गोड्डा (GODDA): शनिवार की सुबह मंडल कारा में बंद कैदी मान सिंह मुर्मू की शनिवार को सदर अस्पताल में इलाज के क्रम में मौत हो गई. मान सिंह पिछले वर्ष से मारपीट के एक मामल में मण्डल कारा में बंदी था. मान सिंह की मौत के सदर अस्पताल पहुंचे परिजनों ने कारा प्रशासन पर आरोप लगाते हुए कहा कि वो एक सप्ताह से अस्पताल में इलाजरत था और उन्हें सूचना शुक्रवार यानी एक सप्ताह बाद मिली थी ,मगर यहां पहुंचे तो उन्हें मान सिंह की लाश मिली.
क्यों था मान सिंह कारा में बंद ?
दरअसल वर्ष 2018 में देवडांड थाना क्षेत्र के दामा गांव निवासी मान सिंह ने शराब के नशे में मारपीट के दौरान किसी को बुरी तरह से घायल कर दिया था, जिस मामले में साल 2019 में उसे गिरफ्तार कर जेल भी भेजा गया था. मगर जेल में कुछ माह रहने के बाद मान सिंह को बेल मिल गयी थी. साल 2021 में जब न्यायलय में ये केस खुला तो मान सिंह को कोर्ट द्वारा हाजिर होने की नोटिस कई बार किया गया. फिर उसके खिलाफ अरेस्ट वारंट जारी कर सितम्बर 21 में गिरफ्तार कर जेल में डाल दिया गया था और तब से वो मंडल कारा में बंदी बनकर रह रहा था .
परिजनों को नहीं मिली तबियत बिगड़ने की खबर
मंडल कारा में ही मान सिंह की तबियत विगत एक सितम्बर को बिगड़ी थी जिसके बाद उसे सदर अस्पताल में भर्ती करवाया गया था. मगर, बीमार होने की सूचना उसके परिजनों को नहीं थी. शनिवार को उसकी मौत होने के बाद पहुंचे परिजनों ने बताया कि शुक्रवार को हमें सुचना मिली थी कि मान सिंह बीमार है और आज शनिवार को पहुंचे तो यहां उसकी लाश मिली है.
पत्नी और भाई ने छोड़ दिया था गांव
सदर अस्पताल परिसर पहुंचे मान सिंह के चचेरे भाई रायके मुर्मू ने बताया कि मान सिंह के जेल जाने के बाद उसकी पत्नी और भाई भी गांव छोड़कर कहीं चले गए, जिनका कोई पता नहीं. उन्होंने बताया कि शुक्रवार को सूचना मिली कि मान सिंह अस्पताल में भर्ती है और जब आज शनिवार को पहुंचे तो यहां उसकी मौत हो चुकी थी.
काराधिक्षक ने कहा सूचना भेजी गयी थी, तो फिर लापरवाही किसकी ??
इधर, मान सिंह की मौत के बाद सदर अस्पताल में पोस्ट मार्टम कराने पहुंची काराधीक्षक सह कार्यपालक दंडाधिकारी मोनिका बासकी से पूछे जाने पर उन्होंने बताया कि सुचना एक सितम्बर को ही दी गयी थी. पर अब सवाल ये उठता है कि अगर सूचित किया गया था तो सूचना इतनी विलंब से देवडांड थाना द्वारा परिजनों को क्यों दी गयी? क्या एक बीमार कैदी के प्रति प्रशासन की कोई जिम्मेदारी नहीं बनती? या फिर ये प्रशासनिक लापरवाही का नतीजा तो नहीं जो मौत का कारण बना?
रिपोर्ट: अजीत सिंह, गोड्डा
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