धनबाद(DHANBAD) | धनबाद के निगम चुनाव में "ब्लड प्रेशर" शब्द का खूब प्रचलन था. चुनाव परिणाम आने के बाद भी "ब्लड प्रेशर" शब्द चर्चे में है. यह "ब्लड प्रेशर" कभी किसी को परेशान कर रहा है तो कभी किसी की नींद उड़ा रहा है. मेयर पद पर संजीव सिंह की बड़ी जीत के बाद अब धनबाद में डिप्टी मेयर के लिए उठा -पटक की राजनीति बहुत आगे बढ़ गई है. खास बात यह है कि समीकरण बदलते रह रहे है. जैसे ही कोई डिप्टी मेयर का उम्मीदवार निश्चिन्त होता है, नया समीकरण खड़ा हो जाता है. इस वजह से बेचैनी भी बढ़ी हुई है और उम्मीदवारों का "ब्लड प्रेशर" भी बढ़ा हुआ है. "साइलेंट प्लेयर" की पीठ पर हाथ रखकर खेल करने की भी तैयारी चल रही है.
पर्दे के पीछे से चल रहा है जबर्जस्त खेल ,कौन पड़ेगा किस पर भारी --
यह अलग बात है कि सामने से अभी कोई भी मोर्चे पर नहीं आया है, लेकिन पर्दे के पीछे से अपने समर्थक को डिप्टी मेयर बनाने की तैयारी चल रही है. डिप्टी मेयर की राजनीति में कूदे कई उम्मीदवार अब अपना पैर पीछे खींच लिए हैं, लेकिन खेल अभी भी जारी है. खेल का रंग भी समय के साथ बदल रहा है. डिप्टी मेयर पद के लिए महिला कार्ड भी खेला गया है. जानकारी के अनुसार इस बार जीते 55 पार्षदों में महिलाओं की संख्या 50% से अधिक है. यह संख्या 33 बताई जा रही है. यह अलग बात है कि सभी महिलाएं किसी एक महिला उम्मीदवार के पक्ष में जाएंगी , इसकी संभावना बहुत ही कम है बावजूद कार्ड खेले जा रहे हिन्। चार-पांच दिन पहले एक प्रत्याशी के पक्ष में पार्षदों की गोलबंदी हुई थी , तो बुधवार की देर रात को भी दूसरे प्रत्याशी के पक्ष में गोलबंदी दिखी।
तो क्या अब डिप्टी मेयर की कुर्सी भी बनेगी "म्यूजिकल चेयर" ---
18 मार्च को डिप्टी मेयर का चुनाव होना है और उसी दिन परिणाम घोषित कर दिए जाएंगे। 18 मार्च से ही शहर की सरकार काम करने लगेगी, लेकिन इसके पहले जिस तरह से चुनाव में गोलबंदी हुई थी, उससे भी मजबूत गोलबंदी डिप्टी मेयर चुनाव के लिए चल रही है. खास बात यह है कि इस गोलबंदी में धनबाद के कुछ "बड़े लोग" भी शामिल हो गए हैं. ऐसे लोग चाहते हैं कि डिप्टी मेयर उनके समर्थक बनें , जिससे कि निगम चुनाव में हुई करारी हार के "घाव" को कुछ हद तक भरा जा सके और निगम पर उनका अप्रत्यक्ष नियंत्रण हो सके. दूसरी ओर सूत्र बता रहे हैं कि नवनिर्वाचित मेयर संजीव सिंह भी सचेत हैं और प्रत्यक्ष तो नहीं लेकिन अप्रत्यक्ष रूप से डिप्टी मेयर के चुनाव में भी वह रुचि दिखा रहे हैं. हालांकि कौन किस पर भारी पड़ेगा, इसका पता 18 मार्च को ही चलेगा। जो 28 पार्षदों का समर्थन जुटा लेगा वह बन जाएगा सिकंदर।
रिपोर्ट -धनबाद ब्यूरो