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बिरसा कृषि विश्वविद्यालय में एग्रोटेक किसान मेले का सीएम ने किया उद्घाटन, कहा- संस्थान छात्रों को कृषि विज्ञान क्षेत्र में बना रहा काबिल

BY -
Shivani CE
Shivani CE
Copy Editor • TheNewsPost.in
PublishedAt: January 12, 2026, 12:23:59 PM

रांची(RANCHI): बिरसा कृषि विश्वविद्यालय, रांची परिसर में तीन दिवसीय "एग्रोटेक किसान मेला-2025" का आयोजन किया गया है. इस कार्यक्रम के उद्घाटन समारोह में 8 फरवरी को मुख्य अतिथि के रूप में राज्य के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन शामिल हुए. मुख्यमंत्री ने बिरसा कृषि विश्वविद्यालय परिसर में राष्ट्रीय कृषि विकास योजना अंतर्गत प्रशिक्षण हॉल व वन औषधि द्रव्य प्रदर्शनी दीर्घा का शिलान्यास किया. इस दौरान कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सीएम ने कहा कि खेती-किसानी और कृषि अपने आप में एक बहुत बड़ा क्षेत्र है. झारखंड जैसे राज्य के लिए एग्रीकल्चर एक महत्वपूर्ण विषय है. झारखंड की 80% आबादी ग्रामीण क्षेत्रों में निवास करती है. ये लोग खेती-बाड़ी के माध्यम से ही अपना जीवन यापन करते हैं. वर्तमान समय में कृषि के क्षेत्र में आधुनिक तकनीक की बड़ी भूमिका है.

उन्होंने कहा कि, राज्य में बिरसा कृषि विश्वविद्यालय के स्थापित हुए लगभग 45 वर्ष हो चुके हैं. यह विश्वविद्यालय राज्य में किसानों के उत्थान के लिए अपनी भूमिका का निर्वहन कर रहा है. इस संस्थान द्वारा बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं को कृषि विज्ञान के क्षेत्र में काबिल बनाया जा रहा है. बिरसा एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी से डिग्री प्राप्त कर कई छात्र-छात्राएं देश और दुनिया में आज किसानों को बेहतर मार्गदर्शन दे रहे हैं. बिरसा कृषि विश्वविद्यालय में एग्रीकल्चर, हॉर्टिकल्चर, फॉरेस्ट व रिसर्च के क्षेत्र में समावेशी शिक्षा प्रदान की जा रही है.

कृषि कार्य की आधुनिक तकनीक अपनाने की आवश्यकता

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि झारखंड पठारी क्षेत्र में बसा हुआ राज्य है. वैसे तो प्रत्येक राज्य में खेती-बाड़ी के अलग-अलग पैमाने होते हैं. कहीं सिंचाई हेतु पानी की उपलब्धता है तो कहीं व्यवस्थाओं के बल पर सिंचाई कार्य हेतु पानी पहुंचाया जा रहा है. किसान वर्ग को अन्नदाता कहा जाता है. बिरसा कृषि विश्वविद्यालय द्वारा किसानों को अपग्रेड करने की दिशा में कई गतिविधियां की जा रही हैं. लेकिन किसानों के सर्वांगीण विकास के लिए अभी और कार्य करने बाकी हैं. बिरसा एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी व राज्य सरकार एक बेहतर समन्वय बनाते हुए किसानों को बेहतर दिशा देने का कार्य करेगी. वर्तमान समय में परंपरागत व्यवस्थाओं के साथ-साथ कृषि-खेती कार्य को आधुनिक तकनीक से भी जोड़ने की आवश्यकता है. कभी-कभी बदलते मौसम के कारण किसान वर्ग के लोग हतोत्साहित होते जाते हैं, तकनीक के माध्यम से ही उन्हें इन समस्याओं से बचाया जा सकता है.

पाइपलाइन के माध्यम से खेतों तक पहुंचाई जाएगी पानी

सीएम ने कहा कि राज्य सरकार किसानों के हित के लिए कई योजनाओं को संचालित कर रही है. उन्होंने कहा की वे खुद खेती-कृषि परिवार से आते हैं. पहले उनके गांव में गन्ने की खेती होती थी उन्होंने खेतों में उगाए गए गन्नों से गुड़ बनते हुए देखा है. सीएम ने कहा कि अब गन्ने की खेती नहीं के बराबर हो रही है. इसके कई कारण हो सकते हैं. बहुत किसान ऐसे भी हैं जिन्होंने अपने खेतों में कृषि करना छोड़ दिया है. हमारे राज्य में खेती करने योग्य जमीन की कमी है. राज्य में खेती योग्य भूमि को बढ़ाने की दिशा में कार्य करने की जरूरत है. हमारी सरकार अब कई जगहों पर पाइप लाइन के जरिए खेतों तक पानी पहुंचाने का कार्य कर रही है. राज्य सरकार लिफ्ट इरीगेशन की दिशा में आगे बढ़ रही है.

किसानों के उत्थान के लिए यूनिवर्सिटी व राज्य सरकार का समन्वय महत्वपूर्ण

सीएम ने कहा कि राज्य में कृषि के क्षेत्र में सकारात्मक विकास के लिए बिरसा एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी और राज्य सरकार को साथ चलकर कार्य करने की जरूरत है. कृषि क्षेत्र के विकास के लिए एक बेहतर और मजबूत कार्य योजना बनाई जाएगी. किसान वर्ग के लोग अधिक से अधिक पैदावार कर सकें और उन्हें बाजार भी उपलब्ध कराया जा सके ऐसी व्यवस्था बनाने की जरूरत है. इन सभी चीजों पर विचार-विमर्श करते हुए एक बेहतर पॉलिसी बनाने को लेकर राज्य सरकार प्रतिबद्ध है. बिरसा कृषि विश्वविद्यालय से यहां के कृषकों को क्या लाभ मिल रहा है, आने वाले समय में और क्या लाभ दिया जा सकेगा इस निमित्त ब्लूप्रिंट बनाई जाएगी.

सिंचाई कार्य हेतु कुआं निर्माण योजना का मिलेगा लाभ

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि राज्य में कृषकों के खेतों तक सिंचाई के लिए पानी, समय पर किसानों के बीच बीज-खाद का वितरण इन सभी चीजों पर विशेष बल दिया गया है. राज्य सरकार द्वारा यह निर्णय लिया गया है कि सभी जिलों में किसान पाठशाला स्थापित की जाएगी. जहां किसान भाई-बंधु खेती की आधुनिक तकनीक, पशुपालन, मछली पालन सहित अन्य महत्वपूर्ण गतिविधियों की जानकारी और प्रशिक्षण लेंगे. इसके अलावा राज्य सरकार ने यह भी निर्णय लिया है कि झारखंड के किसान वर्गों के लोगों को एक लाख से अधिक कुआं निर्माण योजना का लाभ मिलेगा. नदी, तालाब व कुआं सिंचाई के पारंपरिक साधन हैं. बोरिंग कभी-कभी फेल भी हो जाता है. इसलिए राज्य सरकार द्वारा कुआं निर्माण योजना लाई जा रही है.

महिलाओं को अपने पैरों पर खड़ा करना उद्देश्य

सीएम सोरेन ने कहा कि राज्य सरकार झारखंड में महिलाओं को मुख्यमंत्री मंईयां सम्मान योजना के तहत ढाई हजार रुपए प्रतिमाह सहयोग राशि प्रदान कर रही है. यह राशि यहां की महिलाओं को आत्मनिर्भर बना रहा है. इस राशि के जरिए राज्य में महिला किसान दीदियां पशुधन के माध्यम से आत्मनिर्भर बन सकती हैं. किसान महिलाएं गाय पालन, बकरी पालन, मुर्गी पालन, शूकर पालन, फूल की खेती सहित अन्य गतिविधियों के माध्यम से आय का स्रोत ढूंढ सकेंगी. झारखंड देश का पहला ऐसा राज्य है जो महिलाओं को अपने पैरों पर खड़ा करने की दिशा में सकारात्मक कार्य कर रहा है. राज्य सरकार की सोच है कि कैसे यहां के किसान खेती-कृषि के माध्यम से कृषक उद्यमी के तौर पर उभरे इस निमित्त योजनाबद्ध तरीके से कार्य किया जा रहा है. छोटे-छोटे घरेलू प्रोसेसिंग यूनिट लगाकर आप व्यवसाय कर सकते हैं. किसानों की मेहनत कभी बेकार नहीं जाती है, बस जरूरत है उन्हें एक बेहतर मार्गदर्शन मिले.

बिरसा कृषि मार्गदर्शीका-2025 पुस्तक का विमोचन..

इस अवसर पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन,  कृषि, पशुपालन एवं सहकारिता विभाग की मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की व अन्य अतिथियों द्वारा बिरसा कृषि मार्गदर्शीका-2025 पुस्तक का विमोचन किया गया. मौके पर मुख्यमंत्री व अन्य अतिथियों ने एग्रोटेक किसान मेले में लगे स्टॉल का परिभ्रमण कर उद्देश्यों की जानकारी ली. मौके पर बिरसा कृषि विश्वविद्यालय रांची के कुलपति डॉ. सुनील चंद्र दुबे,  मुख्यमंत्री के अपर मुख्य सचिव अविनाश कुमार, निदेशक, भारतीय कृषि जैव प्रौद्योगिकी संस्थान, रांची डॉ. सुजय रक्षित, निदेशक, प्रसार शिक्षा बिरसा कृषि विश्वविद्यालय डॉ.  जगरनाथ उरांव सहित अन्य वरीय पदाधिकारी उपस्थित रहे.

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