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कोलकता कैश कांड: आरोपियों के पक्ष में कांग्रेसी विधायक उमाशंकर अकेला की जोरदार बैटिंग, आलाकमान के फैसले के पहले ही अकेला का ‘अकेला’ जश्न

BY -
Devendra Kumar CW
Devendra Kumar CW
Copy Editor • TheNewsPost.in
PublishedAt: January 13, 2026, 10:49:13 PM

रांची- झारखंड हाईकोर्ट के द्वारा कोलकता कैश कांड के आरोपी विधायकों के खिलाफ पार्टी के द्वारा दर्ज प्राथमिकी को निरस्त किये जाने पर उमाशंकर अकेला ने कहा है कि यह होली के पहले होली का गुलाल है. तीनों विधायकों के खिलाफ पार्टी के द्वारा दर्ज करवायी गयी जीरो प्राथिमिकी को निरस्त कर हाईकोर्ट ने उनकी बेगुनाही पर अपनी मुहर लगा दी है.

झारखंड कांग्रेस की ओर से अब तक नहीं आयी है कोई प्रतिक्रिया

यहां यह याद रहे इस फैसले पर अब तक झारखंड कांग्रेस की ओर से कोई  प्रतिक्रिया नहीं दी गयी है. साफ है कि पार्टी के अन्दर अभी भी इन विधायकों की गतिविधियों को लेकर संशय की स्थिति बरकरार है. अभी भी ये विधायक पार्टी नेतृत्व के गुड फेथ में नहीं है. संभव है कि पार्टी इस फैसले के बाद उत्पन्न राजनीतिक परिस्थतियों का आकलन कर रही हो.

क्या यह कांग्रेस के अन्दर की गुटबाजी का परिणाम है

लेकिन पार्टी के फैसले के पहले ही उमाशंकर अकेला द्वारा इनकी कथित बेगुनाही को मुद्दा बनाकर हर्ष का इजहार कांग्रेस के अन्दर की खेमाबंदी को उजागर कर रही है. जानकारों का मानना है कि कांग्रेस के अन्दर अभी कई गुट काम कर रहा हैं. कांग्रेसी विधायकों की इसी गुटबाजी के कारण रामगढ़ उपचुनाव में कांग्रेस  प्रत्याशी बजरंग महतो को हार का सामना करना पड़ा था.  

अकेला यादव की बेकरारी की वजह?  

अकेला यादव की इस खुशी और बेकरारी को समझने के पहले हमें यह भी याद रखना चाहिए कि कैश कांड के समय इस बात की भी चर्चा थी कि कई कांग्रेसी विधायक इस मुहिम में आरोपी विधायकों के साथ थें, लेकिन समय रहते इसका भंडाफोड़ हो गया और हेमंत सरकार के खिलाफ रची गयी साजिश बेनकाब हो गयी.

तब क्या यह माना जाय कि हाईकोर्ट के फैसले से बागी विधायकों को बल मिला है, यदि यह आकलन सही है तो साफ है कि हेमंत सरकार के खिलाफ खतरा अभी टला नहीं है. उनके खिलाफ  एक बार फिर से साजिश रची जा सकती है, खास कर तब जबकि हेमंत सरकार 1932 के खतियान को अपनी उपलब्धि बता रही है. वह आदिवासी-मूलवासियों की बात कर कांग्रेस के कुछ विधायकों की जमीन को कमजोर कर रही है, क्योंकि यह कोई छूपा रहस्य नहीं है कि कांग्रेसी विधायकों का एक बड़ा खेमा 1932 के मुद्दे पर  हेमंत सरकार के साथ मतभेद रखता है, इन विधायकों को इस बात का डर है कि उन्हे इस मुद्दे पर अपने समर्थकों की नाराजगी का सामना करना पड़ सकता है, अकेला यादव भी कभी खुलकर कर 1932 के पक्ष में खड़े नहीं रहे हैं. और इसके पहले भी उनका भाजपा से अच्छा रिश्ता रहा है. वह पहली बार भाजपा के टिकट पर ही चुने गये थें.    

Tags:Kolkata cash scandalCongress MLA Umashankar Akelaहेमंत सरकाररामगढ़ उपचुनाव

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