धनबाद(DHANBAD): देश -दुनिया की सबसे बड़ी कोयला उत्पादक कंपनी कोल इंडिया फिलहाल दबाव में है. कोयले की बिक्री बढ़ाने को लेकर चिंतित है. नई-नई तरकीब ढूंढा जा रहा है. उपभोक्ताओं को कैसे आकर्षित किया जाए, कैसे उन तक सुलभ ढंग से करार के अनुसार क्वालिटी बेस्ड कोयला पहुंचाया जाए, इसके लिए लगातार मंथन चल रहा है. यह मंथन सिर्फ मुख्यालय स्तर पर ही नहीं ,बल्कि सहायक कंपनियों के मुख्यालय पर भी हो रहा है. कुछ दिन पहले तो कोल इंडिया बोर्ड की बैठक में सहायक कंपनियों को अपनी सुविधा के अनुसार कोयले के मूल्य में कमी करने की भी आजादी दे दी गई थी. कहा गया था कि सहायक कंपनियां अपने अनुसार कोयल का मूल्य कम कर सकती है. इधर, पता चला है कि कोल इंडिया की सबसे बड़ी कंपनी बीसीसीएल ई -ऑक्शन स्कीम के तहत रेल मार्ग से कोयला उठाने वाले कंज्यूमरों को नगद डिस्काउंट दे सकती है. जानकारी के अनुसार यह डिस्काउंट मार्च 2026 तक सफल बिडरो को निर्धारित शर्तों पर दी जाएगी।
इस दर से मिल सकती है कोयले की कीमत पर छूट
सूत्रों के अनुसार एकल क्लस्टर के तहत एक ही नीलामी में कोयला बुकिंग कर रेल रैक से उठाव करने वाले खरीदारों को उठाव की मात्रा के आधार पर प्रति टन नगद छूट दी जाएगी। इस योजना के अनुसार 10 से 14 रैक उठाने पर₹100, 15 से 19 रैक उठाव पर 150 रुपए तथा 20 या उससे अधिक रैक उठाव पर ₹200 प्रति टन की छूट मिलेगी। यह छूट सभी ग्रेड के रॉ कोकिंग कोल् पर लागू होगी। कंपनी का मानना है कि ऐसा करने से रेल मार्ग से कोयला उठाव को बढ़ावा मिलेगा और उपभोक्ताओं को राहत भी मिलेगी। कोयला डिस्पैच में भी बढ़ोतरी हो सकती है. दरअसल, कोयला कम्पनियाँ फिलहाल आर्थिक संकट से जूझ रही है.
लगभग हर कंपनियों में कॉस्ट कटिंग शुरू कर दिया गया है
लगभग हर कंपनियों में कॉस्ट कटिंग शुरू कर दिया गया है. सबसे खराब स्थिति ईसीएल की है. वहां कॉस्ट कटिंग का काम वृहद पैमाने पर किया गया है. वैसे भी, ओवर टाइम सहित अन्य सुविधाएं अब बंद कर दी गई हैं. दरअसल कमर्शियल माइनिंग को लेकर प्राइवेट प्लेयर्स का तेजी से कोयला उत्खनन में प्रवेश हुआ है. पावर सेक्टर अब कोल् इंडिया के बजाय प्राइवेट प्लेयर्स से कोयला लेने में रुचि दिखा रहे हैं. उसे फायदा भी दिख रहा है. इस वजह से कोलियारियों में कोयल का भंडार बढ़ रहा है. नतीजा है कि कंपनियां नए-नए तरकीब अपना कर कोयला उपभोक्ताओं को आकर्षित करने की कोशिश कर रही है.
रिपोर्ट -धनबाद ब्यूरो
