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धनबाद निगम चुनाव --हेमंत सरकार के एक मंत्री इधर ,दूसरे उधर ,क्या टूट जाएगा गठबन्धन?

धनबाद निगम चुनाव --हेमंत सरकार के एक मंत्री इधर ,दूसरे उधर ,क्या टूट जाएगा गठबन्धन?

धनबाद(DHANBAD): क्या धनबाद का निगम चुनाव इस बार झारखंड की  राजनीति की "दिशा और दशा" तय करेगा ? धनबाद में पार्टियों  की प्रतिष्ठा दांव पर है ही , तो मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का यह नारा- कि " गांव भी हमारा और शहर भी हमारा" की यह चुनाव परीक्षा लेगा।  उम्मीदवार और उनके समर्थक  ही सिर्फ आपस में "सिरफुटौव्वल"   नहीं कर रहे हैं, बल्कि झारखंड के मंत्री भी पहुंचकर अलग-अलग खेमा के प्रचार कर रहे हैं.  झारखंड के एक मंत्री इरफान अंसारी कांग्रेस समर्थित प्रत्याशी शमशेर आलम के पक्ष में धनबाद का दौरा कर चुके हैं.  तो झारखंड के दूसरे मंत्री हफीजुल हसन भी धनबाद पहुंचकर झामुमो समर्थक  उम्मीदवार शेखर अग्रवाल के पक्ष में माहौल बनाने का प्रयास कर लौट गए हैं. 

सवाल कई उठ रहे ,जो चुनाव के बाद भी कर सकते हैं  प्रभावित 
  
सवाल यह नहीं है कि कौन किसको प्रभावित करेगा, किसका वोट बैंक बिगाड़ेगा , सवाल यह है कि अभी तक धनबाद में कांग्रेस के जिला अध्यक्ष और झामुमो के जिला अध्यक्ष ही "शब्दों "की लड़ाई से टकरा रहे थे.  लेकिन जब सरकार के दो मंत्री अलग-अलग उम्मीदवारों के पक्ष में काम करने के लिए मैदान में उतर गए हैं, तो सवाल उठाना बहुत स्वाभाविक है कि क्या धनबाद का चुनाव प्रदेश के गठबंधन पर असर डालेगा? धनबाद का चुनाव इसलिए भी रोचक हो गया है कि यहां कई "हैवीवेट" उम्मीदवार मैदान में ताल ठोंक  रहे हैं.  पूर्व मेयर  शेखर अग्रवाल भाजपा छोड़कर झामुमो  में चले गए और झामुमो  के समर्थन से चुनाव लड़ रहे हैं, तो भाजपा ने संजीव अग्रवाल को समर्थन दिया है.  लेकिन पूर्व विधायक संजीव सिंह बागी बनाकर मैदान में उतर गए हैं.

धनबाद में उम्मीदवारों की है लंबी सूची ,29 आजमा रहे भाग्य 
 
 इसके अलावे धनबाद में उम्मीदवारों की लंबी सूची  है.   जेएलकेएम समर्थित  उम्मीदवार भी मैदान में डटे हुए हैं. उल्लेखनीय है कि धनबाद में मेयर का चुनाव प्रचार अब तल्ख़  होता जा रहा है.  जैसे-जैसे मतदान की तिथि नजदीक आ रही है, आरोप -प्रत्यारोप का दौर तेज होता जा रहा है.     इधर, राज्य की सरकार में शामिल कांग्रेस के नेताओं के बोल भी बेलगाम हो गए हैं.  पलट बयान भी तीखा हो  रहा है.  कांग्रेस के जिला अध्यक्ष संतोष सिंह ने झामुमो  समर्थित उम्मीदवार शेखर अग्रवाल को निशाने पर लिया, तो जेएमएम के नेता भी संतोष सिंह को खूब खरी खोटी सुना दी.  धनबाद में कांग्रेस के समर्थित  उम्मीदवार हैं, तो झामुमो समर्थित भी उम्मीदवार चुनाव मैदान में हैं. 

भाजपा ने बागियों को जारी किया है कारण  बताओ नोटिस 
 
भाजपा के  बागी उम्मीदवार भी मैदान से नहीं हटे , भाजपा ने भी संजीव अग्रवाल को अपना समर्थन दिया है.   प्रदेश भाजपा की ओर से बागी नेताओं को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है.  बताया जाता है कि  नोटिस का जवाब संतोषजनक नहीं होने पर पार्टी कार्रवाई कर सकती है.  सूत्रों के अनुसार 22 फरवरी को भाजपा अपने एक्शन का पत्ता खोल सकती है.  23 फरवरी को मतदान है, वैसे भी धनबाद का चुनाव कई मायनों  में रोचक है.   धनबाद का मेयर सीट  भाजपा के तीन विधायक और एक सांसद की परीक्षा लेगी। कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष का भी धनबाद में दौरा हो चुका है. यह  अलग बात है कि धनबाद में माफिया से लेकर मजदूर तक, लखपति से लेकर करोड़पति तक, उच्च शिक्षाधारी से लेकर कम पढ़े लिखे  भी उसी रास्ते पर वोट मांग रहे हैं, जिस रास्ते पर कभी वह पैदल चले  नहीं होंगे।  उम्मीदवारों की संख्या अधिक होने की वजह से वोटर भी परेशान हैं. 

मेयर ही नहीं ,वार्ड पार्षदों की लड़ाई भी दिलचस्प होती जा रही है 
 
कुछ वार्डों में तो वार्ड पार्षदों के  उम्मीदवारों की संख्या भी दो दर्जन से अधिक है.  नतीजा  है कि मतदाताओं के दरवाजे पर एक उम्मीदवार जाता है, तो दूसरा पहुंच जाता है.  सबके  अपने-अपने दावे हैं. इस बार मेयर की कुर्सी इसलिए भी "म्यूजिकल" हो गई है कि कम से कम दो उम्मीदवार ऐसे मैदान में हैं.  जो धनबाद के मेयर रह चुके हैं.  श्रीमती इंदु देवी पहली  मेयर थी ,तो शेखर अग्रवाल दूसरे मेयर रहे.  दोनों इस बार चुनावी मैदान में ताल ठोक रहे हैं.  झरिया के पूर्व विधायक संजीव सिंह भी मजबूती से मैदान में खड़े हैं, तो कांग्रेस से शमशेर आलम चुनाव लड़ रहे हैं. भाजपा ने संजीव अग्रवाल को समर्थन दिया है.  केके पॉलिटेक्निक के संस्थापक रवि चौधरी भी मैदान में हैं. जेएलकेएम समर्थित उम्मीदवार भी मैदान में है.  

रिपोर्ट -धनबाद ब्यूरो 

Published at:17 Feb 2026 06:49 AM (IST)
Tags:DhanbadJharkhandElectionMantriPrabhaw
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