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चाईबासा सदर अस्पताल का हाल बदहाल, 47 की जगह मात्र 12 डॉक्टर के भरोसे चल रहा इलाज

BY -
Prakash Tiwary
Prakash Tiwary
Copy Editor • TheNewsPost.in
PublishedAt: January 19, 2026, 2:33:42 AM

चाईबासा(CHAIBASA): लोगों के लिए स्वास्थ्य सबसे जरूरी सुविधा मानी जाती है. लोगों के बेहतर स्वास्थ्य और निरोग जीवन के लिए एक अच्छा स्वास्थ्य तंत्र होना बहुत ही जरूरी है. इससे भी ज्यादा जरूरी होता है इन स्वास्थ्य तंत्र को चलाने वाले बेहतर डॉक्टर की. मगर, कई ऐसे अस्पताल हैं, जहां पर्याप्त संख्या में डॉक्टर ही नहीं हैं. ऐसे ही आज एक अस्पताल के बारे में हम बताने जा रहे हैं.

चाईबासा सदर अस्पताल मे 12 डॉक्टर करते हैं काम

चाईबासा का सदर अस्पताल पश्चिम सिंहभूम जिले का जीवन रक्षक सुविधा केंद्र है. पूरे जिले से 400 से 500 की संख्या में ग्रामीण मरीज सदर अस्पताल में रोजाना आते हैं. यहां की ओपीडी में हमेशा मरीजों की भीड़ लगी रहती है. सदर अस्पताल में मरीजो के इलाज की सारी व्यवस्था मौजूद है. यहां दूसरे जिलों से भी मरीज इलाज के लिए आते हैं. चाईबासा शहर में ही कोल्हान आयुक्त और कोल्हान यूनिवरसिटी का कार्यालय स्तिथ है. जिस कारण सदर अस्पताल, चाईबासा वर्षों से स्वास्थ्य का मुख्य केंद्र बना हुआ है. 18 प्रखंडों का यह जिला 90 प्रतिशत ग्रामीण क्षेत्रीय हैं.

ये तो रही इस अस्पताल की बात. अब बात करते हैं उनकी, जिनके भरोसे ये अस्पताल चलता है, डॉक्टरों की. सदर अस्पताल, चाईबासा में डॉक्टरो के लिए 47 स्थान सृजित हैं. मगर, विडंबना है कि मात्र 12 डॉक्टर ही पदस्थापित हैं. इतने मरीजों को सिर्फ 12 डॉक्टरों के भरोसे इलाज कराया जा रहा है. इससे डॉक्टरो पर कितना दबाव होगा, इसकी सिर्फ परिकल्पना ही की जा सकती है.

भाजपा नेता ने स्वास्थ्य सचिव को लिखा पत्र

जब इस स्थिति का पता भाजपा नेता हेमंत केसरी को चला, तो उन्होंने इस बारे में राज्य के स्वास्थ्य सचिव अरुण कुमार सिन्हा को पत्र लिखा. पत्र के माध्यम से उन्होंने इस अस्पताल की स्थित के बारे में स्वास्थ्य सचिव को अवगत कराया है. उन्होंने अपने पत्र में लिखा है कि प्रधानमंत्री जनस्वास्थ्य हेतु कई जरूरी कदम उठा रहे हैं. पर यहां के अस्पताल में डॉक्टरों की कमी से जनता बदहाल है. उन्होंने आगे लिखा कि यहां पदस्थापित मात्र एक रेडियोलॉजिस्ट अपने मनमर्जी से ड्यूटी करती हैं. अभी कई दिनों से वह भी अवकाश में हैं, जिससे गर्भवती महिलाओं को अस्पताल से बाहर अल्ट्रासाउंड जांच करवाने मजबूरी में जाना होता है. इससे मरीज़ों को शारीरिक के साथ आर्थिक नुकसान भी हो रहा है. वर्षा काल में तो क्या होगा यह विचारणीय विषय है. इन सभी स्थिति से अवगत कराते हुए भाजपा नेता ने स्वास्थ्य सचिव से अस्पताल की बदहाली को दूर करने और सभी 47 पदों पर डॉक्टरों की नियुक्ति करने की मांग की है.

 

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