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कोयलांचल का आपराधिक इतिहास: पढ़िए -बीपी सिन्हा के हत्या के बाद किसने बदला लेने की कसमें खाई थी,फिर क्या हुआ

BY -
Satya Bhushan Singh   Dhanbad
Satya Bhushan Singh Dhanbad
Copy Editor • TheNewsPost.in
PublishedAt: May 6, 2026, 1:52:41 PM

धनबाद(DHANBAD):  कोयलांचल  का आपराधिक इतिहास कई मामलों में अन्य जगहों  के अपराध से अलग था और अभी भी है.   धनबाद कोयलांचल में माफिया की  जब समानांतर सरकारे  चलती थी, तो उसे समय कत्ल रात के अंधेरे में नहीं बल्कि दिन के उजाले में किए जाते थे.  लोडिंग प्वाइंटों पर तो दौड़ा-दौड़ा कर लोगों को मार दिया जाता था .  कोलियरियां  उस समय भी रंगदारों की शरणस्थली थी और आज भी बनी हुई है.  तरीका जरूर कुछ बदल गया है.  कोल इंडिया के ई -ऑक्शन  पॉलिसी के बाद तरीके में काफी परिवर्तन आया है.  

माफियागिरी में पांच देवों का नाम सुर्खियों में रहा 

दरअसल, धनबाद कोयलांचल में माफियागिरी में पांच देवों का नाम प्रमुखता से लिया जाता है.  बीपी सिन्हा  की हत्या के बाद पांच देव की खूब चलती रही.  सभी देव किसी न किसी रूप में बीपी सिन्हा  से जुड़े रहे.  लेकिन उनकी हत्या के बाद सब  अपना अलग-अलग साम्राज्य स्थापित करने की कोशिश की और इसमें सफल भी रहे.  पांच देवों में बुजुर्ग लोग सूर्यदेव सिंह, सत्यदेव सिंह, सकलदेव सिंह, नौरंगदेव सिंह और राजदेव राय के नाम गिनाते हैं.  बुजुर्ग बताते हैं कि  बीपी सिन्हा  की हत्या के बाद राजदेव राय का गुट  ज्यादा सक्रिय हो गया था.  टकरारे बढ़ने  लगी थी. झरिया के एक बुजुर्ग बताते हैं कि बीपी सिन्हा  की हत्या के बाद राजदेव राय ने कसम खाई थी कि वह बीपी सिन्हा  की हत्या का बदला लेंगें।  

वह भी समय था ,जब सूर्यदेव सिंह-राजदेव राय में बढ़ी टकराहट 

इसके बाद जैसा कि लोग बताते हैं सूर्यदेव सिंह हाथ धोकर राजदेव राय के पीछे पड़ गए.  राजदेव राय के खिलाफ पुलिस की भी मदद ली गई.  राजदेव राय के घर छापेमारी हुई.  पुलिस ने  सभी भाइयों को हिरासत में ले लिया, फिर उन्हें जेल भेज दिया गया.  जेल से निकलने के बाद राजदेव राय आजमगढ़ (उत्तर प्रदेश) अपने गांव चले गए और वहीं से कोयलांचल  की गतिविधियों पर नजर रखने लगे.  उनके परिवार के सदस्य धनबाद में ही रहे.  जानकार बताते हैं कि आजमगढ़ में ही राजदेव राय की हत्या करा  दी गई.  एक समय शाम को जब वह अपने घर के सामने चबूतरे पर बैठे थे, तो गोलियों से उन्हें भून  दिया गया. 

सभी देव कोलियारियों पर कब्जा के लिए लड़ते -भिड़ते थे 

 सभी देव कोलियारियों पर कब्जा और बालू ठेके पर आधिपत्य के लिए आपस में लड़ते-भिड़ते  रहते थे.  उस समय कोयला खनन के बाद बालू भराई  के लिए बड़े पैमाने पर ठेका निकलते थे.  यह  ठेका करोड़ों में होता था.  काम तो कारोबारी करते थे लेकिन उनकी पीठ पर माफिया का हाथ होता था.  इस वजह से बालू के ठेके में गड़बड़ी भी बहुत होती थी.  कोयला अधिकारी इसका विरोध करने की साहस नहीं करते थे.  बालू गिरता था, एक दो ट्रक और बिल बनता था 10-20 ट्रक का.  वह बिल भी स्कूटर और मोटरसाइकिल के नंबर पर भी बनते थे.  और भुगतान हो जाता था.  रेट बढ़ाने  के लिए बालू की सप्लाई ठप कर दी जाती थी.  आज जो कोलियरी  इलाके में धंसान  हो रहा है, इसके पीछे की एक बड़ी वजह बालू भराई का नहीं होना ही बताया जाता है.

Tags:DhanbadJharkhandKoyalanchalCriminal history of Koyla NchalCrime news koylanchal

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