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डीजीपी की नियुक्ति प्रक्रिया : ममता दीदी, योगी आदित्य नाथ के बाद हेमंत सोरेन ने भी अपने हाथों में लिया "पावर"

BY -
Satya Bhushan Singh   Dhanbad
Satya Bhushan Singh Dhanbad
Copy Editor • TheNewsPost.in
PublishedAt: January 12, 2026, 1:59:58 PM

धनबाद (DHANBAD) : 2024 के विधान सभा चुनाव में प्रचंड बहुमत मिलने के बाद झारखण्ड सरकार अपनी हाथों को मजबूत करने में लग गई है. झारखंड भी अब बंगाल और उत्तर प्रदेश की तर्ज पर चल दिया है. डीजीपी की नियुक्ति के लिए संघ लोक सेवा आयोग(UPSC ) को अब सूची नहीं भेजी जाएगी. बल्कि अब कमेटी ही नाम फाइनल करेगी. संघ लोक सेवा आयोग को अब रांची ही आना होगा. यही कमेटी के नाम को फाइनल किया जाएगा. इससे राज्य सरकार को डीजीपी की नियुक्ति करने और हटाने का अधिकार मिल जाएगा. डीजीपी के पद पर तैनात अधिकारी के लिए भी अब यह जरूरी होगा कि राज्य में कानून-व्यवस्था से लेकर अपनी जिम्मेवारियों का सही ढंग से निर्वहन करें अन्यथा राज्य सरकार उन्हें हटा सकती है और उनकी जगह पर किसी को बैठा भी सकती है. कैबिनेट के ताजा फैसले के बाद झारखंड में डीजीपी की नियुक्ति से लेकर हटाने में अब राज्य सरकार का नियंत्रण होगा. 

हाई कोर्ट के रिटायर्ड जस्टिस की अध्यक्षता वाली कमेटी फैसला लेगी

झारखंड में अब डीजीपी की नियुक्ति पर हाई कोर्ट के रिटायर्ड जस्टिस की अध्यक्षता वाली कमेटी फैसला लेगी. कमेटी में उच्च न्यायालय का कोई सेवा निवृत जज अध्यक्ष होंगे. मुख्य सचिव और यूपीएससी के प्रतिनिधि सदस्य होंगे. जेपीएससी के अध्यक्ष या नामित प्रतिनिधि, गृह सचिव और सेवानिवृत्त डीजीपी सदस्य होंगे. वर्तमान में डीजीपी के चयन के लिए राज्य सरकार सीनियर आईपीएस अधिकारियों के नाम का पैनल यूपीएससी को भेजती है. वहां से नाम पर सहमति मिलने के बाद ही डीजीपी की नियुक्ति हो पाती है. अब डीजीपी का पद रिक्त होने के 3 महीने पहले ही कमेटी नाम की अनुशंसा करेगी. अभी यह व्यवस्था थी कि डीजीपी के चयन के लिए पहले संघ लोक सेवा आयोग को राज्य सरकार आईपीएस अधिकारियों के नाम का पैनल भेजती थी. जिसमें से तीन नाम को स्वीकृत कर यूपीएससी राज्य सरकार को भेजता था. उनमे से किसी को डीजीपी बनाया जाता था. लेकिन अब ऐसा नहीं होगा. 

2019 से डीजीपी के पैनल को लेकर यूपीएससी और राज्य सरकार के बीच विवाद होता रहा
 
सूत्रों के अनुसार वर्ष 2019 से डीजीपी के पैनल को लेकर यूपीएससी और राज्य सरकार के बीच विवाद होता रहा है. यही नहीं, पहले पैनल भेजने से लेकर डीजीपी की नियुक्ति तक करीब तीन-चार महीने का समय लग जाता था. नई व्यवस्था में  सरकार को यूपीएससी के अधिकारियों के नाम का पैनल नहीं भेजना होगा. बल्कि यूपीएससी के अधिकारी यहां आएंगे. इससे समय की भी बचत हो सकती है. बता दें कि पश्चिम बंगाल और उत्तर प्रदेश में भी डीजीपी चयन के लिए कमेटी बनी हुई है. यहां भी यूपीएससी को पैनल ना भेज कर एक कमेटी ही डीजीपी का नाम तय करती है. 

रिपोर्ट-धनबाद ब्यूरो 

Tags:DhanbadJharkhandDGPNiyuktiSaarkar

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