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BLACK SUNDAY -जोगता में चार घर समा गए जमीन में ,जहरीली गैस का तांडव 

BY -
Satya Bhushan Singh   Dhanbad
Satya Bhushan Singh Dhanbad
Copy Editor • TheNewsPost.in
PublishedAt: January 13, 2026, 6:10:14 PM

धनबाद(DHANBAD) |  कोयलांचल की जमीन "सिनेमाई" अंदाज में फट रही है.  घर में लोग सोए रह रहे हैं और घर जमींदोज हो जा रहे है.  राह चलते लोगों को जमीन निगल जा रही है. गोंदूडीह  में तो कुछ ऐसा ही हुआ था कि तीन महिलाएं जा रही थी कि धंसान की चपेट में आकर जमीन में समा गई.  रविवार को बीसीसीएल के क्षेत्र संख्या 5 की कनकनी  कोलियरी 11 नंबर(जोगता ) में चार घर जमीन  में समा गए.  यह  तो भगवान की कृपा थी कि किसी की जान नहीं गई.  फिर भी घर वालों के समान मालवा में दबे हुए है.  यह  घटना रविवार को सुबह लगभग 8 बजे के करीब हुई है. घटना के बाद जहरीली गैस निकल रही है. इलाके में इस घटना के बाद दहशद  का माहौल है. अब बीसीसीएल के अधिकारी पहुंचेंगे, कुछ आश्वासन देंगे  फिर स्थितियां जस की तस  बनी रहेगी. 

कोयलांचल का कोई इलाका अछूता नहीं है 
 
कोयलांचल के विभिन्न इलाकों में चाहे वह मैथन का इलाका हो, निरसा  का इलाका हो, झरिया का इलाका हो, कुसुंडा का इलाका हो, कतरास का इलाका हो अथवा बाघमारा का.  सभी जगह जमीन फट रही है और धंसान  हो रहा है.  गोफ बन रहे हैं, लोगों की जाने जा रही है, धन संपत्ति का नुकसान हो रहा है.  फिर भी यह सिलसिला थम नहीं रहा है.  आखिर इसके लिए कोई तो जवाब जवाबदेह होगा.  किसी की भी तो जिम्मेदारी तय होनी चाहिए कि  खतरनाक इलाकों में रहने वाले लोगों को शिफ्ट क्यों नहीं किया जा रहा है. 104 साल से इंतजार करते-करते  भूमिगत आग,अब "धधकने" लगी है.1919 में झरिया के भौरा में भूमिगत आग का पता चला था.यह भूमिगत आग अब "कातिल" हो गई है. वैसे पिछले 25 सालों से वह संकेत दे रही है कि हालात बिगड़ने वाले हैं. लेकिन जमीन पर ठोस काम करने के बजाए हवाबाजी होती रही. झरिया के घनुडीह का रहने वाला परमेश्वर चौहान आग से फटी जमीन के भीतर गिर गया था. कड़ी मेहनत के बाद NDRF की टीम ने  210 डिग्री तापमान के बीच से टीम ने शरीर के अवशेष को बाहर निकाला. 

1995 से ही हादसे का संकेत दे रही है भूमिगत आग 
 
यह आग 1995 से ही संकेत दे रही है कि अब उसकी अनदेखी खतरनाक होगी. 1995 में झरिया चौथाई कुल्ही में पानी भरने जाने के दौरान युवती जमींदोज हो गई थी. 24 मई 2017 को इंदिरा चौक के पास बबलू खान और उसका बेटा रहीम जमीन में समा गए थे. इस घटना ने भी रांची से लेकर दिल्ली तक शोर मचाया ,लेकिन परिणाम निकला शून्य बटा सन्नाटा. 2006 में शिमलाबहाल में खाना खा रही  महिला जमीन में समा गई थी. 2020 में इंडस्ट्रीज कोलियरी में शौच के लिए जा रही महिला जमींदोज हो गई थी. फिर इधर  28 जुलाई 2023 को घनुड़ीह का रहने वाला परमेश्वर चौहान गोफ में चला गया .पहले तो बीसीसीएल प्रबंधन घटना से इंकार करता रहा लेकिन जब मांस जलने की दुर्गंध बाहर आने लगी तो झरिया सीओ की पहल पर NDRF की टीम को बुलाया गया.  टीम ने कड़ी मेहनत कर 210 डिग्री तापमान के बीच से परमेश्वर चौहान के शव का अवशेष निकाला. शायद यह धनबाद कोयलांचल में गोफ में गिरे या समाए लोगों के शव का अवशेष निकालने का पहला मामला था.गोंदूडीह में तीन महिलाओं के जिन्दा दफ़न होने की घटना तो लोगो के मानसपटल पर अभी ताज़ी  है. 

धनबाद से संतोष की रिपोर्ट  

Tags:dhanbadjogtafireghargas

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