धनबाद (DHANBAD): मंत्र सिद्धि से जंजीर में बंधी मां काली को यदि बंधन मुक्त कर दिया गया तो कैसा प्रलय मचाएगी, इसका किसी को अंदाजा भी नहीं है. यही कारण है कि प्रतिमा को 24 घंटे बांध कर ही रखा जाता है. मोहतोड़ काली के नाम से चर्चित यह प्रतिमा रतनपुर (गोविंदपुर) स्थित आरएस मोर कॉलेज परिसर के बीच में स्थापित है. यह प्रतिमा किसी मंदिर में स्थापित न होकर घर में ही स्थापित है. 1995 में स्थापित की गई है. पश्चिम बंगाल अंतर्गत पुरुलिया के मोहतोड़ नामक स्थान से मूर्ति लाने के कारण इसका नाम ही मोहतोड़ काली पड़ गया.
यहाँ माता का विराट स्वरुप है
इसकी प्रेरणा सुभाष राय को मां काली ने सपने में दी थी. उनकी ही प्रेरणा से उन्होंने ही इसकी स्थापना की थी. यह मां का विराट रूप है. किसी अनहोनी की आशंका से मां काली को कमरे में ही बंद रखा जाता है. पूजा-अर्चना के लिए सुबह से दोपहर 12 बजे तक एवं शाम 4 बजे से रात 9 बजे तक उस कमरे का पट खोला जाता है. श्रद्धालुओं का दावा है कि काली पूजा की रात कुछ पल के लिए मूर्ति में कंपन होता है. उसी परिसर में मां काली की एक और मूर्ति स्थापित है. मंदिर के पुजारी षष्टि राठौर ने बताया कि बैशाख (11 मई) में प्रतिवर्ष यहां बड़ा मेला लगता है, जिसमें दूर-दूर से आये श्रद्धालु शामिल होते हैं। मान्यता है कि मां मोहतोड़ काली भक्तों को मुंहमांगा वरदान देती है.माँ के दर्शन करने पहुंचे भक्तो का कहना है कि सच्चे मन से जो भी मांगते है, मिलता है.
रिपोर्ट : शाम्भवी सिंह के साथ प्रकाश
