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Bonous in Coal India :ठेका कर्मियों को ले मैनेजमेंट-यूनियनें सवालों में क्यों, पढ़िए विस्तार में ! 

Bonous in Coal India :ठेका कर्मियों को ले मैनेजमेंट-यूनियनें सवालों में क्यों, पढ़िए विस्तार में ! 

धनबाद(DHANBAD) : देश की कोयला उत्पादक कंपनी कोल इंडिया के रेगुलर लगभग सवा दो लाख कर्मचारियों के लिए 93,750 रुपये बोनस की घोषणा हो गई है. 9 अक्टूबर के पहले उन्हें भुगतान मिल जाएगा. लेकिन जिनके भरोसे कोल इंडिया अपनी छाती चौड़ी करती है, उनके लिए मानकीकरण समिति की बैठक में कुछ खास नहीं हुआ. यूनियन नेताओं ने भी ठेकाकर्मियों के लिए सिर्फ रस्म अदायगी भर की. प्रबंधन ने साफ कह दिया कि ठेका कर्मियों को विभागीय कर्मियों की तरह बोनस का कोई प्रावधान नहीं है. यह जरूर भरोसा दिया गया कि ठेका कर्मियों को कॉन्ट्रैक्ट लेबर एक्ट के अनुसार 8.33% बोनस का भुगतान दिवाली तक करा  दिया जाएगा. फिलहाल  कोल इंडिया का उत्पादन  आउटसोर्स कंपनियों के भरोसे चल रहा है. 55 प्रतिशत उत्पादन में ठेका मजदूरों की महती भूमिका है.  ठेकाकर्मियों का अधिकृत आकड़ा 90 हज़ार के आस पास बताया जाता है. लेकिन असंगठित क्षेत्र में कार्य कर रहे कर्मियों की वास्तविक  संख्या इससे कहीं अधिक है.

कोल इंडिया के  उत्पादन के बड़े हिस्से का भार ठेका  मजदूरों पर 
  
मतलब कोल इंडिया के उत्पादन के बड़े हिस्से का भार ठेका मजदूरों के कंधे पर है.  लेकिन पिछले साल भी इन पर कोई "कृपा दृष्टि" बोनस के मद  में नहीं दिखाई गई थी और इस साल भी नहीं दिखाई गई है. धनबाद के BCCL का तो 90 प्रतिशत प्रोडक्शन आउट सोर्स के भरोसे होता है. सूत्र बताते है कि बोनस की बैठक में ठेका मजदूरों को बोनस देने का मुद्दा यूनियनों ने उठाया जरूर लेकिन यह उत्साह में अधिक और विश्वास में कम था. मैनेजमेंट ने कहा कि विभागीय कर्मियों की तरह इन्हें बोनस देने का कोई प्रावधान नहीं है.  हां, इस बात का आश्वासन जरूर मिला कि कॉन्ट्रैक्ट लेबर एक्ट के अनुसार ठेका मजदूरों को भुगतान मिल सकता है. 

कोयलांचल में ठेका कर्मियों की संख्या कम नहीं है 
 
धनबाद कोयलांचल की बात करें तो ठेका मजदूर की संख्या कम नहीं है. अधिकृत आंकड़े 6000 से 7000 के बीच ठेका मजदूरों की संख्या बताते हैं लेकिन सच्चाई इससे कुछ अलग है. धनबाद में तो इन्हीं ठेका मजदूरों के भरोसे यूनियन चलाने वालों की राजनीति चमकती है. उत्पादन के बाद भी उनकी भूमिका होती है. ट्रक लोडिंग से लेकर अन्य कामों में ठेका मजदूर ही हिस्सा बनते है. हर एक लोडिंग पॉइंट पर मजदूरों का दंगल होता है और यह दंगल किसी न किसी श्रमिक संगठनों से जुड़ा होता है. कहा जा  सकते हैं कि श्रमिक संगठन इन्हें अपने से जोड़ लेते है. फिर तो शुरू हो जाती है रंगदारी. अक्सर यहां के लोडिंग प्वाइंटों पर मारपीट, बमबाजी, फायरिंग होती रहती है. जिस लोडिंग पॉइंट पर जिन  मजदूर संगठन से जुड़े अधिक दंगल होंगे, वहां उस संगठन की तूती बोलती है. लेकिन जब बोनस की बात आती है तो उनकी हकमरी की जाती है.

रिपोर्ट -धनबाद ब्यूरो  

Published at:30 Sep 2024 12:13 PM (IST)
Tags:DhanbadCoal IndiaBonousRegularContract
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