धनबाद (DHANBAD): आईआईटी (आईएसएम) धनबाद में बुधवार को शताब्दी स्थापना सप्ताह की शुरुआत बेहद भव्य और गरिमामय माहौल में हुई. कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव डॉ. पी. के. मिश्रा शामिल हुए. उन्होंने संस्थान के 100 वर्ष पूरे होने पर बधाई देते हुए कहा कि आईआईटी (आईएसएम) देश की तकनीकी प्रगति, खनन क्षेत्र के विकास और मानव संसाधन निर्माण में एक सदी से महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है.
कार्यक्रम की शुरुआत वैदिक मंत्रोच्चार, शंखध्वनि और दीप प्रज्वलन के साथ हुई. सत्र का संचालन प्रो. रजनी सिंह ने किया, जिनकी एंकरिंग की भी प्रशंसा हुई. समारोह में वैज्ञानिकों, राजनयिकों, विद्वानों, उद्योग जगत के प्रतिनिधियों, पूर्व छात्रों और विद्यार्थियों की बड़ी संख्या मौजूद रही.
आईआईटी (आईएसएम) के निदेशक प्रो. सुकुमार मिश्रा ने कहा कि शताब्दी वर्ष केवल उत्सव नहीं, बल्कि संस्थान की भविष्य की जिम्मेदारियों की नई शुरुआत है. उन्होंने बताया कि आने वाले समय में संस्थान माइनिंग 4.0, क्लीन एनर्जी, डिजिटल टेक्नोलॉजी, एआई और क्रिटिकल मिनरल रिसर्च में देश का नेतृत्व करने के लिए तैयार है.
समारोह में एमएनआईटी जयपुर के निदेशक प्रो. एन. पी. पाढ़ी को सम्मानित किया गया. ब्रिटिश डिप्टी हाई कमिश्नर एंड्रयू फ्लेमिंग ने यूके-इंडिया विज़न 2035 के तहत बढ़ते सहयोग की सराहना की और डिजिटल लैब साझेदारी का उल्लेख किया.
मुख्य अतिथि ने देश में तकनीकी बदलाव, ग्रीन एनर्जी, क्वांटम टेक्नोलॉजी और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर की प्रगति का जिक्र करते हुए कहा कि आईआईटी (आईएसएम) को भविष्य के प्रमुख शोध क्षेत्रों में अपनी भूमिका और मज़बूत करनी होगी.
कार्यक्रम के बाद वीआर माइन सिम्युलेटर लैब, डिजिटल माइनिंग लैब, TEXMiN–GEOTEK ड्रिल कोर डिजिटाइजेशन लैब सहित कई नई सुविधाओं का उद्घाटन किया गया.
छात्रों ने ड्रोन, रोबोटिक डिवाइस और बैटरी आधारित रेसिंग कार की प्रदर्शनी भी लगाई. छात्रों ने बताया कि उनके बनाए ड्रोन प्रदूषण नियंत्रण और फायर फाइटिंग में उपयोगी होंगे, जबकि रोबोटिक सिस्टम सुरक्षा एजेंसियों की मदद करेंगे. रेसिंग कार बनाने वाले टीम के हेड प्रो. रमेश प्रसाद ने बताया कि देश के केवल सात संस्थान ही इस तरह की कार बना पाए हैं.
रिपोर्ट : नीरज कुमार
