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Cyber ​​Crime in Jharkhand: आखिर जामताड़ा छोड़ बाबा नगरी क्यों बना साइबर ठगों का ठिकाना, जानिए 

BY -
Samiksha Singh
Samiksha Singh
Copy Editor • TheNewsPost.in
PublishedAt: January 13, 2026, 7:39:00 AM

TNP DESK : जामताड़ा से निकलकर देवघर को ठिकाना बनाए साइबर अपराधी पुलिस के लिए चुनौती बन गए हैं. आखिर साइबर अपराधियों ने देवघर को ही क्यों चुना है, इसको लेकर भी कई तरह की बातें कही जा रही है. वैसे तो साइबर अपराधी झारखंड सहित अन्य जगहों पर भी फैले हुए हैं, लेकिन झारखंड में सबसे अधिक साइबर अपराध की घटनाएं अभी देवघर में ही हो रही है.अपराधी पकड़े भी जा रहे हैं फिर भी अपराधी अभी भी सक्रिय है. देवघर जिला जामताड़ा से उत्तर में स्थित है .जामताड़ा से इस जिले की दूरी भी अधिक नहीं है .

जामताड़ा से निकले साइबर अपराधी देवघर को इसलिए चुना है कि बाबा मंदिर  के कारण यात्रियों की संख्या अधिक होने के कारण इनकी पहचान छुपाने में थोड़ी आसानी होती है. इसके अलावे देवघर के साइबर अपराधी खुद तो ठगी करते ही हैं, यहां मजदूरी पर भी ठगी करने वालों को रखते हैं. लोग तो यह भी बताते हैं कि देवघर में भी साइबर अपराध की पाठशाला चलने लगी है.यही वजह है कि झारखंड में अभी देवघर साइबर अपराध में  नंबर एक पर चल रहा है. यह बात भी सच है कि हाल के दिनों में पुलिस की गिरफ्तारी में सबसे अधिक साइबर अपराधी देवघर से ही पकड़े गए हैं. इनकी संख्या 363 बताई जाती है.

देवघर साइबर अपराधियों का नया ठिकाना

देवघर में पाठशाला ही  वजह है कि साइबर अपराध की जन्मस्थली जामताड़ा अब पीछे छूट गई है. साइबर अपराध में जामताड़ा से चार गुना अधिक गति से दूसरे जिले में साइबर अपराध किए जा रहे हैं.  जामताड़ा से देवघर बहुत आगे निकल गया है .आंकड़े के मुताबिक जामताड़ा में 2725 सिम सक्रिय है, जबकि देवघर में 9788  सक्रिय है. इसी प्रकार दुमका में 1716 सिम,धनबाद में 614 सिम और गिरिडीह में 518 सिम के साथ रांची में 497 सिम सक्रिय हैं. झारखंड के सीआईडी में जब प्रतिबिंब एप को खंगाला  तो यह आंकड़ा सामने आया. उस आंकड़े के मुताबिक झारखंड का देवघर साइबर अपराधियों का नया ठिकाना बन गया है. हालांकि साइबर अपराधियों की गिरफ्तारी भी देवघर में झारखंड के सभी जिलों से अधिक हुई है. अभी भी गिरफ्तारियां हो रही है ,फिर भी साइबर अपराधी देवघर को अभी भी अपना बड़ा और मजबूत ठिकाना बनाए हुए हैं.

रिपोर्ट के मुताबिक अपराधी ठगी के लिए पश्चिम बंगाल के मालदा से सिम लाते हैं. इन सिम का इस्तेमाल  जंगल या खुले स्थान पर बैठकर करते हैं .पुलिस जब उनका लोकेशन ट्रैक करने की कोशिश करती है तो सही जगह का पता नहीं चल पाता है, लेकिन सीआईडी के प्रतिबिंब एप से इसके खुलासे हो रहे हैं. इस एप से सिम का रियल टाइम स्टेटस मिलता है. इसको आधार बनाकर पुलिस तत्काल कार्रवाई करती है और अपराधियों को पकड़ती है, बावजूद यह अपराध कम नहीं हो रहा है. झारखंड में 16000 से भी अधिक ठगी के लिए सिम एक्टिव हैं. झारखंड के 6 जिलों को साइबर अपराधियों ने चिन्हित किया है और ठगी को अंजाम दे रहे हैं .साइबर अपराधियों के आगे व्यवस्था बौनी दिख रही है.

रिटायर्ड कोयला अधिकारियों को साइबर ठग से सजग रहने की ज़रूरत 

कोल इंडिया जैसी कंपनी को अपने सभी अनुषंगी कंपनियों के अधिकारियों को पत्र लिखकर साइबर अपराधियों से कम से कम रिटायर्ड कोयला अधिकारियों और कर्मियों को सजग करने को कहा गया है. दरअसल  रिटायर्ड कर्मियों के लिए पीपीओ में कुछ नई जानकारी मांगी गई है.साइबर अपराधी इसे ठगी का हथकंडा बना लिए हैं .इसी हथकंडा का उपयोग करते हुए एक रिटायर्ड कोयला कर्मी से 10 लाख रुपए तक की ठगी कर ली गई है. ठगी के शिकार हुए लोग समझ नहीं पाते. हालांकि किसी तरह की जानकारी फोन पर नहीं मांगा गया है ,फिर भी लोग साइबर अपराधियों के ठगी के शिकार हो जाते हैं.

रिपोर्ट: धनबाद ब्यूरो 

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