधकांत सहाय से हार का सामना करना पड़ा था. उस चुनाव में सुबोध कांत सहाय 40.8 फीसदी वोट पाकर संसद पहुंचे थे. वही भाजपा के रामटहल चौधरी को 38.6 फीसदी वोट मिला था. वे दूसरे स्थान पर थे. 2009 में फिर कांग्रेस के सुबोध कांत सहाय ने बीजेपी के रामटहल चौधरी को हराकर सांसद बने थे. इस चुनाव में कांग्रेस को 42.9 प्रतिशत मत मिले थे. वहीं बीजेपी को 41 प्रतिशत मत मिले. 

2014 में भाजपा ने की जोरदार वापसी

2014 के चुनाव में भाजपा ने मोदी लहर में जोरदार वापसी की. बीजेपी के रामटहल चौधरी 42.7 प्रतिशत वोट लाकर कांग्रेस से यह सीट छीन लिया. वहीं दूसरे स्थान पर रहे कांग्रेस सुबोधकांत सहाय को 23.76 प्रतिशत वोट मिला था. 2014 में इस संसदीय सीट पर जीत का अंतर 199,303 रहा था. 2019 के लोकसभा चुनाव में फिर मोदी का मैजिक दिखा. हालांकि, इस बार रामटहल चौधरी को भाजपा ने रांची से टिकट नहीं दिया. जबकि रामटहल चौधरी रांची लोकसभा क्षेत्र से पांच बार चुनाव जीतकर भाजपा को सीट दिलाई थी. यहां से संजय सेठ को मैदान में उतारा. इससे नाराज होकर रामटहल चौधरी ने निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा. हालांकि, वे जीत नहीं पाये, उन्हें सिर्फ 2.4 फीसदी वोट ही मिला. वहीं भाजपा के उम्मीदवार संजय सेठ विजयी हुए. उन्हें कुल 57.30 वोट मिले. जबकि कांग्रेस के सुबोधकांत सहाय को 34.3 फीसदी वोट मिले थे.

मतदाता और सामाजिक तानाबाना

2019 के लोकसभा चुनाव के आंकड़ों के अनुसार इस सीट पर मतदाताओं की संख्या करीब 12.35 लाख है. इस क्षेत्र की साक्षरता दर सबसे ज्यादा 64.26 प्रतिशत है. चुकि यह सामान्य श्रेणी की सीट है. 2011 की जनगणना के अनुसार रांची संसदीय सीट पर एससी मतदाताओं की संख्या 5.4 प्रतिशत है, एसटी की 28.9 प्रतिशत है. मुस्लिम मतदाताओं की संख्या है करीब 15.1 प्रतिशत है. करीब 12 प्रतिशत कुर्मी मतदाता है. ग्रामीण मतदाताओं की बात करें तो इसकी संख्या करीब 47.5 प्रतिशत है जबकि शहरी वोटरों की संख्या 52.5 प्रतिशत है.

बीजेपी को इस मुद्दे पर मिल सकती है टक्कर

संजय सेठ के उल्लेखनीय कार्यों को देखते हुए भाजपा ने दूसरी बार टिकट दिया है. लेकिन यहां एंटी इनकम्बेंसी हो सकता है. क्योंकि कांग्रेस ने इस बार चुनाव में महंगाई, बेरोजगारी को मुद्दा बनाया है. वहीं राहुल गांधी ने रांची में न्याय यात्रा निकालकर लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचा है. कयास लगाया जा रहा है कि पार्टी इस बार भी सुबोध कांत सहाय पर ही दांव खेलेगी. लेकिन खबर ये भी आ रही है कि पांच बार के सांसद रामटहल चौधरी भी टिकट की रेस में हैं. ये तो आने वाले समय में ही पता चलेगा कि कांग्रेस की ओर से कौन उम्मीदवार होगा.

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