धनबाद(DHANBAD): धनबाद में अंग्रेजों की एक और निशानी मिट गई. यह अलग बात है कि यह निशानी अब लोगों को परेशान कर रही थी. "स्मूथ ट्रैफिक" में बाधा डाल रही थी. जिस समय यह सिस्टम तैयार किया गया था, उस समय धनबाद में ना इतनी ट्रैफिक थी और ना इतने लोग थे और नहीं बालू ढुलाई के लिए इतने वाहन थे. नतीजतन रोप वे से बालू की ढुलाई होती थी. यह काम उस समय की ब्रिटिश रोपवे नामक कंपनी करती थी. बताया गया है कि उपायुक्त आदित्य रंजन के निर्देश पर झरिया -सिंदरी मुख्य मार्ग पर नुनुडीह दुर्गा मंदिर के समीप स्थित एक जर्जर रोपवे के ढांचे को रविवार को सुरक्षित तरीके से हटाया गया. यह रोपवे विगत 30 से 40 वर्षों से बंद पड़ा था.
इसका उपयोग ब्रिटिश रोपवेज नामक कंपनी बालू खनन के स्थान पर बालू फीलिंग के लिए करती थी. कुछ वर्षों तक बीसीसीएल ने भी इसका उपयोग किया था. ब्रिटिश काल में स्थापित और लौह सामग्री से बना यह अनुपयोगी ढांचा सड़क पर चलने वाले लोगों के लिए कभी भी घातक साबित हो सकता था. इस संबंध में उपायुक्त ने कहा कि यह सड़क अति महत्वपूर्ण है. प्रतिदिन बड़ी संख्या में स्कूली छात्र स्कूल बस और वैन इत्यादि से इस सड़क से आवागमन करते हैं. वहीं ,बड़ी संख्या में वाहन चालक इस सड़क का उपयोग कर सिंदरी, बलियापुर तक जाते हैं. इसका उपयोग चंदनकियारी होते हुए बोकारो, पुरुलिया, रांची, जमशेदपुर आदि के लिए भी किया जाता है.
चुंकि यह रोपवे सड़क को क्रॉस करती थी एवं इसकी हालत जर्जर हो चुकी थी ,इसलिए कभी भी कोई बड़ा हादसा होने की आशंका बनी रहती थी. इसलिए इसे हटाने के लिए संबंधित विभाग को निर्देश दिया गया था. आज रविवार को पहले इसके ढांचे को गैस कटर से काटा गया. तत्पश्चात दो क्रेन की सहायता से इसे सुरक्षित तरीके से डिस्मेंटल किया गया. इसके हटने से अब उक्त सड़क पर वाहन चालक सुगम व सुरक्षित तरीके से आवागमन कर सकते हैं. उपायुक्त ने कहा कि सड़कों पर ऐसी अनुपयोगी संरचनाओं को हटाने का अभियान आगे भी जारी रहेगा। उल्लेखनीय है कि 21 जनवरी 2026 को इसी मार्ग से ऐसे ही एक पुराने रोपवे को हटाकर वाहनों का आवागमन सुगम एवं सुरक्षित किया गया था.
रिपोर्ट -धनबाद ब्यूरो
