धनबाद (DHANBAD): BCCL के भौरा क्षेत्र के महाप्रबंधक पर बोतल और कांच का गिलास फेंकने के मामले में पुलिस को दी गई शिकायत को वापस लेने की घोषणा के बाद मंगलवार को सीके साइडिंग में चल रहे विवाद पर बीसीसीएल के सीएमडी ने हस्तक्षेप किया है. आंदोलन कर रहे नेताओं से मंगलवार को बातचीत की. और रास्ता निकालने का भरोसा दिया. बता दें कि सीके साइडिंग के 246 मजदूरों के नियोजन और मजदूर नेताओं पर दर्ज एफआईआर के संबंध में निर्णय हुआ कि एक कमेटी का गठन कर 246 मजदूरों के रोजगार की समस्या का हल निकाला जाएगा. साथ ही मजदूर नेताओं पर एफ आई आर वापस लेने पर भी लगभग सहमति बनी है.
सीएमडी ने पूर्व विधायक और भाजपा नेत्री से की बात
सीएमडी ने पूर्व विधायक अरूप चटर्जी और भाजपा नेत्री रागिनी सिंह से बातचीत की. इस मामले में प्रबंधन द्वारा किए गए मुकदमे में मासस के जिला अध्यक्ष सहित पांच नेताओं को पुलिस ने जेल भेज दिया है. इसके बाद भी आंदोलन कर रहे नेता और समर्थक झुकने को तैयार नहीं है. उनका आंदोलन लगातार बढ़ रहा था. आंदोलन का नेतृत्व स्थानीय नेताओं के अलावा पूर्व विधायक अरूप चटर्जी और भाजपा नेत्री रागिनी सिंह कर रहे हैं. प्रबंधन ने सीके साइडिंग को बंद कर आउटसोर्सिंग कंपनी के हवाले कर दिया है. इस वजह से 246 मजदूर बिना काम के हो गए है. इन्हीं मजदूरों के नियोजन के लिए आंदोलन शुरू हुआ था. उसके बाद प्राथमिकी हुई और नेताओं की गिरफ्तारी की गई.
बोतल और कांच का गिलास फेंकने का मामला हुआ था चर्चित
दूसरी ओर भौरा जीएम पर बोतल और कांच का गिलास फेंकने के मामले में पुलिस में लिखित शिकायत को वापस लेने की बात सामने आई. बोतल और कांच का गिलास फेंकने का आरोप पूर्व डिप्टी मेयर व झरिया की विधायक के देवर एकलव्य सिंह पर लगा था. इसके बाद जनता मजदूर संघ (बच्चा गुट) के एक नेता ने भी पुलिस में शिकायत की थी. उनका आरोप था कि जाति सूचक शब्द का प्रयोग किया गया है. शिकायत और काउंटर शिकायत के बाद इसे वापस लेने की दोनों पक्षों ने बात कही. इसी के बाद बीसीसीएल प्रबंधन पर दबाव बढ़ने लगा कि आखिर 'एक आंख में काजल और दूसरी आंख में सुरमा' वाली कार्रवाई क्यों हो रही है. चर्चा हो रही है कि एक तरफ एकलव्य सिंह आरोपी बनाए जा सकते थे , इसलिए प्रबंधन के साथ-साथ पुलिस भी फूंक-फूंक कर कदम रख रही थी. दूसरी ओर सीके साइडिंग मामले में नेताओं को जेल भेज देने के बाद आंदोलनकारियों का गुस्सा बढ़ रहा था और वह सवाल कर रहे थे कि दबंग घराने पर एक्शन क्यों नहीं. पुलिस भी सवालों के घेरे में थी कि एक मामले में तो सक्रियता दिखा कर नेताओं को जेल भेज देती है तो दूसरे मामले में शिकायत को लंबित रखकर प्रबंधन को वापस लेने का मौका देती है.
