धनबाद(DHANBAD): धनबाद के बारे में कहा जाता है कि यहां की राजनीति जितनी ऊपर दिखती है, उससे कहीं अधिक पर्दे के पीछे से की जाती है. यहां पद पाने के लिए सदस्यों को बाहर ले जाने और फिर वोटिंग के दिन लाने की परंपरा पुरानी पड़ चुकी है. 1988 में नगर पालिका के चुनाव में ऐसा हो चुका है. जिला परिषद् के चुनाव में भी एक बार हुआ था. अब 18 मार्च को धनबाद में डिप्टी मेयर का चुनाव होना है. 18 मार्च को ही वोटिंग होगी और उसी दिन परिणाम आ जाएगा। वोटिंग में अब केवल एक सप्ताह का समय रह गया है. ऐसे में "मजबूत हाथों" ने अपने रेस के सभी घोड़ों को खोल दिया है. किसकी पीठ पर किसका हाथ है, यह समझना मुश्किल हो रहा है. राजनीतिक पंडित भी केवल अनुमान ही लगा रहे हैं. चार-पांच जो नाम दावेदारी में चल रहे हैं. उसके अलावा "साइलेंट प्लेयर्स" भी है. इन "साइलेंट प्लेयर्स" की पीठ पर किसका "मजबूत हाथ" है, यह अभी स्पष्ट नहीं हुआ है. सूत्र बताते है कि यही "साइलेंट प्लेयर्स" आगे चल कर चर्चित नामों के लिए मुसीबत बन सकते है. 18 मार्च को धनबाद में डिप्टी मेयर के चुनाव की अधिसूचना जारी हो गई है. 18 मार्च को डिप्टी मेयर के लिए वोटिंग होगी.
"मजबूत हाथों" के भरोसे क्या कोई गुल खिलाएंगे "साइलेंट प्लेयर"?
रेस में तो कई चल रहे हैं ,लेकिन हर दिन और हर रात समीकरण बदल रहे हैं. जिन नाम पर चर्चा चल रही है, वह तो रेस में है ही, लेकिन कुछ "साइलेंट प्लेयर" भी हैं, जिनकी पीठ पर राजनीतिक दल के बड़े-बड़े नेताओं का हाथ और आशीर्वाद है. ऐसे में इस बात की संभावना बन गई है कि रेस से इतर कोई डिप्टी मेयर बन सकता है. चूंकि धनबाद में जिस तरह से मेयर का चुनाव हुआ और संजीव सिंह ने भारी मतों से विजय हासिल की, उससे धनबाद में एक नया राजनीतिक समीकरण तैयार होता दिख रहा है .इस नए समीकरण को कमजोर करने के लिए परदे के पीछे से तैयारी की जा रही है. कहा जा रहा है कि डिप्टी मेयर के पद पर संजीव सिंह के विरोधी खेमे के लोग अपना आदमी बैठना चाहते हैं. इसको लेकर राजनीतिक दल के लोग सक्रिय हैं. लेकिन सामने नहीं आ रहे हैं . परदे के पीछे से खेल शुरू है .कहा जा सकता है कि डिप्टी मेयर का चुनाव भी कम रोचक नहीं होगा.
क्या राजनीतिक दलों की "ताकत "का अखाड़ा बनेगा डिप्टी मेयर का चुनाव ?
धनबाद नगर निगम के डिप्टी मेयर का पद एक बार फिर राजनीतिक दलों की ताकत का अखाड़ा बन सकता है. मेयर चुनाव में बैक फुट पर गए कई राजनीतिक दल के नेता भीतर ही भीतर कोई ना कोई गुल खिला सकते हैं. यह अलग बात है कि पार्षदों का दल लगातार नवनिर्वाचित मेयर संजीव सिंह से संपर्क कर रहा है. लेकिन इस बात की पक्की सूचना है कि कई दल के नेता पर्दे के पीछे से मोर्चा संभाल रहे हैं. यह बात भी सच है कि कई दावेदार "बैक फुट "पर भी चले गए हैं. वजह के बारे में कई कारण बताएं और गिनाए जाते हैं. दरअसल निगम चुनाव परिणाम के बाद निगम बोर्ड के महत्वपूर्ण पद डिप्टी मेयर की कुर्सी के लिए सियासत तेजी से बदल रही है. जोड़-तोड़ और समर्थन जुटाने की कोशिश चल रही है. वैसे तो नगर निगम के चुनाव का परिणाम आने के बाद से ही संभावित दावेदार सक्रिय हैं ,लेकिन कभी वह आगे बढ़ रहे हैं तो कभी पीछे हट रहे हैं.
रिपोर्ट -धनबाद ब्यूरो