धनबाद (DHANBAD): कोयलांचल में कोयले के अवैध खनन में लगे "मजबूत हाथों" के सिंडिकेट को तोड़ने के लिए धमाकेदार कार्रवाई शुरू की गई है. यह कार्रवाई कतरास, बाघमारा से लेकर झरिया इलाके तक शुरू हुई है. दो दिन पहले धनबाद के सदर अनुमंडल अधिकारी ने भी घटनास्थल का निरीक्षण किया और अपनी उपस्थिति में कई अवैध खदानों की भराई कराई है. उनके नेतृत्व में चलाए गए अभियान में बाघमारा अनुमंडल के विभिन्न थाना और ओ पी क्षेत्र शामिल थे. अधिकारियों की भारी भरकम टीम थी, उनके नेतृत्व में लगभग आधा दर्जन स्थानों पर छापामारी की गई. एसडीएम ने सख्त आदेश दिया है कि कार्रवाई 100% होनी चाहिए, केवल खानापूर्ति बर्दाश्त नहीं की जाएगी.
धमाकेदार एक्शन में कई मुहानों को किया गया है बंद
उन्होंने चेतावनी दी है कि इसमें लापरवाही करने वाले अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई होगी. बीसीसीएल के अधिकारियों को भी उन्होंने निर्देश दिया. इधर, शुक्रवार को जमुनिया नदी के तटीय इलाकों में अवैध कोयला खनन के खिलाफ प्रशासन का रुख कड़ा था. शुक्रवार को बाघमारा पुलिस, सीआईएसएफ और बीसीसीएल की संयुक्त कार्रवाई में नदी के किनारे बने अवैध कोयला मुहानों को भरने का अभियान चला. कार्रवाई के दौरान किसी भी स्थिति से निपटने के लिए भारी संख्या में पुलिस बल और सीआईएसएफ के जवान तैनात किए गए थे. अधिकारियों ने कहा कि किसी भी कीमत पर अवैध गतिविधियों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा, यह अभियान आगे भी चलेगा. इधर पता चला है कि बीसीसीएल, सीआईएएसफ और पुलिस ने संयुक्त रूप से बस्ताकोला क्षेत्र के बंगाली कोठी, रानी सती मंदिर, कुइयां 5 नंबर, कुइयां 7 नंबर में अवैध खनन स्थलों की भराई करा दी. अवैध खनन स्थलों को चिन्हित कर डोजरिंग कराई गई.
अब केवल "रैट होल" नहीं, खदानें खोल ली जातीं हैं
हालांकि कागज पर गिनाने के लिए बीसीसीएल तो पहले भी अवैध मुहानो की डोज रिंग कराती रही ही. लेकिन उसके बाद फिर से कोयला खनन करने वाले मुहाना खोल लेते हैं और अवैध खनन शुरू हो जाता है. दरअसल अवैध खनन करने-कराने वाले तो "मुखौटा" होते हैं. असली खेल तो पर्दे के पीछे रहकर पूंजी लगाकर "मजबूत लोग" करते हैं. इसके लिए बकायदे बाहर से मजदूरों को हायर किया जाता है. उन्हें यही ठहराया जाता है, जितना कोयला वह काटकर निकालते हैं ,उसके अनुसार उन्हें मजदूरी दी जाती है. दुर्घटना हो जाने के बाद एक तो लाशों को हटा दिया जाता है और फिर गुपचुप तरीके से परिजनों को राशि देकर मुंह बंद करने को विवश कर दिया जाता है. सूत्र बताते हैं कि अधिकतर मजदूर गिरिडीह से लाये जाते है. उनके बारे में बताया जाता है कि वह "रैट होल" के एक्सपर्ट होते है. यह बात भी सच है कि अब सिर्फ कोयलांचल में "रैट होल" के जरिए कोयल का अवैध खनन नहीं होता है. बकायदे बीसीसीएल के समानांतर खदानें खोल दी जाती है और कोयले का उत्पादन होता है.
रिपोर्ट -धनबाद ब्यूरो