गुमला(GUMLA): दीपों का त्योहार – दीपावली. मगर, इस त्योहार में अब दीपों की जगह आधुनिक लाइटों ने ले ली हैं. मगर, ये लाइटे कितने ही आधुनिक क्यों ना हो जाए, दीयों की जगह कोई ले सकता. दीपावली का पर्व बस आने में कुछ ही दिन बचे हैं. इस पर्व के आते ही हमारे दिमाग मे मिट्टी के उन दीयों की रोशनी सामने आ जाती है, जिनसे पूरा पृथ्वी चमकने लगता हैं. इस आधुनिकता की दौर में जहां मिट्टी के दीये पूरी तरह गुम होते जा रहे हैं, वहीं इसे गंभीरता से लेते हुए एक महिला ने मिट्टी के दीयो को ही आधुनिकता के रंग से रंग कर बाजार में उतारने का काम किया है, जो लोगो को काफी पसंद आ रहा है.
रांची की आंचल दुग्गड़ बना रही मिट्टी के आधुनिक दीये
इन दीयो की इतिहास को आज भी जीवित रखने के लिए रांची की आंचल दुग्गड़ काम कर रही है, जो विभिन्न स्थानों में इन दिनों स्टॉल लगाकर मिट्टी के दीयो को आधुनिक रूप देकर लोगो के बीच लेकर जा रही हैं. इसे लोग भी काफी पसंद कर रहे हैं. गुमला में आयोजित दीपोत्सव मेला में आयी आंचल दुग्गड़ ने अपनी उन्हीं मिट्टी के दीयो का स्टॉल लगाया है, जो लोगो को काफी पसंद आ रहा है. उन्होंने कहा कि उनका मायका कोलकत्ता में है, जहां दीपावली में मिट्टी के दीयो का उपयोग होता है. लेकिन, जब उनकी शादी हुई और वह रांची आयी तो देखा कि मिट्टी के दीये का काफी कम उपयोग होता है. उसके बाद ही उन्होंने ऐसे दीये बनाने का निर्णय लिया.
लोग भी आधुनिक दीये को लेकर उत्साहित
वहीं गुमला में इस तरह के मिट्टी के दीयो का स्टॉल देखकर लोगों मे काफी उत्साह का माहौल देखा जा रहा है. स्थानीय लोगो ने कहा कि इस तरह का कार्य कर आंचल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस सपने को भी पूरा कर रही हैं जिसमे वे देश की प्राचीन परंपरा के तहत मिट्टी के दीयो का उपयोग करने की अपील करते हैं. उन्होंने इस पहल की सराहना की.
रिपोर्ट: सुशील कुमार सिंह, गुमला