धनबाद(DHANBAD): कोयलांचल में माफियागिरी की समय के हिसाब से रफ्तार बढ़ती और घटती रही. अपराध करने के बाद बचने के हर तरकीब अपनाये जाने लगे. उस समय जिले से बाहर अपने प्रतिद्वंदियों को "हटाने" के तरीके का भी खूब इस्तेमाल किया गया. अलीबी (दूसरे स्थान पर उपस्थित) का भी प्रचलन चल निकला था. उस समय बिहार में लालू प्रसाद यादव का शासन था. जनता दल की खूब चलती थी. कई दबंग लोग जनता दल में शामिल हो गए थे. बर्चस्व की लड़ाई एक बार फिर तेज हो गई थी. इसी बीच एक बड़ी घटना हुई और उस घटना ने सबको चौंका दिया।
मुगलसराय में 1991 में करा दी गई राजू यादव की हत्या
जानकर बताते हैं कि जनता दल के एक नेता राजू यादव की 26 सितंबर 1991 को यूपी के मुगलसराय रेलवे स्टेशन पर हत्या कर दी गई थी. राजू यादव नीलांचल एक्सप्रेस से जनता दल द्वारा दिल्ली में आयोजित रैली में शामिल होने के लिए जा रहे थे. बुजुर्ग बताते हैं कि मुगलसराय स्टेशन पर गाड़ी रुकने पर राजू यादव प्लेटफार्म पर उतरे। अचानक घात लगाए हमलावरों ने उन पर गोलियों की बौछार शुरू कर दी. राजू यादव बुरी तरह घायल हो गए. उनके अंगरक्षक को प्लेटफार्म पर ही जान से मार दिया गया था. राजू यादव को मुगलसराय अस्पताल पहुंचाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
उपचुनाव में राजू यादव की विधवा को बनाया गया उम्मीदवार
इस घटना को लेकर धनबाद का प्रशासन भी काफी सक्रिय हुआ और कई लोगों से गंभीर पूछताछ की गई. लेकिन इस हत्याकांड के संबंध में सिर्फ अटकलों के घोड़े दौड़ते रहे. राजू यादव की हत्या से लालू प्रसाद यादव भी परेशान हुए. फिर सूर्यदेव सिंह के निधन के बाद झरिया उपचुनाव का समय आ गया. जनता दल की ओर से राजू यादव की विधवा आबो देवी को उम्मीदवार बनाया गया. उनके सामने सूर्यदेव सिंह के भाई बच्चा सिंह चुनावी मैदान में थे. लेकिन आबो देवी को जिताने के लिए जनता दल ने प्रतिष्ठा का प्रश्न बना लिया था । बुजुर्ग बताते हैं कि चुनाव के पहले धनबाद में कई मंत्रियों की तैनाती कर दी गई थी.
लालू प्रसाद यादव भी चुनाव प्रचार के लिए झरिया आये थे
मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव भी चुनाव प्रचार के लिए धनबाद आने लगे थे. मतगणना के बाद आबो देवी विजय घोषित कर दी गई. बच्चा बाबू चुनाव हार गए थे. आबो देवी बिहार सरकार में मंत्री भी बनी। वह माडा की अध्यक्ष भी रही. लोग बताते हैं कि खुद को बचाने के लिए दबंग लोग अलीबी बनाते थे. इस घटना के बाद भी अलीबी बने थे. धनबाद से बाहर कोयले के कारोबार में हुई कई हत्याओं में भी अलीबी की बात सामने आई थी. दरअसल, घटना करने अथवा करवाने के पहले बचने के तरीका भी खोज लिए जाते थे. इसके लिए खुद को कहीं दूसरी जगह होने का प्रमाण हासिल कर लिया जाता था. और उसके बाद घटना को अंजाम दिलवाया जाता था. कई हत्याएं तो जेल में रहते हुए कुछ माफिया ने करवाई थी. उस समय कोयलांचल में जनता दल के समर्थकों का भी "समानांतर राज" कायम हो गया था. कोयले के अवैध कारोबार पर एक तरह से उनका कब्जा हो गया था. जनता दल से जुड़े कोयला के अवैध कारोबारी अथवा ट्रांसपोर्टर अपने प्रतिद्वंदियों को सबक सिखाने के लिए पुलिस और प्रशासन का सहारा लेने लगे थे. हालांकि कोयले का अवैध कारोबार उस समय भी चलता था और आज भी चल रहा है.