धनबाद(DHANBAD): झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के एक बयान को लेकर सियासी घमासान बढ़ गया है. मुख्यमंत्री ने असम में छात्र संगठन के कार्यक्रम में एक बयान दिया था. उन्होंने चुनाव आयोग, राज भवन और केंद्र सरकार पर टिप्पणी की थी. विपक्ष इसे मर्यादा की सीमा पार करने वाला बताया है. झारखंड के नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने सोशल मीडिया एक्स पर पोस्ट कर इस पर तीखी प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने अपने पोस्ट में कहा है कि-----
झारखंड के छात्रों को छात्रवृत्ति से वंचित कर बेसहारा छोड़ने वाले मुख्यमंत्री श्री @HemantSorenJMM जी कल असम में एक छात्र संगठन के कार्यक्रम को संबोधित करने पहुंचे और वहां अपने भाषण में शालीनता व मर्यादा की सभी सीमाएं लांघ दीं, अपने संबोधन में उन्होंने चुनाव आयोग, राजभवन और केंद्र सरकार पर आपत्तिजनक व ओछी टिप्पणियां की.
यह वही संविधान है, जिसके तहत हेमंत सोरेन मुख्यमंत्री बने हैं, और उसी संविधान में चुनाव आयोग को प्रदत्त अधिकारों का भी स्पष्ट उल्लेख है, जिनके अंतर्गत SIR जैसी प्रक्रियाएं आती हैं. राजभवन पर जेल भेजने का आरोप लगाने से पहले हेमंत जी को यह याद रखना चाहिए कि जमीन घोटाले में ईडी के नोटिस की अवहेलना उन्होंने स्वयं की थी. राजभवन ने उन्हें तलब नहीं किया था, बल्कि वह तो खुद दिल्ली से आधी रात को भागकर राजभवन पहुंचे थे, ताकि गिरफ्तारी से बच सकें। इसके साथ ही, भगवान बिरसा मुंडा और सिद्धू-कान्हो जैसे महान आदिवासी नायकों के बीच शिबू सोरेन का नाम जोड़कर हेमंत सोरेन न केवल इतिहास से छेड़छाड़ कर रहे हैं, बल्कि आदिवासी महापुरुषों का अपमान भी कर रहे हैं.
शिबू सोरेन के संघर्ष को नकारा नहीं जा सकता, लेकिन यह भी कड़वा सच है कि उन्होंने रिश्वत लेकर झारखंड आंदोलन को कांग्रेस और राजद के हाथों बेच दिया, जिनकी गोद में बैठकर आज हेमंत सोरेन सरकार चला रहे हैं. हेमंत जी की सबसे बड़े आदिवासी नेता बनने की महत्वाकांक्षा भले पूरी न हुई हो, लेकिन सबसे बड़े भ्रष्टाचारी के रूप में उनकी पहचान जरूर बन चुकी है. रांची जमीन घोटाले में वह चार्जशीटेड हैं, साहिबगंज खनन घोटाले में उनकी भूमिका की जांच सीबीआई कर रही है और ऊर्जा विभाग में भी सौ करोड़ रुपये से अधिक के घोटाले सामने आ चुके है.
हेमंत जी के द्वारा वोट चोरी का आरोप केंद्र पर लगाना सरासर झूठ है, क्योंकि नगर निकाय चुनावों में 1 अक्टूबर 2024 के बाद जुड़े युवाओं को मतदान से वंचित रखकर लोकतंत्र और संविधान का अपमान खुद हेमंत सोरेन कर रहे हैं. अगर उन्हें सच में संविधान का सम्मान है, तो अद्यतन मतदाता सूची के आधार पर चुनाव कराने का साहस दिखाएं, जेल जाने और सजा के भय से उनकी मानसिक स्थिति असंतुलित हो चुकी है, इसी हताशा में वे अनर्गल बयान दे रहे हैं. हेमंत जी, स्पष्ट कर देना जरूरी है कि आपकी गीदड़ भभकी से न तो SIR रुकेगा और न ही भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रही कार्रवाई।
रिपोर्ट -धनबाद ब्यूरो
