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क्राइम फाइल: डॉक्टरों पर फायरिंग से दहल उठा था जमशेदपुर, इस अपराधी के खौफ में सड़कों पर उतरी थी IRB

BY -
Rohit Kumar Sr. Correspondent
Rohit Kumar Sr. Correspondent
Copy Editor • TheNewsPost.in
PublishedAt: May 19, 2026, 5:24:04 PM

जमशेदपुर (JAMSHEDPUR):  लौहनगरी जमशेदपुर ने कई अपराधियों का खौफ देखा. लेकिन एक अपराधी ऐसा भी था जिसके खौफ से शहर में IRB की टीम को उतारना पड़ा था. शहर ने नवंबर 2009 से फरवरी 2010 के दौरान अपराध का ऐसा दौर देखा था, जब एक नाम पूरे शहर में दहशत का पर्याय बन गया था. उस अपराधी का नाम था पंकज दुबे. उसका खौफ इतना बढ़ गया था कि आम लोग शाम ढलते ही घरों में सिमटने लगे थे. शहर के व्यस्त बाजारों से लेकर प्रमुख चौक-चौराहों तक हर जगह सिर्फ उसी की चर्चा होती थी. उस दौर में पंकज दुबे और उसके गिरोह ने लगातार रंगदारी, फायरिंग और हमलों की घटनाओं को अंजाम देकर पुलिस की नींद उड़ा दी थी. सबसे सनसनीखेज घटना डॉक्टरों पर फायरिंग की थी, जिसने पूरे शहर को झकझोर कर रख दिया. इस वारदात के बाद पंकज दुबे का आतंक इतना बढ़ गया कि स्थिति संभालने के लिए इंडियन रिजर्व बटालियन (IRB) को शहर की सड़कों पर उतारना पड़ा. इतना ही नहीं, शहर की बड़ी कंपनी Tata Steel को भी शहर में सुरक्षाकर्मी तैनात करने पड़े थे. पुलिस बल की कमी को देखते हुए दूसरे जिलों से अतिरिक्त जवान बुलाए गए. हालात ऐसे हो गए थे कि पहली बार प्रशासनिक अधिकारियों को भी सड़क पर उतरकर मोर्चा संभालना पड़ा था. तत्कालीन उपायुक्त रविंद्र कुमार अग्रवाल, एसडीओ और कई दंडाधिकारी खुद पुलिस टीम के साथ रात में गश्ती करते नजर आए थे. जमशेदपुर के इतिहास में यह पहली बार था, जब किसी एक अपराधी के आतंक से पूरा प्रशासन और पुलिस महकमा एक साथ सड़क पर उतर आया था. पंकज दुबे का नाम उस समय शहर में खौफ की पहचान बन चुका था. अभी फिलहाल पंकज दुबे जेल में है और उम्रकैद की सजा काट रहा है.

प्रेमिका से छेड़खानी पर डॉक्टर को मारी थी गोली

पंकज दुबे और उसका गिरोह डॉक्टरों पर ज्यादा हमला करता था. अपनी प्रेमिका से छेड़खानी का आरोप लगाते हुए पंकज दुबे ने 3 दिसंबर 2009 को कदमा गणेश पूजा मैदान स्थित क्लीनिक में घुसकर डॉक्टर पीके मिश्रा को गोली मारी थी. हालांकि इस घटना में डॉक्टर पीके मिश्रा बच गए थे. इसके बाद यह सिलसिला जारी रहा और गिरोह डॉक्टरों को निशाना बनाता रहा. गिरफ्तारी के बाद पंकज दुबे ने पूछताछ में पुलिस को बताया था कि डॉक्टर पीके मिश्रा ने उनकी प्रेमिका के साथ छेड़खानी की थी. पीके मिश्रा को गोली मारने के बाद ही पंकज दुबे और उसके सहयोगियों ने शहर में कई चिकित्सकों को निशाना बनाया. पंकज और उसका गिरोह शाम होते ही फायरिंग की घटना को अंजाम देता था. 

दहशत कायम करने के लिए की घटनाएं

जमशेदपुर में वर्ष 2009 के दौरान पंकज दुबे और उसका गिरोह अचानक अपराध की दुनिया में उभरा. गिरोह ने कुछ ही महीनों में पूरे शहर में दहशत का माहौल बना दिया. शाम ढलते ही लोग घरों से निकलने से कतराने लगे थे, क्योंकि पंकज दुबे का गिरोह लगातार एक के बाद एक आपराधिक वारदातों को अंजाम दे रहा था. पंकज दुबे ने शहर में अपना वर्चस्व कायम करने के लिए उसी तरह अपराध का रास्ता अपनाया, जैसा पहले अखिलेश सिंह और परमजीत सिंह के गिरोहों ने किया था. अखिलेश सिंह और परमजीत सिंह के बीच चल रहे गैंगवार के दौरान ही पंकज दुबे का गिरोह पनपा और उसने महज चार महीनों में कई सनसनीखेज वारदातों को अंजाम दिया. गिरोह ने डॉक्टरों, बिल्डरों और व्यवसायियों को निशाना बनाया. रंगदारी, फायरिंग और धमकी की घटनाओं से व्यापारियों के साथ-साथ आम लोगों में भी डर का माहौल बन गया. यह गिरोह सिर्फ जिला पुलिस ही नहीं, बल्कि राज्य पुलिस मुख्यालय के लिए भी बड़ी चुनौती बन गया था. पंकज दुबे गिरोह के बढ़ते आतंक का असर प्रशासनिक व्यवस्था पर भी पड़ा. इसी दौर में जमशेदपुर में कानून-व्यवस्था मजबूत करने के लिए एसएसपी, ग्रामीण एसपी और सिटी एसपी जैसे नए पद सृजित किए गए. इससे पहले केवल एक एसपी का पद हुआ करता था. शाम होते ही गिरोह द्वारा जहां-तहां फायरिंग कर दी जाती थी. गतिविधि के कारण प्रदेश के तत्कालीन डीजीपी नियाज अहमद को शहर आना पड़ा था. पंकज और उसके गिरोह का आतंक इतना बढ़ गया था कि बाइक पर दो लोगों के बैठने पर रोक लगा दी गई थी. डॉक्टर को अपने क्लीनिक में सीसीटीवी कैमरा लगाने का निर्देश दिया गया था. वाहनों में ब्लैक फिल्म भी लगने पर रोक लगा दी गई थी. 

उम्रकैद की सजा काट रहा पंकज

टीएमएच के डॉक्टर प्रभात कुमार के घर में घुसकर हत्या के मामले में पंकज दुबे उम्रकैद की सजा काट रहा है.  17 दिसबर 2009 को टीएमएच के डाक्टर प्रभात कुमार की बिष्टुपुर में हत्या का मामले में कोर्ट ने उसे उम्रकैद की सजा सुनाई है. पंकज दुबे को पुलिस ने 25 जनवरी 2010 को बिष्टुपुर स्थित जी टाउन क्लब के पास से गिरफ्तार किया था. 2018 में पंकज और उसके साथी कबीर को अदालत में उम्र कैद की सजा सुनाई थी. इलाज करने के बहाने दोनों अपराधी डॉक्टर प्रभात कुमार के घर गए थे और गोली मारकर उनकी हत्या कर दी थी. इसके अलावा पंकज और उसके गिरोह जनवरी 2010 में व्यवसायी इंदरपाल सिंह की मानगो में हत्या की थी. दिसंबर 2009 में टीएमएच के डाक्टर आशीष राय पर भी फायरिंग की गई थी. इसके अलावा गिरोह ने जुगसलाई में भी फायरिंग की घटना को अंजाम दिया था. बिष्टुपुर में बिल्डर रोहित सिंह पर भी गिरोह ने फायरिंग की थी. सर्किट हाउस पेट्रोल पंप पर भी दो बार फायरिंग की घटना को अंजाम दिया गया था. पंकज दुबे बागबेड़ा रोड नंबर 1 का रहने वाला है. 

 

 

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