रांची(RANCHI): रांची विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. सरोज शर्मा को पद से हटाने की मांग को लेकर आदिवासी छात्र संघ (ACS) ने राज्यपाल सह कुलाधिपति को एक ज्ञापन सौंपा है. इस प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कार्यकारी अध्यक्ष दया राम, केंद्रीय अध्यक्ष बादल भोक्ता और अध्यक्ष अमित मुंडा ने किया. संगठन ने कुलपति की नियुक्ति प्रक्रिया और उनके पिछले रिकॉर्ड पर गंभीर सवाल उठाते हुए तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है.
ACS ने आरोप लगाया है कि प्रो. सरोज शर्मा से जुड़े कई महत्वपूर्ण तथ्यों को नियुक्ति के समय छिपाया गया. संगठन का कहना है कि दिल्ली में उनके खिलाफ दर्ज आपराधिक मामलों और पूर्व कार्यकाल से जुड़ी कथित अनियमितताओं की जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई. ज्ञापन में दिल्ली के समयपुर बादली थाना में दर्ज एफआईआर का भी उल्लेख किया गया है. छात्र संगठन का दावा है कि रोहिणी कोर्ट द्वारा जिस क्लोजर रिपोर्ट को स्वीकार किया गया है, उसे गलत तरीके से “क्लीन चिट” के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है, जबकि यह केवल कानूनी प्रक्रिया का एक चरण है और इससे आरोपों का पूरी तरह निराकरण नहीं होता.
इसके अलावा ACS ने राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी शिक्षा संस्थान (NIOS) में प्रो. शर्मा के कार्यकाल का भी उल्लेख किया है. संगठन का आरोप है कि वहां उनके कार्यकाल के दौरान गंभीर वित्तीय और प्रशासनिक अनियमितताओं के कारण उन्हें पद से हटाया गया था. ACS का कहना है कि यह महत्वपूर्ण तथ्य नियुक्ति प्रक्रिया के दौरान नजरअंदाज किया गया, जिससे पारदर्शिता पर सवाल उठते हैं.
छात्र संगठन ने राज्यपाल से मांग की है कि पूरे मामले की उच्च स्तरीय और निष्पक्ष जांच कराई जाए. साथ ही जांच पूरी होने तक कुलपति के सभी प्रशासनिक और वित्तीय अधिकारों पर तत्काल रोक लगाने की भी मांग की गई है, ताकि किसी भी प्रकार की अनियमितता की आशंका को रोका जा सके.
ACS ने साफ चेतावनी दी है कि यदि 24 घंटे के भीतर इस मामले में कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई, तो संगठन पूरे झारखंड में बड़े पैमाने पर आंदोलन करेगा. इसमें शैक्षणिक चक्का जाम और रांची विश्वविद्यालय परिसर में तालाबंदी जैसी कड़ी कार्रवाई शामिल हो सकती है. संगठन का कहना है कि वर्तमान स्थिति से छात्रों में असंतोष और असुरक्षा का माहौल पैदा हो रहा है.