धनबाद(DHANBAD): धनबाद कोयलांचल में 2029 आते-आते राजनीति के कई रंग देखने को मिलेंगे। इसके टेलर अभी से दिखने शुरू हो गए है. 2029 का धनबाद में संसदीय चुनाव काफी रोचक हो सकता है. इसकी जमीन अभी से ही तैयार करने के लिए आपाधापी मची हुई है. विभिन्न पार्टियों के लोग एक दूसरे के राजनीतिक दुश्मन बने हुए हैं. इधर, इस बात की चर्चा तेजी से फैली है कि 202 9 के लोकसभा चुनाव में अपनी पत्नी के लिए जमीन तैयार करने में विधायक अनूप सिंह लग गए हैं. इसके लिए धनबाद लोकसभा का प्रभारी बनने में वह सफल हो गए है.
झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने दी है नई जिम्मेवारी
दरअसल, झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने संगठन को मजबूत करने के लिए विभिन्न पदाधिकारी को नई जिम्मेवारियां दी है. इसी क्रम में झारखंड के 14 संसदीय
क्षेत्र में प्रभारी नियुक्त किए गए हैं. धनबाद संसदीय क्षेत्र का प्रभारी विधायक अनूप सिंह को बनाया गया है. वह बेरमो से कांग्रेस के विधायक हैं. 2024 में वह धनबाद संसदीय क्षेत्र से अपनी पत्नी अनुपमा सिंह को कांग्रेस का टिकट दिलवाकर सबको चौंकाया था. यह अलग बात है कि उनकी पत्नी चुनाव हार गई, लेकिन चुनाव हारने के बाद भी अनुपमा सिंह की सक्रियता कम नहीं हुई है. तैयारी बता रही है कि 202 9 में भी चुनाव लड़ने का मन उन्होंने बना रखा है. जाहिर है अनूप सिंह अभी से ही अनुपमा सिंह के पक्ष में माहौल बनाने की कोशिश करेंगें।
निरसा विधायक भी कर रहे क्षेत्र विस्तार
इधर जैसा कि सूत्र बता रहे हैं कि निरसा के विधायक अरूप चटर्जी भी क्षेत्र विस्तार में लगे हुए हैं और उनका टारगेट 202 9 का लोकसभा चुनाव ही है. और यही वजह है कि वर्तमान सांसद ढुल्लू महतो और विधायक अरूप चटर्जी में राजनीतिक टकराव बढ़ गया है. अरूप चटर्जी अपना क्षेत्र विस्तार कर रहे हैं, तो ढुल्लू महतो अरूप चटर्जी के घर में जाकर अपने मजदूर संगठन को धार देने की कोशिश कर रहे है. जेएलकेएम नेता को उन्होंने एटक में शामिल कराकर निरसा इलाके में अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं.
मेयर संजीव सिंह भी हैं आगे -आगे
चर्चा तो यह भी है कि झरिया के पूर्व विधायक संजीव सिंह मेयर का चुनाव जीतकर यह साबित कर दिया है कि वह लोकसभा के भी उम्मीदवार हो सकते हैं. इसके लिए उन्होंने प्रयास भी शुरू कर दिया है. मेयर होने की वजह से धनबाद संसदीय क्षेत्र में काम करने का उन्हें मौका भी मिला है. मतलब साफ है कि सांसद ढुल्लू महतो की 202 9 में घेराबंदी की जमीन अभी से ही तैयार होनी शुरू हो गई है. यह अलग बात है कि धनबाद भाजपा का गढ़ माना जाता है. बाघमारा का विधायक रहते हुए 2004 में धनबाद संसदीय क्षेत्र से टिकट लेकर ढुल्लू महतो ने भी सबको चौंकाया था. और कई लोगों के मंसूबे पर पानी फिर गया था. मेयर और सांसद के रिश्ते भी अब जहजाहिर हो गए हैं.