धनबाद(DHANBAD): कोल इंडिया को 2015 से लेकर 2024 तक सीएसआर फंड में 4265 करोड़ रुपए खर्च करने का लक्ष्य था, लेकिन कंपनी इससे आगे निकल गई है. कंपनी ने पिछले 10 सालों में 5579 करोड़ खर्च की है. बात इतनी ही नहीं है, सीएसआर फंड खर्च के मामले में कोल इंडिया लिमिटेड देश की शीर्ष तीन कंपनियों में शामिल हो गई है. सीएसआर का अधिकांश हिस्सा स्वास्थ्य और शिक्षा पर खर्च होता है. यह आंकड़ा आया है कोलकाता में रविवार को शुरू हुए दो दिवसीय तीसरा कोल इंडिया सीएसआर सम्मेलन में. सम्मेलन का उद्घाटन पश्चिम बंगाल के राज्यपाल ने किया. इसमें कोयला मंत्रालय के सचिव, कोल इंडिया के अध्यक्ष सहित अन्य मौजूद थे. आंकड़ा उभर कर आया कि कोल इंडिया सीएसआर फंड से स्वास्थ्य ,शिक्षा और आजीविका पर राशि अधिक खर्च करती है. इन तीन चीजों पर 10 वर्षों में कुल खर्च का 71% राशि खर्च हुई है.
अभी कंपनी कोल इंडिया में एक तरफ देशी और विदेशी माइनिंग ऑपरेटरो की भूमिका बढ़ रही है, तो कंपनी भी केवल कोयला प्रोडक्शन से बाहर निकलने के लिए हाथ -पॉव मार रही है. कंपनी अब कोयला उत्पादन से बाहर निकल कर क्रिटिकल मिनरल और थर्मल पावर में कदम बढ़ा रही है. कोल इंडिया आयात पर निर्भरता को कम करने के लिए कोबाल्ट और लिथियम जैसे महत्वपूर्ण खनिजों का अधिग्रहण करना चाहती है. इसके लिए कदम बढ़ा दिए गए है. इन क्रिटिकल मिनरल ब्लॉकों के लिए ई नीलामी में भी कंपनी हिस्सा ले रही है. कंपनी हाल ही में मध्य प्रदेश में ग्रेफाइट ब्लॉक के लिए बोली लगाई है. जो इसका पहला गैर कोयला खनिज खनन उद्यम होगा. कंपनी का कहना है कि वह घरेलू बाजार और विदेशों में लिथियम समेत महत्वपूर्ण खनिजों के अधिग्रहण के लिए कोशिश कर रही है.
कर्मियों की संख्या लगातार घट रही है, लेकिन कोल् इंडिया कर्मचारियों -अधिकारियों की सुविधा के लिए नई-नई स्कीम लांच कर रही है. कुछ योजनाएं तो पुरानी है, उनको नए फ्लेवर के साथ लांच किया जा रहा है| देस ही नहीं, बल्कि विदेश की भी सबसे बड़ी कोयला उत्पादक कंपनी कोल इंडिया लिमिटेड अब 50 साल की हो गई है. पहली नवंबर" 2024 को इस कंपनी के गठन के 50 साल पूरे हो गए है. इस कंपनी को महारत्न कोयला कंपनी का भी दर्जा प्राप्त है. यह बात भी सच है कि 1975 में, जहां कोल इंडिया का उत्पादन लगभग 90 मिलियन टन था. वही 2024 में इस कंपनी का उत्पादन 775 मिलियन टन के करीब पहुंच गया है. कोल इंडिया से उत्पादित कोयले की आपूर्ति कोयला आधारित बिजली संयंत्र को 80% के लगभग होती है. यह अलग बात है कि कोल् इंडिया का उत्पादन कई गुना अधिक हो गया है. लेकिन कोयला उद्योगों के राष्ट्रीयकरण के समय कर्मचारियों की संख्या जहां लगभग 6. 50 लाख थी , वही आज लगभग सवा दो लाख कर्मचारी ही कंपनी में रह गए है.
रिपोर्ट -धनबाद ब्यूरो
