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धनबाद कोयलांचल : कोयले में बिराजती महालक्ष्मी ने दिखाया प्रभाव, धनतेरस पर खूब खनके सोना और चांदी 

BY -
Samiksha Singh
Samiksha Singh
Copy Editor • TheNewsPost.in
PublishedAt: January 15, 2026, 5:47:15 PM

धनबाद(DHANBAD): धनबाद कोयलांचल में कोयले में बसती है महालक्ष्मी. यह हम नहीं कहते,आंकड़े और बाजार बोलते हैं. कोयले में बिराजनेवाली इस महालक्ष्मी का प्रभाव शुक्रवार को धनबाद के बाजारों में दिखा. सोना और चांदी खूब खनके. देर रात तक बिक्री होती रही. एक अनुमान के अनुसार धनबाद के बाजारों में एक दिन में 500 करोड रुपए से अधिक का कारोबार हुआ. इसमें सोना और चांदी ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. देर रात तक बाजारों में भीड़भाड़ बनी रही. यहां की अर्थव्यवस्था कोयले पर ही आधारित है. धनबाद में जितनी राशि खर्च होती है, उसका 84% कोयले से आता है. हर एक रुपए में 84 पैसा कोयले की कमाई का है. यह तथ्य कोई हवा हवाई नहीं है, बल्कि एक अध्ययन में सामने आया है.

बीसीसीएल के हर एक कर्मी का प्रतिदिन औसत आमदनी ₹5000

अध्ययन के अनुसार  बीसीसीएल के हर एक कर्मी का प्रतिदिन औसत आमदनी ₹5000 का है. महीने की बात की जाए तो यह लगभग सवा लाख रूपए है. बात इतनी ही नहीं है, कोयले से अधिक लोग रोजगार भी पा रहे हैं. इसमें अगर अवैध कोयले के खनन को जोड़ दें तो यह संख्या और अधिक हो जाएगी. बीसी सीएल में लगभग 36000 अधिकारी, कर्मचारी काम करते हैं.  पचास हजार से एक लाख के बीच ठेका मजदूर भी काम करते हैं. हार्डकोर उद्योगों से जुड़े मजदूरों को जोड़ दिया जाए तो यह संख्या और अधिक हो जाएगी. इसके अलावे अवैध खनन के काम में लगे कोयला तस्करों, मजदूरों की संख्या भी कम नहीं है. कोयला तस्करों के मजदूर की तादाद भी अधिक है. यह अलग बात है कि यह काम गैरकानूनी है लेकिन धनबाद में धड़ल्ले से चल रहा है.बहुत से लोग इसके पोषक बने हुए हैं.

झारखंड को कोयले से सबसे अधिक रॉयल्टी धनबाद से मिलती है

धनबाद के सांसद पशुपतिनाथ सिंह की माने तो धनबाद में पिछले 3 सालों में पचास हजार करोड़ से भी अधिक कोयल का अवैध उत्खनन हुआ है. वैसे धनबाद की समृद्धि का आधार अंग्रेजों के जमाने से कोयला ही है. अंग्रेजों ने ही सबसे पहले रानीगंज और फिर उसके बाद धनबाद में कोयले का खनन शुरू किया था. तब से यह कोयला धनबाद के लिए महत्वपूर्ण था और अभी भी है. बात सिर्फ इतनी भर ही नहीं है, धनबाद झारखंड सरकार को चलाने में भी अहम भूमिका निभाता है. फिलहाल झारखंड को कोयले से सबसे अधिक रॉयल्टी धनबाद से मिलती है. डीएमएफटी के रूप में कोयले से प्राप्त राशि धनबाद की आर्थिक ताकत है .इससे धनबाद को अपनी विकास योजनाओं को चुनने का और उसे पूरा करने का अवसर मिलता है.  

धनतेरस पर कोयलंचल में जमकर हुई खरीददारी 

कोयले के रूप में धनबाद कोयलांचल में विराजती महालक्ष्मी का असर शुक्रवार को धनतेरस के बाजार पर खूब दिखा. लोगों ने जमकर खरीदारी की. वाहनों की बिक्री भी खूब हुई. वाहनों का बाजार भी सवा करोड़ के आसपास रहा. कल यानी रविवार को दीपावली है. इसकी भी पूरी तैयारी है. रोशनी से धनबाद नहा रहा है. कुल मिलाकर इस बार धनबाद कोयलांचल में धनतेरस पर खूब धन वर्षा हुई. कारोबारियों ने भी इसका भरपूर फायदा उठाया. लोगों को आकर्षित करने के लिए पहले से ही बाजार में ऑफरों की भरमार थी. यह ऑफर भी लोगों को खरीदारी के लिए आकर्षित किया. बीसीसीएल के बोनस का भी इसमें महत्वपूर्ण योगदान रहा. इस वर्ष एक कर्मी को ₹85000 बोनस के रूप में मिले हैं.

रिपोर्ट: धनबाद ब्यूरो 

Tags:KoyalanchalDhanbaddhanteras 2023gold and silver tinkled a lot on Dhanteras

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