धनबाद(DHANBAD): निकाय चुनाव को लेकर सरकार अलर्ट मोड में है तो चुनाव लड़ने वाले भी सजग और चौंकाने हो गए है. राजनीतिक दल के कार्यकर्ताओं को आगे बढ़ने का जन्मसिद्ध अधिकार है. धनबाद में भी निकाय चुनाव प्रस्तावित है. धनबाद जिला भाजपा के अध्यक्ष चंद्रशेखर सिंह ने मीडिया प्रभारी मिल्टन पार्थ सारथी के सोशल मीडिया हैंडल से सोमवार को चुनाव लड़ने का दावा किया है. यह बात अलग है कि मीडिया प्रभारी बिना जिला अध्यक्ष की अनुमति के ऐसी दावेदारी नहीं कर सकते. भाजपा में दावेदारों की संख्या अधिक है.
आम राय के लिए पार्टी को 'चौधराहट' दिखानी होगी
आम राय के लिए पार्टी को धनबाद में 'चौधराहट' दिखानी होगी. 'चौधरी' लोकल होगा या प्रदेश का ,यह भी तय करनी होगी. भाजपा के कम से कम 8 से 10 लोग चुनाव लड़ने की की दावेदारी कर रहे है. निर्वतमान मेयर भाजपा से ही हैं, इसके अलावा राजकुमार अग्रवाल, राजीव शर्मा, भृगुनाथ भगत, चंद्रशेखर सिंह ,विधायक ढुल्लू महतो की पत्नी सावित्री देवी, अंकेश राज, अशोक पाल सहित अन्य लाइन में है. यह चुनाव आरक्षण फ्री होगा और निर्दल भी. इसलिए किसी भी दल को एक के लिए आम राय बनाना बहुत आसान नहीं होगा. सांसद पीएन सिंह ने अभी हाल ही में एक इंटरव्यू कहा था कि दावेदारी की क्या कहने, जिनके पास 5 लोग नहीं है, वह भी दावेदारी कर रहे है. पार्टी को इस से कोई मतलब नहीं है. भाजपा की सोच है कि कोई कार्यकर्ता ही मेयर, डिप्टी मेयर अथवा पार्षद बने. उम्मीदवार पर आम राय बनाना केवल धनबाद के सांसद पीएन सिंह के लिए ही चुनौती नहीं होगी बल्कि प्रदेश अध्यक्ष दीपक प्रकाश के सामने भी परेशानी पैदा करेगी. आरक्षण फ्री होने से धनबाद के मजबूत घराने सिंह मेन्शन व रघुकुल के भी मैदान में उतरने की पूरी उम्मीद है. सिंह मेन्शन भाजपा का समर्थक है तो रघुकुल कांग्रेस के साथ है.
चार सेट है भाजपा के पास
धनबाद ,बाघमारा, सिंदरी, निरसा चारों विधानसभा सीटें भाजपा के पास है. ऐसे में मेयर का चुनाव भाजपा के लिए लिटमस टेस्ट हो सकता है. 2015 में हुए चुनाव में भाजपा के चंद्रशेखर अग्रवाल चुनाव जीते थे, दूसरे नंबर पर कांग्रेस के शमशेर आलम थे. वैसे उम्मीदवारी को लेकर कांग्रेस सहित जेएमएम में भी तलवारें खींची हुई है. जेएमएम जिला कमेटी में तो अध्यक्ष और सचिव में जुबानी जंग चल रही है. मंगलवार यानी आज रांची में विवाद की पंचायती है. आगे उस पर बहुत कुछ निर्भर करेगा.
