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दामोदर नदी में बढ़ा पानी का घनत्व, जानिए कैसे होगी इन शैवालों की सफाई  

BY -
Padma Sahay
Padma Sahay
Copy Editor • TheNewsPost.in
PublishedAt: January 13, 2026, 4:47:15 PM

धनबाद(DHANBAD):  कभी बंगाल का अभिशाप माने जाने वाले दामोदर नदी आज कोयलंचल की लाइफ लाइन मानी जाती है. इस नदी से कई परियोजनाएं चल रही हैं इसमें बिजली उत्पादन प्रमुख है. लेकिन इन दिनों इस लाइफ लाइन की लाइफ थोड़ी मुश्किल भरी है. कोयलांचल होकर गुजरने वाले दामोदर नदी के पानी पर मौसम का असर पड़ता है. जहां बरसात के दिनों में तो नदी का पानी लाल हो जाता है, वहीं ठंड के दिनों में दामोदर नदी का पानी मोटा हो जाता है. यानी पानी का घनत्व बढ़ जाता है, जो सामान्य पानी के घनत्व से कहीं अधिक होता है. बता दें कोयलांचल के कोलियरी इलाकों में दामोदर नदी से जलापूर्ति की जाती है. ऐसे में पानी का घनत्व बढ़ने से इसपर आश्रित लोगों को पेयजल की तो समस्या होती ही है साथ ही पनबिजली परियोजना में भी दुष्प्रभाव देखने को मिलता है.

जानिए कितनी आबादी हो रही है प्रभावित

बता दें ठंड के मौसम में पानी शैवाल के कारण मोटा हो जाता है जिसे बोलचाल की भाषा में कई भी कहते हैं. दामोदर नद में होनेवाले इसी शैवाल घास के कारण झरिया और पुटकी इलाके में जलापूर्ति प्रभावित हो रही है. नदी से रॉ वाटर के उठाव में लगे इंटेक वॉल्ब मंन बार-बार शैवाल आ जाने से यह जाम हो जा रहा है. फिर भी नदी की सफाई का काम जारी है. बता दें इससे झारखंड खनिज क्षेत्र विकास प्राधिकार (JHAMADA) जल संयंत्र केंद्र के 12 MGD और 9 MGD जल भंडारण गृह में पानी भंडारण कार्य प्रभावित होता है. शैवाल के कारण इंटेक वॉल्ब में लगे फुटबॉल हर दो घंटे में जाम हो जाते हैं. झमाडा कर्मी पंप बंदकर जब तक इसकी सफाई करते रहते हैं तब तक पानी की सप्लाई ठप रहती है. बार-बार ऐसा होने की वजह से झरिया और पुटकी के इलाके में जरूरत के हिसाब से जलापूर्ति नहीं हो पा रही है. मालूम हो कि इससे झरिया और पुटकी के इलाके की 8 लाख की आबादी प्रभावित हो रही है.

जानिए कैसे होती है सफाई

यह व्यवस्था अंग्रेजों के समय से चल रही है. नदी में मोटर लगाकर पानी निकाला जाता है और उसकी सफाई करने के बाद इसकी सप्लाई की जाती है .इसके पहले पानी को कई प्रक्रियाओं से गुजरना होता है. सबसे पहले दामोदर नद के पानी को 9 एवं 12 एमजीडी जल भंडारण गृह में स्टोर किया जाता है. उसके बाद इसकी सफाई की जाती है फिर झरिया एवं अन्य जल मीनारों में शुद्ध पानी की आपूर्ति की जाती है .जाड़े के दिनों में घनत्व बढ़ जाने से पानी को शुद्ध करने में खर्च अधिक पड़ता है. विभागीय सूत्रों के अनुसार 10000 गैलन पानी को शुद्ध करने में आम दिनों में एक टन केमिकल का खर्च होता है वही ठंड के मौसम में उतने ही पानी को शुद्ध करने के लिए सवा टन केमिकल खर्च करने पड़ते हैं. केमिकल में एलम, चूना और ब्लीचिंग पाउडर होता है. ठंड के मौसम में पानी का घनत्व बढ़ जाने की पुष्टि विभागीय अधिकारी भी करते हैं.

रिपोर्ट: सत्यभूषण सिंह, धनबाद 

Tags:THE NEWS POSTDAMODAR NADIJHARKHAND NEWSDHANBAD NEWS

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