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दसशीशानाथ धाम में श्रद्धालुओं की उमड़ी भीड़, जानिए क्या हैं खास मान्यताएं  

दसशीशानाथ धाम में श्रद्धालुओं की उमड़ी भीड़, जानिए क्या हैं खास मान्यताएं  

पलामू(PALAMU): झारखंड-बिहार की सीमा में सोन नदी के बीच दसशीशानाथ धाम स्थित है. हुसैनाबाद अनुमंडल के रानिदेवा, कबरा और बिहार के नौहट्टा प्रखंड के बांदु सोन नदी के बीचों बीच स्थित इस धाम पर सावन की पहली सोमवारी पर जलाभिषेक करने दोनो राज्यो के सीमावर्ती क्षेत्र के लोग उत्साह के साथ पहुंचे. श्रद्धालुओं ने नाव के सहारे दसशीशानाथ महादेव के बड़ा चबूतरा पर पहुंचकर हर हर महादेव के नारे के साथ जलाभिषेक और दुग्धाभिषेक कर भांग, धतूर के साथ बेलपत्र का चढ़ावा चढ़ाया. सावन माह होने के कारण दोनों राज्यों के सीमावर्ती क्षेत्र में दो-दो किलोमीटर पानी भरे होने के बावजूद श्रद्धालु आस्था के साथ दसशीशानाथ पर जलाभिषेक करने पहुंचे. दसशीशानाथ महादेव के समीप तीन नदियों का संगम है. झारखंड की कोयल नदी, सोन नदी और बिहार की सरस्वती नदी का मिलान दसशीशानाथ महादेव के चबूतरे पर ही होता है. इससे इस स्थान का महत्व और भी बढ़ जाता है. किउदंतियो के अनुसार यह शिवलिंग रावण के द्वारा स्थापित किया गया है.

कैथोलिक भाषा मे लिखा स्थित है शिलालेख

बिहार के वरिष्ठ पत्रकार राकेश कुमार पांडेय ने बताया कि दसशीशानाथ महादेव पर बड़े-बड़े पत्थर का शिलालेख है. जो कैथोलिक भाषा मे अंकित है. उन्होंने कहा कि दसशीशानाथ महादेव पर सावन माह में पहुंचने के लिए नाव का ही एक मात्र सहारा है. उन्होंने बताया कि दसशीशानाथ महादेव क्षेत्र के ऐतिहासिक परिदृष्ट को दर्शाता है. उन्होंने कहा कि दसशीशानाथ महादेव से सटे 10 किलोमीटर की दूरी पर रोहितेश्वर धाम व रोहतास किला है. जहां सावन माह के पूर्णिमा के अवसर पर भव्य मेला का आयोजन किया जाता है. वहीं दसशीशानाथ से लगभग 30 किलोमीटर की दूरी पर कैमूर पहाड़ के गुफा में गुप्तेश्वर नाथ विराजमान है. जहां महाशिवरात्रि व सावन माह में लोग कांवर लेकर पहुंचते हैं. श्रद्धालु यहां भी जलाभिषेक करते हैं.

शिलालेख से इतिहास का चलता है पता

उन्होंने बताया कि दसशीशानाथ के सटे ही कबरा कला गांव है जहां प्राचीन शिव मंदिर स्थापित है. जिसका लगाव रोहतास किला और दसशीशानाथ महादेव से है. उन्होंने बताया कि दसशीशानाथ महादेव का दर्शन करने पहुंचने वाले श्रद्धालुओं को आस-पास के इतिहास का पता लग जाता है. उन्होने कहा कि दसशीशानाथ महादेव के शीलापट पर सन 3, 4, 8, 12, 13 व 16 ई के राजा व महाराजों द्वारा शीलापट लिखा हुआ मिलता है. जिसे पढ़ने से पूरे इतिहास का पता चलता है. सावन के प्रत्येक सोमवार को झारखण्ड-बिहार दोनों राज्यों के श्रद्धालु पहुंचकर जलाभिषेक और दुग्धाभिषेक कर अपनी मन्नत मांगते है. उन्होंने कहा कि यह दृश्य अदभुत है. जो भारत के किसी हिस्से में नहीं मिल सकेगा. किसी नदी के बीचों बीच महादेव का कहीं मंदिर या चबूतरा नहीं है.

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पुल निर्माण से पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा

स्थानीय ग्रामीणों ने कहा कि अगर सोन नदी पर रानिदेवा व बांदु गांव के बीच पुल का निर्माण हो जाये तो यह विश्व विख्यात पर्यटक स्थल बन सकता है. ग्रामीणों ने बताया कि झारखंड का कबरा कला पुरातात्विक व ऐतिहासिक स्थल है. वहीं प्राचीन शिव मंदिर और दो किलो मीटर दूर सोन नदी में दसशिशनाथ मंदिर दस किलो मीटर पर रोहतास किला और कुछ दूरी पर शिव मंदिर अवस्थित है. इसके अलावा रोहतास पहाड़ पर स्थित शेख बहबल शाहिद की मजार है. झरने से गिरता पानी भी आकर्षण का केंद्र है. ग्रामीणों ने बताया कि सोन नदी पर पुल निर्माण हो जाने से पर्यटन का तेजी से विकास होने के साथ ही क्षेत्र का भी सर्वांगीण विकास होगा.

रिपोर्ट: जफर हुसैन, हुसैनाबाद (पलामू)

Published at:18 Jul 2022 05:01 PM (IST)
Tags:News
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