चाईबासा(CHAIBASA): गोइलकेरा प्रखंड में शिक्षा विभाग और झारखंड शिक्षा परियोजना में सरकारी राशि की लूट मची है. यहां विद्यालय विकास अनुदान राशि को स्कूलों में खर्च करने के बजाय बंदरबाट किया जा रहा है. स्कूलों को छात्र संख्या के आधार पर 25 हजार से एक लाख रुपए तक प्रतिवर्ष इस मद में राशि आवंटित की जाती है. इस राशि का उपयोग स्कूल भवन के रंग-रोगन, मरम्मती, स्वच्छता और स्टेशनरी खरीद आदि में करना है. लेकिन गोइलकेरा के स्कूलों को आवंटित राशि की लेखपाल और प्रखंड संसाधन केंद्र में सक्रिय बिचौलियों की मदद से बंदरबांट किए जाने का मामला सामने आया है. बताया जा रहा है कि राशि का भुगतान अधिकृत वेंडर के बजाय फर्जी विपत्र बनाकर बिचौलियों के खाते में कर दिया गया है. इतना ही नहीं शिक्षकों को राशि खर्च करने से मना कर उन्हें बिचौलियों से विपत्र लेकर खाते में राशि ट्रांसफर करने का दबाव बनाया जा रहा है. इस पूरे मामले में बीईईओ स्वप्न कुमार मंडल गोलमोल जवाब दे रहे हैं. उनका कहना है कि मामले की जानकारी नहीं थी. इसकी जांच कराई जाएगी. सभी स्कूलों को खेल सामाग्री क्रय करने के लिए भी राशि दी गई, लेकिन अधिकांश स्कूलों में खेल सामग्री की खरीद नहीं हुई है. एक बिचौलिए द्वारा फर्जी बिल उपलब्ध करा राशि निर्गत कराई जा रही है. प्राथमिक विद्यालयों को पांच हजार जबकि माध्यमिक और उच्चतर विद्यालयों को सात हजार रुपये खेल सामग्री क्रय के लिए राशि आवंटित की गई थी.
आज तक नहीं उपलब्ध कराया गया साक्ष्य
इस मामले को लेकर जिला शिक्षा पदाधिकारी द्वारा दो माह पहले ही प्रखंड शिक्षा प्रसार पदाधिकारी सह प्रखंड कार्यक्रम समन्वयक से साक्ष्य के साथ प्रतिवेदन उपलब्ध कराने को कहा गया था. लेकिन आज तक घोटाला किए गए मामले में साक्ष्य के साथ प्रतिवेदन उपलब्ध नहीं करवाया गया है. जबकी इस सबंध में गोईलकेरा प्रखंड के अंचल अधिकारी के द्वारा प्रखंड शिक्षा प्रसार पदाधिकारी गोईलकेरा जांच कर रिपोर्ट देने को कहा गया था. पत्र में कहा गया था कि गोईलकेरा अंचल के स्कूल पोशाक के नाम पर घटिया पोशाक देकर कमिशन लेने और योजना को भ्रष्टाचार का भेंट चढ़ाने के सबंधित आवेदक मो परवेज अंसारी के द्वारा आवेदनपत्र में उल्लेख किया गया है. उक्त वर्णित विषयाकित मामले में स्कूल युनिफॉर्म की खरिददारी से सबंधित अभिश्रव भायुचर दो दिनों के अंदर अधोहस्ताक्षरी को उपलब्ध कराना सुनिश्चित करें जो आज तक नहीं की गई. जबकी यह चर्चा है कि बीआरसी के लेखापाल नें फर्जी बाउचर एक गार्ड के नाम पर बनाकर करीब 15 लाख रूपये की निकासी कर ली है. इसी तरह का हाल नोवामुण्डी प्रखंड में भी है.
रिपोर्ट: संतोष वर्मा, चाईबासा
