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Crime & Criminals : धनबाद के "दुर्गुण" से बोकारो भी क्यों नहीं रह पता अछूता, पढ़िए इस रिपोर्ट में 

BY -
Satya Bhushan Singh   Dhanbad
Satya Bhushan Singh Dhanbad
Copy Editor • TheNewsPost.in
Published: July 28, 2024,
Updated: 10:58 PM

धनबाद(DHANBAD) : बोकारो जिला पहले धनबाद में ही था. धनबाद के "दुर्गुण" से बोकारो भी अछूता नहीं है. यह अलग बात है कि धनबाद में कोयले के धंधे में वर्चस्व के लिए गोली-बम चलते है. लोगों की जानें  ली जाती है. तो बोकारो में ऐश पौंड से फ्लाई ऐश की ट्रांसपोर्टिंग के लिए कत्ल होता है. 18 जुलाई को जिस शंकर रवानी की निर्ममता पूर्वक हत्या करा दी गई थी, वह भी फ्लाई ऐश ट्रांसपोर्टिंग से जुड़ा हुआ था और इस धंधे का दबंग बताया गया था. उसकी दबंगई को खत्म करने के लिए ही दूसरे ग्रुप ने बाहर से शूटरों को हायर किया और रास्ते से हमेशा-हमेशा के लिए हटाने की व्यवस्था कराइ. 18 जुलाई को शार्प शूटरों ने शंकर रवानी की हत्या कर दी. 

फ्लाई ऐश की ट्रांसपोर्टिंग में दबंगता बना कारण 
 
हत्या की साजिश रचने वाले लोगों में फ्लाई ऐश ट्रांसपोर्टिंग से जुड़े लोग ही शामिल बताए गए है. बोकारो पुलिस ने शंकर रवानी हत्याकांड में पांच लोगों की गिरफ्तारी की है. यह अलग बात है कि गिरफ्तारी सिर्फ साजिश करने वालों और रेकी करने वालों की ही हुई है. शूटर अभी नहीं पकड़े गए है. शूटर बिहार के बताए गए है. यह भी जानकारी निकलकर आ रही है कि शूटर कई दिनों से शंकर रवानी का पीछा कर रहे थे. यह भी कहा जाता है कि शंकर रवानी को तारापीठ में ही खत्म करने की योजना थी, लेकिन समर्थकों से घिरे रहने के कारण शूटरों को तारापीठ में क़त्ल करने का मौका नहीं मिला. फिर रास्ते में भी उसे मारने का प्रयास हुआ, लेकिन मोहर्रम जुलूस में भीड़ के कारण शूटरों  को मौका नहीं मिल पाया. फिर शूटर बोकारो में आकर डेरा डाल दिए और मौके की तलाश करते रहे. 

18 जुलाई को की गई थी शंकर रवानी की हत्या 

फिर 18 जुलाई को सुबह शंकर रवानी जब अपनी स्कॉर्पियो धुलवाने के लिए गया, तो मौका ताड़  शूटर पहुंचे और 10 से 15 गोलियां उसके शरीर में उतार दी. पहले गाड़ी से उतरे शूटरों  ने गोलियां मारी, फिर बाइक से पहुंचे शूटर भी शंकर रवानी के पास जाकर फायरिंग किये. जब शूटरों को भरोसा हो गया कि शंकर रवानी अब नहीं बचेगा, तब वह निकल गए. इस हत्याकांड ने बोकारो से लेकर धनबाद तक के लोगों को झकझोर दिया. धनबाद के सांसद ढुल्लू महतो और बोकारो एसपी के बीच तनातनी शुरू हो गई. फिर झारखंड पुलिस एसोसिएशन भी इस मामले में कूदा और चेतावनी दी कि अगर सांसद ढुल्लू महतो  अपनी कही हुई बातों को वापस नहीं लेते हैं, तो राज्य स्तरीय आंदोलन किया जाएगा. आंदोलन तो नहीं हुआ, सांसद भी इस मामले में आगे कुछ नहीं बोले. इस बीच बोकारो पुलिस ने हत्याकांड का खुलासा करने का दावा किया है और बताया है कि साजिश रचने और रेकी करने वाले पांच लोगों की गिरफ्तारी की गई है. शूटरों की तलाश में दूसरे राज्यों में छापेमारी चल रही है. धनबाद में भी हत्या का तरीका  कुछ इसी तरह से रहता है.  बाहर से शूटर बुलाए जाते हैं, फिर हत्या करने वालों की रेकी कराई जाती है. फिर शूटर हत्या कर निकल भागते है. 

धनबाद में भी हत्या का तरीका कुछ ऐसा ही निकलते रहा है 

पिछले वर्षों में धनबाद में हुए  बड़े हत्याकांड में यह बात निकल कर सामने आई थी कि शूटरों को हथियार लोकल गैंग उपलब्ध कराता है. उन्हें ठहरने की भी व्यवस्था देता है. उसके बाद स्पॉट पर हथियार तक पहुंचता है. शूटर घटना को अंजाम देते हैं और फिर निकल भागते है. बोकारो में शंकर रवानी हत्याकांड में भी कुछ ऐसा ही किया गया है. पुलिस सूत्रों के अनुसार दस लाख में शूटर तैयार किये गए थे. इसके अलावा राजू दुबे ने पटना के विकास सिंह व अमित सिंह को फ्लाई ऐश ट्रांसपोर्टिंग में बने रहने तक प्रतिमा पांच-पांच लाख रुपए देने का वादा किया था. रणनीतिकार के तौर पर अशोक सम्राट को ट्रांसपोर्टिंग में हाईवा लगाने का वादा किया गया था. वहीं लोकल रेकी करने वालों को ऐश पोंड के काम में लेबर सप्लाई का काम देने का वादा किया था. इसे आप अंदाज लगा सकते हैं कि फ्लाई ऐश ट्रांसपोर्टिंग में कितने की आमदनी है. 10 लाख  रुपए में शूटर मंगाए जाते हैं, हर एक महीना 5-5 लाख देने का वादा किया जाता है. ट्रांसपोर्टिंग के धंधे में शामिल करने का भरोसा दिलाया जाता है. फिर  हत्या करा दी जाती है. 

रिपोर्ट -धनबाद ब्यूरो 

Tags:DhanbadBokaroCrimemurderPolice

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