दुमका(DUMKA): दुमका में इन दिनों एक नए तरह का विवाद छिड़ा है. विवाद है ओलचिकी लीपि को लेकर. ओलचिकी लीपि में पढ़ाई हो या ना हो इसको लेकर इस लीपि के समर्थक और विरोधी आमने सामने है. बुधवार को आदिवासी संताली भाषा ओलचिकी लीपि शिक्षा अभियान सेवा ट्रस्ट के बैनर तले परिसदन में एक बैठक हुई. बैठक के पूर्व ट्रस्ट के प्रदेश अध्यक्ष आनंद मुर्मू के नेतृत्व में शहर में ओलचिकी लीपि के समर्थन में रैली भी निकाली गई. बैठक के बाद प्रदेश अध्यक्ष ने मीडिया से बात करते हुए सरकार से ओलचिकी लीपि में पठन पाठन की व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की. पश्चिम बंगाल का हवाला देते हुए कहा कि जब वहां पीजी तक ओलचिकी लीपि में पढ़ाई हो सकती है तो झारखंड में क्यों नहीं?
ओलचिकी लीपि समर्थकों का किया पुतला दहन
आज गुरुवार को विभिन्न छात्र संगठनों ने एसपी कॉलेज के सामने ओलचिकी लीपि समर्थकों का पुतला दहन किया. पुतला दहन कार्यक्रम में सिदो कान्हू मुर्मू विश्वविद्यालय दुमका के संताली विभाग के छात्र छात्राओं के साथ साथ संताल परगना स्टूडेंट यूनियन, सिदो कान्हू मुर्मू विश्वविद्यालय में अध्ययनरत सभी विभाग के छात्र-छात्राएं उपस्थित थे.
ओलचिकी अवैज्ञानिक और कॉपी पेस्ट लिपि
पुतला दहन कार्यक्रम का नेतृत्व दिलीप टुडू, संजय हेम्ब्रम, अलविनस हेम्ब्रम, अंथोनी मुर्मू, सचिन कुमार सोरेन, राजेश पौरिया, राकेश मुर्मू आदि आदि ने संयुक्त रूप किया. वक्ताओं ने कहा कि ओलचिकी अवैज्ञानिक और कॉपी पेस्ट लिपि है, इससे झारखंड में नहीं चलने देंगे. बाबुधन मुर्मू, दिलीप टुडू ने कहा कि ओलचिकी लीपि अवैज्ञानिक है और झारखंड में जबरन थोपा जा रहा है. यह लिपि संताली भाषा के लिए कहीं से भी उचित और सही नहीं प्रतीत होता है. ऐसे लिपि का हम लोग जोरदार विरोध करते हैं. अगर झारखंड सरकार ओलचिकी लिपि समर्थक के दबाव में आकर ऐसी लीपि थोपना चाहती है तो हम लोग बेकफूट पर धकेलने का काम करेंगे.
ओलचिकी के अंधभक्त लिपि और भाषा में भी अंतर नहीं समझते:संजय हेंब्रम
संजय हेंब्रम ने कहा कि ओलचिकी के अंधभक्त लिपि और भाषा में भी अंतर नहीं समझते, भला वो भाषा विज्ञान और ध्वनि विज्ञान से क्या समझ रखेंगे. बाबुधन मुर्मू ने कहा कि इसे हमलोग सौ साल पीछे चले जाएंगे. और कुछ लोग यहां के लोगों को 100 साल पीछे धकेलने की साजिश के तहत ऐसा लिपि थोपने का असफल प्रयास कर रहे हैं.
रिपोर्ट: पंचम झा
