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Coal India: अवैध उत्खनन रोकने के लिए कोयला मंत्रालय -कोल इंडिया की क्या है नई पहल

BY -
Satya Bhushan Singh   Dhanbad
Satya Bhushan Singh Dhanbad
Copy Editor • TheNewsPost.in
PublishedAt: May 25, 2026, 2:34:54 PM

धनबाद(DHANBAD): जिन कोयला खदानों में कोयला खत्म हो गया है, उन्हें अब स्थाई तौर पर बंद कर देने की योजना तैयार हो रही है.  कोयला मंत्रालय और कोल इंडिया लिमिटेड लगातार निर्णय में बदलाव ला रहे  हैं.  और इलीगल माइनिंग को रोकने के लिए प्लान तैयार हो रहे  हैं.  योजना बन रही है कि जहां कोयले का भंडार खत्म हो गया है, वहां खदानों को वैज्ञानिक रूप से माइन  क्लोजर कर दिया जाए.  इसे कई फायदे होंगें. सूत्रों के अनुसार  कुछ खदानें और स्थाई तौर पर भी बंद हो सकती हैं.  दरअसल, कोल इंडिया लिमिटेड कोयले के अवैध उत्खनन से परेशान है.  जिन खदानों को अस्थाई रूप से बंद किया जाएगा, वहां की जमीन का फिर से उपयोग करने की योजना है. 

बीसीसीएल में नौ खदानों को अस्थाई तौर पर बंदी की तैयारी 

 हालांकि कोल इंडिया की सबसे बड़ी इकाई बीसीसीएल में स्थाई तौर पर खदानों को बंद करने की बात सामने नहीं आई है.  हां, इतना जरूर है कि अस्थाई तौर पर बीसीसीएल की नौ  खदानों को बंद किया जा सकता है और इसके लिए काम शुरू कर दिया गया है.  चिन्हित खदानों की मॉनिटरिंग की जा रही है.  दरअसल, जिन खदानों में कोयला पूरी तरह से खत्म हो जाता है अथवा आर्थिक रूप से कोयला निकालना संभव नहीं होता, उन्हें बंद करने की घोषणा कर दी जाती है.  वैज्ञानिक रूप से माइनर क्लोजर प्लान के तहत खदान को बंद किया जाता है.  कोयला खत्म होने या खदान असुरक्षित होने पर इसे मिट्टी से भर दिया जाता है और पेड़ लगाकर  पर्यावरण को सुधारने का काम किया जाता है.  यह बात भी सच है की खदानों के बंद होने से उन पर निर्भर मजदूरों की आजीविका प्रभावित होती है.  हालांकि सरकार और कोल इंडिया की योजना है कि बंद खदानों की खाली जमीन का उपयोग सौर ऊर्जा संयंत्र लगाने और नए रोजगार पैदा करने के लिए किया जाए.  

बंदी की घोषणा क बाद क्या करना पड़ता है प्रबंधन को 

ऐसा भी देखा जाता है कि सुरक्षा के अभाव में खदानें सुनसान हो जाती हैं.  जिसके कारण अवैध उत्खनन का खतरा बढ़ जाता है और हादसे   भी होते हैं.  दरअसल, कोल इंडिया के लिए अवैध  खनन  बड़ी समस्या है.  कोयलांचल  में परित्यक्त  खदानों के मुहाने को एक तरफ से बंद किया जाता है, तो दूसरी  तरफ से कोयला चोर और तस्कर मुहानों को खोलकर कोयला निकालने लगते है.  यह  उत्खनन पूरी तरह से अवैध होता है और वैज्ञानिक तरीकों का भी इस्तेमाल नहीं होता है.  इस वजह से हादसों का खतरा बना रहता है. बताया जाता है कि बंदी की घोषणा के बाद अधिकांश खदानों के शाफ्ट को सील कर दिया जाता है, जिसका अर्थ है कि शाफ्ट के ऊपर लगभग 3 फीट मोटी कंक्रीट की एक बड़ी परत लगा दी जाती है.   कुछ खदानों को बड़े धातु के ग्रिलों का उपयोग करके सील किया जाता है; यह आमतौर पर गहरे स्तर के शाफ्ट पर किया जाता है ताकि गहरी सुरंगों से वायु प्रवाह होने से धंसाव को रोकने में मदद मिल सके.

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