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निगम चुनाव -कइयों की राजनीतिक  भविष्य दांव पर , संजीव सिंह और शेखर अग्रवाल की क्यों अधिक!

BY -
Satya Bhushan Singh   Dhanbad
Satya Bhushan Singh Dhanbad
Copy Editor • TheNewsPost.in
PublishedAt: February 24, 2026, 3:15:17 PM

धनबाद(DHANBAD): धनबाद नगर निगम का चुनाव परिणाम राष्ट्रीय के साथ-साथ क्षेत्रीय दलों की "ताकत" बताएगा।  अब तो वोटिंग होने के बाद सभी उम्मीदवारों की किस्मत बक्से में बंद हो गई है.  लेकिन जीत -हार को लेकर गणना शुरू हो गई है.  इस बार के  चुनाव परिणाम में वोटो के बिखराव का असर दिख सकता है.  यह बात तो पहले से ही क्लियर थी कि राजनीतिक दलों के साथ-साथ निर्दलीय और नए चेहरे पूरे चुनाव समीकरण को कठिन बना सकते हैं.  जातीय, सामाजिक, दलीय  और स्थानीय मुद्दों का असर भी चुनाव परिणाम पर दिख सकता है.  

अब तो बक्शा  खुलने के बाद ही  पता चलेगा कि धनबाद निगम के मेयर की "म्यूजिकल चेयर" किसके पास रहेगी।  लेकिन यह बात तो तय है कि इस बार का मुकाबला केवल जीत और हार  तक ही सीमित नहीं रहेगा।  कईयों  का राजनीतिक भविष्य भी तय कर देगा।  यह चुनाव नए और पुराने चेहरों के लिए महत्वपूर्ण बन गया है.  लगभग 9 साल तक जेल में रहने के बाद सक्रिय राजनीति में लौटे झरिया के पूर्व विधायक संजीव सिंह मजबूती के साथ मैदान में दिखे।  तो दोबारा मेयर की कुर्सी तक पहुंचने के लिए शेखर अग्रवाल ने भी दल की बाध्यता को त्याग कर मैदान में ताकत के साथ दिखे। भाजपा ने संजीव अग्रवाल को अपना समर्थन दिया था. बड़े -बड़े नेता चुनाव प्रचार में लगे थे. 

 2015 के चुनाव में दूसरे स्थान में रहे शमशेर आलम भी मैदान में ताकत दिखाए।  धनबाद की पहली मेयर  इंदु  देवी, शिक्षा जगत से जुड़े रवि चौधरी, बिल्डर से नेता बने रवि बुंदेला, दलित समाज का प्रतिनिधित्व करने का दावा करने वाले शांतनु चंद्र भी मैदान में डटे रहे.  भाजपा की असहमति  के बावजूद पूर्व विधायक संजीव सिंह, मुकेश पांडे और भृगुनाथ  भगत भी चुनाव में बने रहे .  यह बात भी सच है  कि निगम चुनाव का  परिणाम धनबाद में आगे की राजनीति को भी तय कर सकता है.  झामुमो की कोशिश से भी पर्दा उठ सकता है.  शेखर अग्रवाल ने भी "जनेऊ  तोड़कर" झामुमो में चले गए तो पूर्व विधायक संजीव सिंह भी भाजपा की असहमति  के बावजूद चुनाव मैदान में अपनी ताकत दिखाई।  

यह बात भी सच है कि चुनाव परिणाम कई को राजनीति से अलग कर देगा तो कुछ को राजनीति में आगे बढ़ने का "टॉनिक" देगा।  यह  बात भी सच है कि मेयर की कुर्सी की लड़ाई धनबाद में कांटे की रही ,सब अपने-अपने ढंग से गुणा -भाग कर रहे हैं.  पार्टी के समर्थन को लेकर भी कई तरह के "अंडरग्राउंड" खेल हुए.  कांग्रेस और झामुमो से तो कोई बागी  उम्मीदवार  मैदान में नहीं रहा, लेकिन भाजपा से कम से कम तीन बागी  उम्मीदवार मैदान में थे.  भाजपा ने चुनाव के पहले झारखंड के 18 लोगों को कारण बताओं नोटिस जारी किया था.  लेकिन वह एक्शन भी "आई वाश"  साबित हुई.  आगे कोई कार्रवाई नहीं की गई.  मतलब साफ है कि बागियों  पर कार्रवाई करने में भाजपा एक कदम आगे- तो दो कदम पीछे हटने की रणनीति पर काम किया। अब आगे पर सबकी नजर रहेगी। 

रिपोर्ट -धनबाद ब्यूरो 

Tags:DhanbadNigam ChunawCandidatesrajnitikBhawishya

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