धनबाद(DHANBAD) | धनबाद में मेयर का चुनाव प्रचार अब तल्ख़ होता जा रहा है. जैसे-जैसे मतदान की तिथि नजदीक आ रही है, आरोप -प्रत्यारोप का दौर तेज होता जा रहा है. रविवार को सिंदरी में झामुमो समर्थित उम्मीदवार शेखर अग्रवाल के चुनाव कार्यालय में उद्घाटन के पहले ही आगलगी हो गई. यह आग लगी अथवा किसी की साजिश है, इस मामले का खुलासा आगे होगा। पुलिस इस मामले की जांच कर रही है. इधर, राज्य की सरकार में शामिल कांग्रेस के नेताओं के बोल भी बेलगाम हो गए हैं. पलट बयान भी तीखा हो रहा है. कांग्रेस के जिला अध्यक्ष संतोष सिंह ने झामुमो समर्थित उम्मीदवार शेखर अग्रवाल को निशाने पर लिया, तो जेएमएम के नेता भी संतोष सिंह को खूब खरी खोटी सुना दी.
धनबाद में कांग्रेस के समर्थित उम्मीदवार हैं, तो झामुमो समर्थित भी उम्मीदवार चुनाव मैदान में हैं. भाजपा के बागी उम्मीदवार भी मैदान से नहीं हटे , भाजपा ने भी संजीव अग्रवाल को अपना समर्थन दिया है. प्रदेश भाजपा की ओर से बागी नेताओं को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है. बताया जाता है कि नोटिस का जवाब संतोषजनक नहीं होने पर पार्टी कार्रवाई कर सकती है. सूत्रों के अनुसार 22 फरवरी को भाजपा अपने एक्शन का पत्ता खोल सकती है. 23 फरवरी को मतदान है, वैसे भी धनबाद का चुनाव कई मायनों में रोचक है. झामुमो इस बार मजबूती से झारखंड में निकाय चुनाव लड़ रहा है. धनबाद के चुनाव पर भी झामुमो की नजर है ,तो भाजपा भी धनबाद के चुनाव को प्रतिष्ठा से जोड़कर चल रही है.
धनबाद का मेयर सीट भाजपा के तीन विधायक और एक सांसद की परीक्षा लेगी। कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष का भी धनबाद में दौरा हो चुका है. यह अलग बात है कि धनबाद में माफिया से लेकर मजदूर तक, लखपति से लेकर करोड़पति तक, उच्च शिक्षाधारी से लेकर कम पढ़े लिखे भी उसी रास्ते पर वोट मांग रहे हैं, जिस रास्ते पर कभी वह पैदल चले नहीं होंगे। उम्मीदवारों की संख्या अधिक होने की वजह से वोटर भी परेशान हैं. कुछ वार्डों में तो वार्ड पार्षदों के उम्मीदवारों की संख्या भी दो दर्जन से अधिक है. नतीजा है कि मतदाताओं के दरवाजे पर एक उम्मीदवार जाता है, तो दूसरा पहुंच जाता है.
सबके अपने-अपने दावे हैं, 23 फरवरी को मतदान होगा और 27 फरवरी को मतगणना होगी।
इस बार मेयर की कुर्सी इसलिए भी "म्यूजिकल" हो गई है कि कम से कम दो उम्मीदवार ऐसे मैदान में हैं. जो धनबाद के मेयर रह चुके हैं. श्रीमती इंदु देवी पहली मेयर थी ,तो शेखर अग्रवाल दूसरे मेयर रहे. दोनों इस बार चुनावी मैदान में ताल ठोक रहे हैं. झरिया के पूर्व विधायक संजीव सिंह भी मजबूती से मैदान में खड़े हैं, तो कांग्रेस से शमशेर आलम चुनाव लड़ रहे हैं. भाजपा ने संजीव अग्रवाल को समर्थन दिया है. केके पॉलिटेक्निक के संस्थापक रवि चौधरी भी मैदान में हैं. इस बार चुनाव इसलिए भी रोचक हो गया है कि कई "हैवीवेट" उम्मीदवार मैदान में उतर गए हैं. इतना तो कहा ही जा सकता है कि इस बार का चुनाव प्रचार थोड़ा बदला -बदला सा दिख रहा है. लगभग सभी उम्मीदवार प्रचार में ताकत झोंक दिए हैं. जिन उम्मीदवारों को पार्टियों का समर्थन है, उनके प्रचार में बड़े नेता भी पहुंचने वाले हैं.
रिपोर्ट -धनबाद ब्यूरो
