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कोयलांचल का अपराधिक इतिहास : झरिया  के बिहार बिल्डिंग पर कब्जे की उतार  -चढ़ाव की क्या रही कहानी!

BY -
Satya Bhushan Singh   Dhanbad
Satya Bhushan Singh Dhanbad
Copy Editor • TheNewsPost.in
PublishedAt: May 11, 2026, 1:28:59 PM

 

धनबाद(DHANBAD) | धनबाद में उस समय माफिया की आर्थिक स्रोत भारत कोकिंग कोल  लिमिटेड ही थी. आज भी दबंगो के लिए है.  कंपनी में चलने वाली बालू और ट्रांसपोर्टिंग की ठेकेदारी से दबंग लोगों की आमदनी होती थी.  माफिया कुछ अधिकारियों से मिलीभगत कर अथवा उन्हें आतंकित कर, जितने काम करते थे, उससे  अधिक का बिल पास करा  लेते थे.  बुजुर्ग बताते हैं कि दिनभर में एक ट्रक से बालू की ढुलाई  अगर 10 खेप  की जाती थी, तो अधिकारियों -कर्मचारियों की मिलीभगत से 20  या 30  खेप  दिखाया जाता था.  और उतने  का विपत्र बनाकर पैसा उठा लिया जाता था. 

बहुचर्चित "लूट" में माफिया दूसरे को शामिल होने नहीं देते थे.-----
 
इस बहुचर्चित "लूट" में माफिया दूसरे को शामिल होने नहीं देते थे.  कहा तो यह भी जाता है कि टेंडर में किसी दूसरे को शामिल नहीं होने देते थे.  एक तरह से सारे ठेके माफिया के हाथ में चले जाते  थे.  जब माफिया  उन्मूलन अभियान की शुरुआत हुई, तो सबसे पहले तत्कालीन उपायुक्त मदन मोहन झा ने माफिया के आर्थिक स्रोत पर चोट किया।  प्रयास किया कि उनकी आर्थिक स्रोत पर नकेल कस दिया जाए.  इसके लिए उन्होंने बीसीसीएल पर दबाव डालकर सहकारी समितियों  का गठन करा  दिया।  हालांकि माफिया तत्व सहकारी समितियों  में भी कुछ हद तक घुसपैठ करने में सफल हो गए थे. 

सहकारी  समितियों  के गठन से ठेकेदारी का आकर्षण कम  गया----
 
लेकिन इतना तो तय था कि सहकारी  समितियों  के गठन से ठेकेदारी का आकर्षण कम  गया था. उसके बाद यूनियन के नाम पर कोलियरियों का कब्जा शुरू हुआ.  मजदूर यूनियन के नाम पर मार -काट  शुरू हो गई थी. कुछ हत्याएं धनबाद में हुई तो कई हत्याएं धनबाद से बाहर की गई.  इस बीच एक चर्चित मामला सामने आया था.  लोग बताते हैं कि सूर्यदेव सिंह का झरिया के बिहार बिल्डिंग पर कब्जा था.  मदन मोहन झा ने बिहार बिल्डिंग के कागजात की जांच कराई और पाया कि इस पर भारत कोकिंग कोल्  का कब्जा होना चाहिए।  उन्होंने बिहार बिल्डिंग को सूर्यदेव सिंह से लेकर बीसीसीएल का कब्जा करा  दिया।  यह कार्रवाई सूर्यदेव सिंह को काफी अखड़ी ।  इसी बिल्डिंग में बिहार टॉकीज चलता था, जिसके बारे में कहा जाता था कि बिहार का पहला यह शीतताप  नियंत्रित सिनेमा हॉल था.  इस भवन में जनता मजदूर संघ का कार्यालय भी चलता था. 
 
सूर्यदेव सिंह की सारी गतिविधियों का केंद्र बिहार बिल्डिंग बनी हुई थी----
 
सूर्यदेव सिंह की सारी गतिविधियों का केंद्र बिहार बिल्डिंग बनी हुई थी.  बुजुर्ग बताते हैं कि मदन मोहन झा के स्थानांतरण के कुछ समय बाद सूर्यदेव सिंह ने एक बार फिर बिहार बिल्डिंग पर कब्जा जमा लिया।  लालू प्रसाद यादव की सरकार बनने के बाद तत्कालीन उपयुक्त  अफजल अमानुल्लाह ने फिर से सूर्यदेव सिंह को बिहार बिल्डिंग से बेदखल कर उसे बीसीसीएल को सौंप दिया था.  लेकिन बाद में फिर पता नहीं, किन वजहों से (कोई सही कारण नहीं बताता ) बिहार बिल्डिंग फिर सूर्यदेव सिंह के पास चला आया और आज भी जनता मजदूर संघ का कार्यालय वहां चलता है.  खैर, सब कुछ के बावजूद कोयलांचल  में माफियागिरी चलती रही. 

बिहार  के सीएम जब  भागवत झा आज़ाद बने ,तब भी हुआ एक्शन -----------
 
इस बीच एक ऐसा दौर आया, जब बिहार के मुख्यमंत्री के पद से बिंदेश्वरी दुबे हट  गए और भागवत झा आज़ाद  बिहार के मुख्यमंत्री बन गए.  लेकिन भागवत झा  आजाद ने भी माफिया उन्मूलन  पर ध्यान दिया।  केंद्र सरकार से मिलकर माफिया तत्वों  को  आर्थिक रूप से कमजोर करने का कार्यक्रम चलाया।  बताया गया है कि 1988 में आयकर विभाग तथा आर्थिक अनुसंधान ब्यूरो की एक टीम ने माफिया तत्वों के छोटे-बड़े ठिकानों पर बड़ी छापेमारी की थी.  सत्यदेव सिंह के कांको   और कतरास के अलावे उनके गांव सिताबदियारा तथा दानापुर स्थित आवासों  पर छापे डाले गए थे.  एक ही समय छापेमारी की गई थी.  सूर्यदेव सिंह के धनबाद स्थित सराय ढेला और उनके गांव बलिया में भी छापेमारी की गई थी.   इस समय नवरंगदेव सिंह, सकलदेव सिंह, रामचंद्र सिंह आदि के यहां भी छापेमारी की गई थी.

Tags:DhanbadJharkhandBiharMafaiCriminal history of Koyla Nchal:Bihar Building in Jharia

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