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सीडब्लूसी की पहल : दो माह से हावड़ा में फंसे आधा दर्जन पहाड़िया बच्चों की हुई घर वापसी 

BY -
Samiksha Singh
Samiksha Singh
Copy Editor • TheNewsPost.in
PublishedAt: January 13, 2026, 8:51:27 PM
दुमका(DUMKA): दुमका जिला के गोपीकांदर प्रखण्ड के आधा दर्जन पहाड़िया बच्चों को पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद का एक दलाल काम कराने के लिए विजयवाड़ा ले जा रहा था. हावड़ा रेलवे स्टेशन पर आरपीएफ ने इन सबों को पकड़ लिया और गोपीकांदर की पांच नाबालिग लड़कियों एवं एक लड़के को वहां के बालगृह में आवासित कर दिया. बाल कल्याण समिति ने हावड़ा के सीडब्ल्यूसी से संपर्क कर सभी 6 बच्चों की घर वापसी करवा दी.
 
पुलिस ने दलाल को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया 
 
जिले के एक राजनैतिक कार्यकर्ता एहतेशाम अहमद ने 15 दिनों पूर्व इस मामले की जानकारी समिति को दी थी. उन्होंने बताया था कि दलाल ने नाबालिग बच्चों के आधार कार्ड में छेड़छाड़ कर उनकी जन्म तिथि बदल दी थी पर जांच में यह तथ्य पकड़ में आ गया. जिस कारण वहां की पुलिस ने दलाल को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया और बच्चों को बालगृह में रख दिया. केस हो जाने के कारण अभिभावक अपने बच्चों को लाने के लिए हावड़ा जाने से डर रहे थे. 
 
चेयरपर्सन डॉ अमरेन्द्र कुमार ने हावड़ा सीडब्ल्यूसी और वहां के बालगृह के इंचार्ज से संपर्क कर दुमका डीसीपीओ के माध्यम से सभी बच्चों का गृह सत्यापन करवाते हुए एसआईआर भेजवाया. सभी 6 बच्चों के अभिभावक हावड़ा गये जहां उन्हें बच्चों को सौंप दिया गया. हावड़ा सीडब्ल्यूसी ने 10 सितम्बर तक सभी बच्चों को दुमका सीडब्ल्यूसी के समक्ष प्रस्तुत होने का निर्देश देते हुए घर पोर्टल पर यह सूचना अपलोड कर दिया था. इस निर्देश के अनुरूप गत दिनों गोपीकांदर की पांच नाबालिग लड़किया और एक नाबालिक लड़का अपने अभिभावक के साथ समिति के समक्ष उपस्थित हुए.
 
भवन निर्माण में काम कराने के लिए गए थे 
 
चेयरपर्सन डॉ अमरेन्द्र कुमार, सदस्य रंजन कुमार सिन्हा, डॉ राज कुमार उपाध्याय, कुमारी विजय लक्ष्मी और नूतन बाला ने पांचों किशोरियों व एक किशोर एवं उनके अभिभावकों का बयान दर्ज करते हुए इस मामले की सुनवायी की. अपने बयान में इन लोगों ने बताया कि मुर्शिदाबाद का सादीकुल नामक दलाल, गांव के दो लड़के और पांच किशोरियों को 30 जून 2023 को भवन निर्माण में काम कराने के लिए विजयवाड़ा ले जा रहा था. वे सभी गांव से अमड़ापाड़ा और वहां से पाकुड़ गये. पाकुड़ से वे लोग ट्रेन से बर्धवान और वहां से हावड़ा रवाना हुए. 1 जुलाई को हावड़ा स्टेशन पर पुलिस ने उन सब को पकड़ लिया. जांच के बाद 18 वर्ष से अधिक आयु का होने के कारण एक को छोड़ दिया गया. गांव की पांच किशोरियों व एक किशोर को वहां के चिल्ड्रेन होम में रख दिया गया. 24 अगस्त 23 को सभी को उनके अभिभावकों को सौंप दिया गया. समिति ने चाइल्ड लेबर की श्रेणी में सभी को सीएनसीपी घोषित करते हुए उनके अभिभावकों के साथ घर भेज दिया है. ये सभी 14 से 17 वर्ष के हैं और ड्रॉपआउट हैं. समिति इन्हें पुनः शिक्षा से जोड़ते हुए इनके पुनर्वास के लिए डीसीपीओ दुमका को निदेशित किया है. 
 
रिपोर्ट: पंचम झा 
Tags:jharkhanddumkaHalf a dozen Paharia children stranded in Howrah

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