धनबाद(DHANBAD): निकाय चुनाव को लेकर भाजपा ने अब अपनी रणनीति घोषित कर दी है. नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने स्पष्ट कर दिया है कि पार्टी निकाय चुनाव में प्रत्याशी के नाम की घोषणा नहीं करेगी और न हीं कोई पार्टी के विधायक अथवा सांसद खुलकर किसी उम्मीदवार का प्रचार करेंगे। मतलब साफ है कि अब पर्दे की पीछे की राजनीति खूब चलेगी। बाबूलाल मरांडी ने कहा है कि निकाय चुनाव दलीय आधार पर नहीं हो रहा है. इसलिए पार्टी किसी खास के नाम की घोषणा नहीं करेगी। कार्यकर्ताओं को आंतरिक रूप से समझाने का प्रयास होगा, कि दल समर्थित एक ही प्रत्याशी मैदान में रहे. यदि एक से अधिक प्रत्याशी मैदान में रहेंगे, तो आकलन कर मजबूत प्रत्याशी को आंतरिक समर्थन दिया जाएगा। या मजबूत प्रत्याशी के पक्ष में सभी को बैठाने की कोशिश की जाएगी।
भाजपा में उम्मीदवारों की संख्या सबसे अधिक
भाजपा की मांग थी कि निकाय चुनाव दलीय आधार पर हो, परंतु हेमंत सोरेन सरकार ने ऐसा नहीं किया। वैसे, भाजपा अभी भी मंथन कर रही है. रायशुमारी के बाद सभी नाम को प्रदेश नेतृत्व के सामने भेजा जाएगा। और अंतिम निर्णय 31 जनवरी तक संभव है. अगर धनबाद में मेयर पद के चुनाव को देखा जाए, तो लड़ाई अब दिलचस्प होती जा रही है. जिस हिसाब से उम्मीदवारों में रुचि है, इसे देखते हुए यह कहा जा सकता है कि पार्टी की बात ,कार्यकर्ता मानने को तैयार नहीं है. यह अलग बात है कि भाजपा ने अब यू टर्न ले लिया है और अब अपना "विजन" क्लियर कर दिया है. बात सिर्फ भाजपा की ही नहीं है, झामुमो में भी कई उम्मीदवार हैं. जिला कमेटी ने बहुत पहले ही डॉक्टर नीलम मिश्रा को उम्मीदवार घोषित कर दिया था. लेकिन अब विधायक मथुरा प्रसाद महतो के बेटे दिनेश महतो, झामुमो नेता देबू देबू महतो ने भी पर्चा खरीदा है.
सभी दलों में लगभग एक ही हालत ,अब आगे क्या
जानकार बता रहे हैं कि और भी उम्मीदवारी कर सकते हैं. मतलब, साफ है कि झामुमो भी अब किसी एक उम्मीदवार को आगे करने से पैर पर खींच सकता है. मथुरा प्रसाद महतो के बेटे दिनेश महतो 2015 में भी निगम का चुनाव लड़ा था, लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा था. आने वाले दिनों में कई लोग भी सामने आ सकते हैं. कांग्रेस में कई तैयार हैं चुनाव लड़ने को. झरिया के पूर्व विधायक संजीव सिंह ने भी नामांकन पत्र खरीदा है. पूर्व मेयर शेखर अग्रवाल तो गुरुवार को नामांकन भी दाखिल कर दिया। वैसे, पूर्व सांसद पशुपतिनाथ सिंह ने भी अपने छोटे बेटे का नाम आगे किया है. अब तो लगभग तय हो गया है कि पार्टी किसी एक को उम्मीदवार घोषित नहीं करेगी, ऐसे में लड़ाई दिलचस्प होगी और नेताओं का लिटमस टेस्ट भी होगा।
रिपोर्ट -धनबाद ब्यूरो
