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चोरों के आगे कोयला कंपनियां 'बैकफुट' पर- जानिये इसे रोकने के कौन से खोजे जा रहे नए तरीके 

BY -
Satya Bhushan Singh   Dhanbad
Satya Bhushan Singh Dhanbad
Copy Editor • TheNewsPost.in
PublishedAt: January 13, 2026, 2:33:08 AM

धनबाद (DHANBAD): कोयला चोरों की बढ़ती ताकत के आगे कोयला कंपनियां 'बैकफुट' पर हैं. कोल इंडिया के लिए कोयला चोरी रोकना एक बहुत बड़ी समस्या बन गई है.  कोयले की चोरी केवल अवैध माइनिंग से ही नहीं बल्कि ट्रांसपोर्टिंग में भी खूब  हो रही है. जमीन के नीचे से कोयला निकालना, इसे स्टॉक यार्ड तक ले जाना फिर डिस्पैच पॉइंट मतलब साइडिंग तक ले जाने में कोयले की निर्बाध चोरी होती है. इसे कोयला कंपनियों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है.  

'इन्नोवेशन चैलेंज' के मंच पर एक्सपर्ट को कर रही आमंत्रित 

सब कुछ करने के बाद जैसी की जानकारी है ,अब कोल इंडिया मैनेजमेंट ने कोयला चोरी रोकने के किसी प्रभावी तरीके को बताने या इसका प्रेजेंटेशन देने के लिए पूरे देश के तकनीकी संस्थानों , जानकारों को 'इन्नोवेशन चैलेंज' के मंच पर आमंत्रित किया है.   देखना दिलचस्प होगा कि कोयला चोरी रोकने के लिए कौन से तरीके लेकर तकनीकी संस्थान सामने आते है.  वैसे, इस गंभीर मसले पर कई बार रिसर्च हो चुके है.  रिसर्च के कुछ परिणामों को आजमाया भी गया है, लेकिन उसका बहुत लाभ कोयला कंपनियों को नहीं मिला है. हम कह सकते हैं कि कोयला चोरी लाइलाज बीमारी बन गई है और इससे कोयला कंपनियों को भारी आर्थिक नुकसान हो रहा है. 

सीआईएसएफ की भारी  भरकम फ़ौज के बाद भी यह हाल 
 
आपको बता दें कि कोयला चोरी रोकने के लिए कंपनी के पास भारी भरकम सीआईएसएफ की फौज है. सभी संवेदनशील पॉइंट पर सीसीटीवी कैमरे लगे हुए हैं, नियंत्रण कक्ष से इसकी निगरानी होती है.  लेकिन यह व्यवस्था कारगर  साबित नहीं हो रही है.  इसलिए कोल इंडिया ने सतत निगरानी प्रक्रिया के स्वचालन के लिए वीडियो एनालिटिक्स समाधान विकसित करने और इसे अमलीजामा पहनाने के लिए 'इन्नोवेशन चैलेंज' के मंच पर एक्सपर्टों को आमंत्रित किया है.  बता दें कि कोल इंडिया लिमिटेड दुनिया की सबसे बड़ी कोयला उत्पादक कंपनी है और यह देश के सबसे बड़ा कारपोरेट नियोक्ता भी है. 

पूरे देश में है कोल् इंडिया की 318 खदानें

कोल इंडिया लिमिटेड देश के 8 राज्यों में 84 खनन क्षेत्रों में अपनी सब्सिडियरी कंपनियों के जरिए कोयला उत्पादन करती है.  पूरे देश में सीआईएल की 318 खदानें हैं, जिनमें 141 भूमिगत और 158 पोखरिया  खदानें है. 19 मिश्रित खदानें भी इसमें शामिल है.  कंपनी की समस्या है कि महज सीसीटीवी फुटेज से अवैध ढुलाई का पता लगाना मुश्किल है. किसी भी व्यक्ति द्वारा लगातार मॉनिटरिंग नहीं की जा सकती. ऐसे में फुटेज का परीक्षण नहीं हो पाता है.  बता दें कि झारखण्ड में कोलियरीयों से जितना कोयले का वैध उत्पादन होता है, उसके एक चौथाई से अधिक कोयला चोरी हो जाता है.  

मजबूत और संगठित गिरोह के सामने सब बौने 

आप अनुमान लगा सकते हैं कि इस काम में कितना मजबूत और संगठित गिरोह सक्रिय है, जिसने कोल इंडिया जैसी बड़ी कंपनी को भी बैकफुट पर खड़ा कर दिया है. कोल् इंडिया लिमिटेड  की पूर्ण स्वामित्व वाली दस भारतीय अनुषंगी कंपनियां हैं, जिन में ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (ईसीएल), भारत कोकिंग कोल लिमिटेड (बीसीसीएल), सेंट्रल कोलफील्ड्स लिमिटेड (सीसीएल), वेस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (डब्ल्यूसीएल), साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (एसईसीएल), नॉर्दर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (एनसीएल), महानदी कोलफील्ड्स लिमिटेड (एमसीएल), सेंट्रल माइन प्लानिंग एंड डिजाइन इंस्टीट्यूट लिमिटेड (सीएमपीडीआईएल), गैर-पारंपरिक/स्वच्छ और नवकरणीय ऊर्जा के विकास के लिए सीआईएल नवकरणीय ऊर्जा लिमिटेड तथा सौर फोटोवोल्टिक मॉड्यूल के विकास के लिए सीआईएल सोलर पीवी लिमिटेड कार्यरत है. इसके अलावा सीआईएल की मोजाम्बिक में एक विदेशी अनुषंगी कंपनी, कोल इंडिया अफ्रीकाना लिमिटाडा (सीआईएएल) है. इसके अलावा सीआईएल की चार और संयुक्त उद्यम कंपनियां - हिंदुस्तान उर्वरक और रसायन लिमिटेड, तालचेर फर्टिलाइजर्स लिमिटेड, सीआईएल एनटीपीसी ऊर्जा प्राइवेट लिमिटेड तथा कोल लिग्नाइट ऊर्जा विकास प्राइवेट लिमिटेड भी है. 

Tags:News

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